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भगदड़ के कारण मोनी अमावस्या का अमृत स्नान रद्द...अखाड़ा परिषद ने लिया फैसला -

भगदड़ के कारण मोनी अमावस्या का अमृत स्नान रद्द…अखाड़ा परिषद ने लिया फैसला

कुंभ में भगदड़ बोले स्वामी प्रेमा नंद पूरी सेना के हवाले होता तो यह स्थिति नहीं होती

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महाकुंभ में भगदड़ से भावुक हुए स्वामी प्रेमा नंद पूरी कैमरे पर फफक-फफक रो पड़े

उत्तर प्रदेश /प्रयागराज कुंभ में भगदड़ मचने के कारण कई श्रद्धालु की मौत और घायल होने की खबर सामने आ रही है। वही इस भगदड़ के कारण मौनी अमावस्या के दिन होने वाले अमृत स्नान को अखाड़ा परिषद ने रद्द कर दिया गया है।

अखाड़ा के महंत स्वामी प्रेमानंद पुरी ने कहा कि बहुत दुख हुआ कि प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण कुंभ को कलंकित होना पड़ा है। हमने व्यक्तिगत तौर पर और सभी अखाड़ा के महंत ने कहा था करोड़ों में श्रद्धालु स्नान करने पहुंच रहे हैं। इस बात को लेकर यहां के प्रशासन से राज्य के डीजीपी मुख्य सचिव से बात कर चुके हैं प्रशाशन को बताया गया कि अत्यधिक भीड़ होने की संभावना है और मीडिया के माध्यम से प्रशासन को भी इसकी जानकारी थी इसके बावजूद भी पूरी प्रशासन की शक्ति वीआईपी लोगों के पीछे लगा दी गई ।

जब भी कोई वीआईपी लोग आते हैं जब भी कोई वीवीआईपी आते हैं तो उसी में पूरा प्रशासन व्यस्त हो जाते हैं और बाकी लोगों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी जाती है हम लोगों ने पूर्व में कहा था कि महाकुंभ को सेना के हवाले कर दिया जाए लेकिन नहीं किया गया और बहुत दुख है कि हमारे भक्त जो हैं वह अमृता स्नान करने पहुंचे और वह भगदड़ का शिकार हो गए फिलहाल भगदड़ के कारण अखाड़ा परिषद में निर्णय लिया है की अमृत स्नान को स्थगित किया गया। उन्होंने आगे कहा कि अब बाकी स्नान ठीक से होगा और कहा कि प्रधानमंत्री ने महाकुंभ को सेना के हवाले करने का संकेत दे दिया है।

साध्वी निरंजन ज्योति ने कही “यह दुखद घटना है। जो भी हुआ वो ठीक नहीं हुआ। अखाड़ा परिषद ने जनहित को ध्यान में रखते हुए अमृत स्नान को रद्द करने का फैसला लिया है।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने कहा, “जो घटना हुई उससे हम बहुत दुखी हैं। हमारे साथ हजारों श्रद्धालु थे। जनहित में हमने फैसला किया कि अखाड़ा आज स्नान में भाग नहीं लेंगे।

मैं लोगों से अपील करता हूं कि वे आज के बजाय वसंत पंचमी पर स्नान के लिए आएं। यह घटना इसलिए हुई क्योंकि श्रद्धालु संगम घाट पहुंचना चाहते थे, इसके बजाय उन्हें जहां भी पवित्र गंगा दिखे, वहीं डुबकी लगा लेनी चाहिए।

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