हजारीबाग // विधायक प्रदीप प्रसाद ने रामनवमी के अवसर पर शोभा यात्रा में डीजे बजाने पर लगाए गए प्रतिबंध का झारखंड विधानसभा में कड़ा विरोध किया। उन्होंने इस निर्णय को धार्मिक परंपराओं और जनता की आस्था के खिलाफ बताते हुए विधानसभा परिसर में सदन के बाहर धरना दिया।विधायक ने कहा कि रामनवमी करोड़ों हिंदुओं की आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। हजारीबाग की रामनवमी पूरे देश में अपनी भव्यता और अनुशासन के लिए प्रसिद्ध है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु शोभायात्रा में शामिल होते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि डीजे पर रोक लगाना लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ अन्याय है। साथ ही उन्होंने मांग की कि हजारीबाग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय श्री चैत्र रामनवमी महोत्सव को राज्य सरकार राजकीय महोत्सव का दर्जा दे और परंपरा के अनुरूप शोभायात्रा में डीजे बजाने की अनुमति दे। विधायक ने प्रशासन से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि रामनवमी सामाजिक एकता और धार्मिक आस्था का प्रतीक है, इसलिए इस पर अनावश्यक प्रतिबंध स्वीकार नहीं किया जाएगा।
नई दिल्ली // उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने आज अहम फैसला सुनाते हुए करीब 13 साल से अचेत अवस्था में बिस्तर पर पड़े रहने को मजबूर गाजियाबाद के हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की इजाजत दे दी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने 100 फीसदी दिव्यांगता के शिकार हरीश राणा के मेडिकल ट्रीटमेंट को हटाने की इजाजत दे दी ।
शांति से मौत का अधिकार संविधान की धारा 21 के तहत जीने के अधिकार का हिस्सा है
उच्चतम न्यायालय ने एम्स को निर्देश दिया कि मरीज को पैलिएटिव केयर में भर्ती किया जाए, ताकि चिकित्सा उपचार को उचित तरीके से हटाया जा सके। मरीज की गरिमा भी बनी रहे। उच्चतम न्यायालय ने इच्छा मृत्यु पर विस्तृत कानून लाने की भी अनुशंसा की है। दरअसल, अपने 32 वर्षीय बेटे के ठीक होने की उम्मीद छोड़ चुके हरीश के माता-पिता ने ही उसके लिए इच्छा मृत्यु की मांग की थी। इस प्रक्रिया में मरीज को जीवित रखने वाले आर्टिफिशियल सपोर्ट को हटाकर उसे मरने दिया जाता है।
उच्चतम न्यायालय ने 09 मार्च, 2018 को पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इच्छा मृत्यु के वसीयत की अनुमति देते हुए कहा था कि हर व्यक्ति को सम्मान के साथ मौत का अधिकार है। संविधान पीठ ने माना था कि शांति से मौत का अधिकार संविधान की धारा 21 के तहत जीने के अधिकार का हिस्सा है ।
नई दिल्ली // उच्चतम न्यायालय पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने की हिम्मत न करें। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि वे इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वो न्यायिक अधिकारियों के काम के लिए सभी जरुरी सुविधाएं उपलब्ध कराएं।
कोई भी ऐसा कदम न उठाया जाए जो इस प्रक्रिया को बाधित करे
कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को ये सुनिश्चित करने को कहा कि कोई भी ऐसा कदम न उठाया जाए जो इस प्रक्रिया को बाधित करे, जब तक कि उसे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अनुमति न मिल जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि इस पूरी प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी हाई कोर्ट के आधिकारित टेलीग्राम ग्रुप पर रियल-टाइम में साझा की जा रही है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि पोर्टल में आने वाली दिक्कतों को तुरंत दूर किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि आगे कोई बाधा न आए।
इन अपीलों पर सुनवाई के लिए दो पूर्व हाई कोर्ट जज या मौजूदा हाई कोर्ट जजों की बेंच गठित
कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारी के फैसले के खिलाफ किसी प्रशासनिक निकाय के समक्ष अपील नहीं होगी। इसकी बजाय कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस दो पूर्व हाई कोर्ट जज या मौजूदा हाई कोर्ट जजों की बेंच गठित कर सकते हैं जो इन अपीलों पर सुनवाई करेगी। उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वे अपील की इस व्यवस्था को लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी करें। याचिका में कहा गया था कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान याचिकाकर्ताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया।
याचिकाकर्ताओं के नाम पहले के वोटर लिस्ट में थे। इन्होंने पहले मतदान किया था लेकिन उनके दस्तावेज स्वीकार नहीं किए गए। तब कोर्ट ने कहा था कि मौजूदा हालात में वे न्यायिक अधिकारियों के फैसलों पर अपील नहीं कर सकती।
क्या है पूरा मामला
बता दें कि 24 फरवरी को उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण में दावे और आपत्तियों का निपटारा करने के लिए राज्य के बाहर के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती करने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा था कि वे इस काम में तीन साल के अनुभव वाले एडिशनल सिविल जजों के अलावा झारखंड और ओडिशा से भी न्यायिक अधिकारियों की तैनाती करें।दरअसल कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि राज्य में ‘तार्किक विसंगति’ के 50 हजार से ज्यादा मामले हैं जिनका निपटारा करने के लिए न्यायिक अधिकारियों की कमी पड़ जाएगी।
कोर्ट ने खर्च को लेकर क्या कहा
हाई कोर्ट की ओर से कहा गया था कि इस काम के लिए करीब 250 न्यायिक अधिकारियों को 80 दिनों तक तैनात करना पड़ेगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि पश्चिम बंगाल से बाहर के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती पर आया खर्च निर्वाचन आयोग वहन करेगा। निर्वाचन आयोग राज्य के बाहर के न्यायिक अधिकारियों के यात्रा, ठहरने और मानदेय का खर्च वहन करेगा।
रांची // अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के स्थायी आमंत्रित सदस्य और झारखंड प्रभारी के राजू 11 से 13 मार्च तक झारखंड के तीन दिवसीय दौरे पर रांची पहुंचेंगे। यह जानकारी पार्टी के प्रदेश इकाई के मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी ने मंगलवार को दी।उन्होंने बताया कि इस दौरान झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश भी उनके साथ विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल रहेंगे।
जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में मार्गदर्शन देंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार के राजू के नई दिल्ली से रांची पहुंचने के बाद वे खूंटी जिले के तोरपा प्रखंड जाएंगे, जहां नगर भवन में आयोजित ब्लॉक संवाद कार्यक्रम में कांग्रेस के पदाधिकारियों, कार्यकर्ता और स्थानीय नेताओं के साथ संगठनात्मक विषयों पर चर्चा करेंगे और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में मार्गदर्शन देंगे।
दावत-ए-इफ्तार कार्यक्रम में भी वे शामिल होंगे,
के राजू उसी दिन शाम को रांची स्थित झारखंड प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित दावत-ए-इफ्तार कार्यक्रम में भी वे शामिल होंगे, जिसमें प्रदेश के वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और विभिन्न समाज के लोग उपस्थित रहेंगे। 12 मार्च को के राजू रांची से जमशेदपुर के लिए रवाना होंगे, जहां पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करेंगे और आगामी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा करेंगे।
राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश देंगे
13 मार्च को वे पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा में आयोजित ब्लॉक संवाद कार्यक्रम में भाग लेंगे और कार्यकर्ताओं को आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश देंगे। इसके बाद वे रांची लौटकर हैदराबाद के लिए प्रस्थान करेंगे।
धनबाद // नगरपालिका चुनाव में धनबाद नगर निगम के मेयर और वार्ड पार्षद एवं चिरकुंडा नगर परिषद के अध्यक्ष तथा वार्ड पार्षद 18 मार्च को शपथ ग्रहण करेंगे।इसकी जानकारी देते हुए मंगलवार को जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका) सह उपायुक्त आदित्य रंजन ने बताया कि धनबाद नगर निगम के नवनिर्वाचित महापौर और वार्ड पार्षदों के साथ 18 मार्च को पूर्वाह्न में समाहरणालय के प्रथम तल पर स्थित सभाकक्ष एवं चिरकुंडा नगर परिषद के अध्यक्ष तथा वार्ड पार्षद के लिए समाहरणालय के तृतीय तल पर स्थित कमरा नंबर 314 में बैठक आयोजित की जाएगी। इसके बाद उन्हें शपथ दिलाई जाएगी।
धनबाद नगर निगम के डिप्टी मेयर और चिरकुंडा नगर परिषद के उपाध्यक्ष का चुनाव
धनबाद नगर निगम के डिप्टी मेयर और चिरकुंडा नगर परिषद के उपाध्यक्ष के लिए सुबह 11.30 से दोपहर 12.30 बजे तक नाम निर्देशन पत्र दाखिल किया जाएगा। दोपहर 12.30 से 01 बजे तक नाम निर्देशन पत्रों की स्क्रुटनी की जाएगी। वहीं दोपहर 01 बजे से 1.30 बजे तक विधि मान्य अभ्यर्थियों की सूची तैयार की जाएगी। दोपहर 1.30 बजे से 1.45 बजे तक नाम वापस लेने का समय निर्धारित है। इसके बाद 1.45 बजे से 2.15 बजे तक मत पत्र की तैयारी की जाएगी।
नगर परिषद के उपाध्यक्ष के लिए होगा मतदान
वहीं दोपहर 2.15 बजे से 03 बजे तक धनबाद नगर निगम के उप महापौर और चिरकुंडा नगर परिषद के उपाध्यक्ष के लिए मतदान किया जाएगा। दोपहर 03 बजे से 3.15 बजे तक मतगणना की जाएगी। वहीं 3.15 बजे से 3.30 बजे तक निर्वाचन परिणाम की घोषणा और निर्वाचन प्रमाण पत्र 42 में तामिला के लिए समय निर्धारित है। इसके बाद दोपहर 3.30 बजे से शाम 04 बजे तक धनबाद नगर निगम के डिप्टी मेयर और चिरकुंडा नगर परिषद के उपाध्यक्ष शपथ लेंगे।
पूर्वी सिंहभूम // जिले के बहरागोड़ा प्रखंड क्षेत्र में मंगलवार को दिनदहाड़े बैंक डकैती की बड़ी वारदात सामने आई है। बहरागोड़ा थाना क्षेत्र के साकरा स्थित केनरा बैंक की शाखा में पांच नकाबपोश अपराधियों ने हथियार के बल पर करीब 15 लाख रुपये लूट लिए। घटना से इलाके में हड़कंप मच गया और लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
चेहरे पर मास्क लगा लिया और पिस्तौल निकालकर बैंक कर्मियों पर तान दी
मिली जानकारी के अनुसार दोपहर में बैंक में सामान्य कामकाज चल रहा था और कर्मचारी लंच की तैयारी में थे। इसी दौरान पांच युवक ग्राहक बनकर बैंक परिसर में दाखिल हुए। अंदर पहुंचते ही उन्होंने अपने चेहरे पर मास्क लगा लिया और पिस्तौल निकालकर बैंक कर्मियों पर तान दी। अचानक हुई इस घटना से बैंक में मौजूद कर्मचारियों और ग्राहकों में अफरा-तफरी मच गई।अपराधियों ने बैंक कर्मियों को जान से मारने की धमकी देते हुए सभी को एक कोने में बंधक बना लिया।
मोबाइल फोन, पर्स और सोने की चेन भी छीन ली।
इसके बाद उन्होंने कैश काउंटर और तिजोरी में रखी रकम समेट ली। बताया जा रहा है कि अपराधी करीब 15 लाख रुपये नकद लेकर फरार हो गए। इस दौरान उन्होंने बैंक कर्मचारियों के निजी सामान भी नहीं छोड़े और उनके मोबाइल फोन, पर्स और सोने की चेन भी छीन ली।
बहरागोड़ा पुलिस मौके पर पहुंची
डकैती की वारदात को अंजाम देने के बाद सभी अपराधी बाइक पर सवार होकर स्थानीय ग्रामीण रास्तों के जरिए पश्चिम बंगाल की दिशा में फरार हो गए। पुलिस से बचने और लोकेशन ट्रेस होने के डर से उन्होंने लूटे गए मोबाइल फोन रास्ते में ही फेंक दिया। घटना की सूचना मिलते ही बहरागोड़ा पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस बैंक परिसर के अंदर और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि अपराधियों की पहचान की जा सके।
पुलिस ने सीमावर्ती इलाकों में चौकसी बढ़ा दी है
साथ ही बैंक कर्मियों और आसपास के लोगों से अपराधियों के हुलिए एवं इस्तेमाल की गई बाइक के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।बहरागोड़ा क्षेत्र की सीमा पश्चिम बंगाल और ओडिशा से सटी होने के कारण पुलिस ने सीमावर्ती इलाकों में चौकसी बढ़ा दी है और सघन वाहन जांच अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही मामले का खुलासा कर अपराधियों को गिरफ्तार किया जाएगा। इधर, बहरागोड़ा थाना प्रभारी शंकर कुशवाहा ने प्रेस को बताया कि अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
रांची // मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन मंगलवार को आदिवासी स्टूडेंट यूनियन ऑफ असम, जारी शक्ति और आदिवासी काउंसिल ऑफ असम की ओर से बिस्वनाथ चारियाली स्थित मेजिकाजन चाय बागान में आयोजित एक जनसभा में मंगलवार को शामिल हुए।
मौके पर मुख्यमंत्री कहा कि असम में निवास करने वाले गरीब-गुरबा, किसान, आदिवासी वर्ग के लोगों पर लम्बे समय से अत्याचार और शोषण की बातें लगातार मैंने सुनी है। उन्होंने कहा कि आप सभी लोगों ने यहां पर कई राजनीतिक और सामाजिक उतार-चढ़ाव देखे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हजारों वर्षों से आप सिर्फ असम नहीं बल्कि इस देश के चाय व्यापार जगत का अभिन्न अंग है।
आपके बूते ही चाय उद्योग चल रहा है। असम के आदिवासी समुदाय के वैसे लोग जो चाय उद्योग में कार्य करते हैं उन्हें काम के बदले मेहनताना के रूप में क्या मिलता है यह किसी से छिपा नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि आप लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ते-लड़ते क्रांतिकारी नेता प्रदीप नाग ने अपने प्राण की आहुति दी। उन्होंने कहा कि असम के आदिवासी समुदाय को उनका अधिकार मिलना चाहिए।
क्यों अलग राज्य की मांग किए थे
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे राज्य झारखंड में भी जल, जंगल, जमीन का संरक्षण और आदिवासी समुदाय की पहचान एवं उनके अधिकार के लिए लम्बा संघर्ष हुआ। लगभग 50 वर्ष के संघर्ष के बावजूद जब परिणाम सकारात्मक नहीं रहा तब हमारे नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन सहित कई नेताओं ने अलग राज्य लेने का निर्णय किया।
आदिवासी भाई-बहनों को यहां एक बड़े परिवर्तन की रास्ते पर चलने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग झारखंड राज्य बनने के बाद यह दुर्भाग्य रहा कि हमारे आदिवासी समुदाय के लोग आर्थिक, बौद्धिक और सामाजिक रूप से मजबूत नहीं बन सके। हमारी सरकार अब झारखंड के आदिवासी समुदाय के लोगों को उनका हक-अधिकार देने का कार्य निरंतर कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि असम में रहने वाले आदिवासी भाई-बहनों को यहां एक बड़े परिवर्तन की रास्ते पर चलने की जरूरत है। इस परिवर्तन के लिए यह जरूरी है कि हम सभी लोगों को एक छत और एक छांव पर आना होगा। अब यहां के आदिवासी समुदाय को बौद्धिक रूप से मजबूत होने की जरूरत है।
हम अपना हक-अधिकार कैसे लेंगे यह हम सभी को पता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी लोग उस समुदाय के लोग हैं जो संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटते हैं। आदिवासी समुदाय कभी भी किसी का बुरा नहीं चाहता है। किसी का शोषण या किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाना हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं रहा है। अब हम अपना हक-अधिकार कैसे लेंगे यह हम सभी को पता है। उन्हाेंने कहा कि आप सभी को संविधान से मिले अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।
इतना बड़ा समूह वर्तमान समय में अपने अधिकार और सम्मान की लड़ाई लड़ रहा है
हेमन्त सोरेन ने कहा कि यह विडंबना है कि हजारों वर्षों से असम में निवास करने वाले आदिवासी समाज के साथ आखिर भेदभाव क्यों किया जा रहा है, उन्हें आदिवासी का दर्जा भी नहीं मिल रहा है। असम का एक बहुत बड़ा धड़ा कई यातनाओं से गुजर रहा है, इतना बड़ा समूह वर्तमान समय में अपने अधिकार और सम्मान की लड़ाई लड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्थिति को बदलने के लिए हम सभी को चट्टान की तरह एकजुट रहना पड़ेगा।
नई दिल्ली // उच्चतम न्यायालय के जस्टिस जेके माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली बेंच ने पहलगाम आतंकी हमले को लेकर विवादित पोस्ट लिखने के मामले में लोक गायिका नेहा सिंह राठौर को अग्रिम जमानत दे दी है। साथ ही कोर्ट ने नेहा सिंह राठौर को जांच में लगातार सहयोग करने का निर्देश दिया ।
नेहा सिंह राठौर ने इस एफआईआर को निरस्त करने की मांग की थी।
दरअसल, नेहा सिंह राठौर ने पहलगाम आतंकी हमले पर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इस पोस्ट के बाद नेहा सिंह राठौर पर उत्तर प्रदेश में एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद नेहा सिंह राठौर पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 197, 152, 353 और आईटी एक्ट की धारा 69ए के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। नेहा सिंह राठौर ने इस एफआईआर को निरस्त करने की मांग की थी।
नई दिल्ली // दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपितों को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश में जांच एजेंसी पर की गई टिप्पणियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए केजरीवाल समेत सभी आरोपितों को नोटिस जारी किया है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने कहा कि ऐसा लगता है कि जांच एजेंसी के खिलाफ सामान्य टिप्पणी की गई है।
दिल्ली के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है…
इसके पहले 9 मार्च को कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के मामले में ट्रायल कोर्ट की ओर से सीबीआई पर की गई प्रतिकूल टिप्पणियों पर रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया है कि वो दिल्ली आबकारी घोटाला मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की आगे सुनवाई नहीं करें। इस आदेश के बाद ईडी ने भी दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। नौ मार्च को सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि ये दिल्ली के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के आदेश को कानूनों के मुताबिक गलत बताते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की थी।
कोर्ट ने कहा था कि चार्जशीट में काफी विरोधाभास हैं।
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को सभी आरोपितों को बरी करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि चार्जशीट में काफी विरोधाभास हैं। कोर्ट ने कहा कि हजारों पन्नों के चार्जशीट में जो तथ्य पेश किए गए हैं वे गवाहों के बयानों से मेल नहीं खाते। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में मनीष सिसोदिया करीब 530 दिन जेल में रहे। अरविंद केजरीवाल दो बार के अंतराल में 156 दिन जेल में रहे। अरविंद केजरीवाल 13 सितंबर 2024 को तब रिहा हुए जब उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई के मामले में जमानत दी।ईडी ने 21 मार्च 2024 को अरविंद केजरीवाल को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। 10 मई को उच्चतम न्यायालय ने केजरीवाल को एक जून तक की अंतरिम जमानत दी थी जिसके बाद केजरीवाल ने 2 जून 2024 को सरेंडर किया था।
27 अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने के कविता को सीबीआई और ईडी के मामले में जमानत दी थी।
केजरीवाल को 26 जून 2024 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। ईडी ने 10 मई 2024 को छठी पूरक चार्जशीट दाखिल किया था, जिसमें बीआरएस नेता के कविता, चनप्रीत सिंह, दामोदर शर्मा, प्रिंस कुमार, अरविंद सिंह को आरोपित बनाया गया है। कोर्ट ने 29 मई को छठे पूरक चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। 27 अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने के कविता को सीबीआई और ईडी के मामले में जमानत दी थी। उच्चतम न्यायालय ने 13 सितंबर 2024 को केजरीवाल को सीबीआई के मामले में नियमित जमानत दी थी। उसके पहले उच्चतम न्यायालय ने 12 जुलाई 2024 को ईडी के मामले में केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी थी।
रांची // साहिबगंज में पाइपलाइन जलापूर्ति योजना को शीघ्र चालू करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को इस परियोजना को पूरा करने के लिए 45 दिनों का अंतिम मौका दिया है।
इंजीनियर-इन-चीफ को जिम्मेदार माना जाएगा
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि निर्धारित अवधि के भीतर यदि साहिबगंज में घर-घर पेयजल पहुंचाने की योजना पूरी नहीं होती है, तो इसके लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ को जिम्मेदार माना जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।सुनवाई के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), साहिबगंज की ओर से स्थल निरीक्षण की रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की गई, जिसका अदालत ने अध्ययन किया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्ष 2008 से यह योजना चल रही है, लेकिन अब तक इसे पूरा नहीं किया जा सका है।
पाइपलाइन के माध्यम से घरों तक जलापूर्ति शुरू हो जाने का सरकार का दावा सही नहीं है।
अदालत ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा कई बार इस परियोजना को पूरा करने का आश्वासन देकर समय मांगा गया है। वहीं, अंडरग्राउंड पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने से कई जगहों पर पानी रिसने की समस्या सामने आई है, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रार्थी की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव शर्मा ने अदालत को बताया कि साहिबगंज में पाइपलाइन के माध्यम से घरों तक जलापूर्ति शुरू हो जाने का सरकार का दावा सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि अंडरग्राउंड पाइपलाइन से पानी का रिसाव हो रहा है, जिससे लोगों को लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता शाहबाज अख्तर ने पक्ष रखते हुए कहा कि परियोजना लगभग पूरी हो चुकी है और यदि कुछ कार्य शेष हैं तो उन्हें जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
साहिबगंज के करीब 19 हजार घरों में कनेक्शन के लिए आवेदन दिया है।
मामले की सुनवाई झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक की खंडपीठ ने की। इससे पहले सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि साहिबगंज में पाइपलाइन जलापूर्ति योजना पूरी कर ली गई है और ट्रायल रन के बाद कुछ घरों में पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति भी शुरू कर दी गई है। सरकार ने अदालत को यह भी जानकारी दी थी कि साहिबगंज के करीब 19 हजार घरों में से अब तक लगभग 8,500 लोगों ने नल से जल कनेक्शन के लिए आवेदन दिया है।
आवेदन करने वाले सभी लोगों को पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाएगा।सरकार के दावों की सत्यता की जांच के लिए अदालत ने पिछली सुनवाई में डालसा, साहिबगंज को स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था।उल्लेखनीय है कि सिद्धेश्वर मंडल ने जनहित याचिका दायर कर साहिबगंज में पाइपलाइन जलापूर्ति योजना को शीघ्र चालू कराने की मांग की है।
रांची // झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को श्रम, नियोजन, कौशल विकास एवं उद्योग विभाग की अनुदान मांगों पर कटौती प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इस दौरान विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध होने के बावजूद झारखंड के सामने कई बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं।
राज्य की प्राकृतिक संपदा और संसाधनों का सही उपयोग करते हुए
रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि खान-खनिज के मामले में झारखंड देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि कोयला उत्पादन के मामले में राज्य पूरे देश में अग्रणी है। ऐसे में झारखंड में विकास की संभावनाएं काफी हैं, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। राज्य की प्राकृतिक संपदा और संसाधनों का सही उपयोग करते हुए रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
प्रदीप यादव ने कहा कि इतनी प्राकृतिक संपदा होने के बावजूद राज्य में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। झारखंड की खनिज संपदा और अन्य संसाधनों का समुचित उपयोग कर नए उद्योग स्थापित किए जाने चाहिए, ताकि युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध हो सकें।
सरकार को बेहतर प्रयास करते हुए राज्य में नए उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए
उन्होंने कहा कि देश जिस आर्थिक और रोजगार संबंधी चुनौतियों से जूझ रहा है, उससे झारखंड भी अछूता नहीं है। इन चुनौतियों के बीच सरकार को बेहतर प्रयास करते हुए राज्य में नए उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे समस्याओं का समाधान संभव हो सके।
विधायक ने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि एचईसी जैसे सार्वजनिक उपक्रम लगातार कमजोर होते जा रहे हैं और वहां कार्यरत कर्मचारियों को समय पर वेतन तक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो बेरोजगारी की समस्या को दूर करना और कठिन हो जाएगा।
औद्योगिक रोजगार को बढ़ावा देने वाली नीतियां नहीं बनेंगी
प्रदीप यादव ने कहा कि जब तक भारत सरकार की नीतियों और दिशा में बदलाव नहीं होगा तथा औद्योगिक रोजगार को बढ़ावा देने वाली नीतियां नहीं बनेंगी, तब तक देश और राज्यों में बेरोजगारी की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं हो पाएगा।
रांची // छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी भूपेंद्रपाल सिंह को झारखंड उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय प्रसाद द्विवेदी की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध किया गया। एसीबी के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुमित गाड़ोदिया ने अदालत को बताया कि भूपेंद्रपाल सिंह ने झारखंड में षड्यंत्र के तहत निम्न स्तर की गुणवत्ता वाली देसी शराब की आपूर्ति की है।
झारखंड सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ है, अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए।
एसीबी ने अदालत को बताया कि झारखंड में जानबूझकर घटिया गुणवत्ता की देसी शराब की आपूर्ति की गई, जो एक अन्य कंपनी के साथ मिलीभगत कर की गई थी। देसी शराब की आपूर्ति का ठेका लेने के बाद आरोपित ने मानकों के अनुरूप शराब उपलब्ध कराने के बजाय घटिया गुणवत्ता की शराब की आपूर्ति की।एसीबी की ओर से दलील दी गई कि इस कृत्य से झारखंड सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ है, इसलिए आरोपित को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। अदालत ने एसीबी की दलीलों को सुनने के बाद भूपेंद्रपाल सिंह को राहत देने से इनकार कर दिया।
उल्लेखनीय है कि भूपेंद्रपाल सिंह छत्तीसगढ़ के देसी शराब निर्माता हैं। उन पर झारखंड में अनस्टैंडर्ड और निम्न स्तर की देसी शराब की आपूर्ति कर राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। इस मामले में एसीबी रांची ने कांड संख्या 9/2025 दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पूर्वी सिंहभूम // जमशेदपुर स्थित प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान एक्सएलआरआई – जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद मंगलवार को शहर में हड़कंप मच गया। यह धमकी संस्थान को एक अज्ञात ई-मेल के माध्यम से भेजी गई थी। ई-मेल मिलते ही संस्थान प्रबंधन में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी गई।
संस्थान के प्रमुख ने दी सूचना पुलिस आई हरकत में
संस्थान के प्रमुख ने इस संबंध में तत्काल वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पीयूष कुमार पांडेय से संपर्क कर धमकी भरे ई-मेल की जानकारी दी। सूचना मिलते ही एसएसपी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बिष्टुपुर थाना प्रभारी आलोक दूबे को पुलिस बल और बम निरोधक दस्ते के साथ मौके पर पहुंचने का निर्देश दिया। इसके बाद पुलिस टीम ने संस्थान के पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया।
पुलिस, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की मदद से पूरे कैंपस की तलाशी ली
एहतियात के तौर पर संस्थान परिसर को खाली कराया गया। क्लासरूम, हॉस्टल और प्रशासनिक भवनों से छात्रों और कर्मचारियों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया। इसके बाद पुलिस, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की मदद से पूरे कैंपस की सघन तलाशी ली गई, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके।इस मामले में पुलिस की साइबर सेल भी सक्रिय हो गई है और धमकी भरे ई-मेल के स्रोत का पता लगाने में जुट गई है। नगर पुलिस अधीक्षक (सिटी एसपी) कुमार शिवाशीष ने बताया कि ई-मेल में पाकिस्तान के एक एयरबेस से बम से हमला करने की बात लिखी गई है।
प्रारंभिक जांच में यह शरारत या मजाक के तौर पर भेजा गया संदेश प्रतीत हो रहा है, फिर भी पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।सिटी एसपी ने कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और जांच पूरी होने तक संस्थान परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
राँची // झारखंड के तीन विश्वविद्यालयों में नये कुलपतियों की नियुक्ति की गई है। इस संबंध में मंगलवार को राजभवन की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई। जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रोफेसर राजीव मनोहर को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू), रांची का कुलपति नियुक्त किया गया है। वे वर्तमान में लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।
तीनों कुलपति पदभार ग्रहण करने की तिथि से अधिकतम तीन वर्ष की….
इसी तरह डॉ.एला कुमार को जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया है। वह फिलहाल इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वीमेन (आईजीडीटीयूडब्ल्यू), दिल्ली में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। वहीं अभय कुमार सिंह को झारखंड राज्य मुक्त विश्वविद्यालय (जेएसओयू), रांची का कुलपति नियुक्त किया गया है। वे वर्तमान में नालंदा विश्वविद्यालय, राजगीर (बिहार) में प्रोफेसर एवं डीन के पद पर कार्यरत हैं।
अधिसूचना के अनुसार, तीनों कुलपति पदभार ग्रहण करने की तिथि से अधिकतम तीन वर्ष की अवधि तक या कुलाधिपति की इच्छा के अनुसार अपने पद पर कार्य करेंगे। साथ ही इन नियुक्तियों के लिए उम्मीदवारों के मूल संस्थानों से सतर्कता (विजिलेंस) क्लीयरेंस प्राप्त होना अनिवार्य होगा।
पश्चिमी सिंहभूम // चाईबासा के एसपी अमित रेणु के निर्देश पर लगभग 12 वर्षों से अपने परिवार से बिछड़े एक बालक को उसके परिजनों से मिलाने में पुलिस को कामयाबी मिली है। इस पहल की पूरे जिले में सराहना की जा रही है।
केरल की बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की अहम भूमिका
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले का एक बालक कई वर्ष पहले घर से भटककर केरल राज्य पहुंच गया था। वहां उसकी देखभाल केरल की बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की ओर से की जा रही थी। जब भी उससे उसके घर का पता पूछा जाता था, तो वह इतना ही बता पाता था कि उसका घर चाईबासा जिले के एक पहाड़ पर है। वह कहता था कि पहाड़ बहुत बड़ा नहीं है और उसके नीचे एक स्कूल स्थित है। वह अपने पिता का नाम बोलराम, मां का नाम मनी, भाई का नाम फंटूश और दो छोटी बहनों के नाम तुरकी और तेरकी बताता था।
सोशल मीडिया और मानवीय सूचना के माध्यम से मिला
इस सीमित जानकारी के आधार पर पुलिस अधीक्षक अमित रेणु ने बालक की पहचान कराने के लिए उसका फोटो और विवरण जिले के सभी थाना प्रभारियों और संबंधित शाखाओं को भेजा। इसके साथ ही विभिन्न माध्यमों से जानकारी साझा कर उसकी पहचान करने का प्रयास शुरू किया गया। पुलिस का यह प्रयास आखिरकार सफल साबित हुआ और सोशल मीडिया और मानवीय सूचना के जरिए बच्चे के परिजनों तक यह खबर पहुंच गई। इसके बाद परिजन सामने आए और पुलिस ने सभी तथ्यों का सत्यापन कराया।
परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर होने की मिली सूचना
जांच में पता चला कि बालक का नाम राजा गोप उर्फ गोमा है। उसके पिता का नाम बोडराम उर्फ बुधराम गोप और माता का नाम मानी गोप है। वह पश्चिम सिंहभूम जिले के सोनुवा थाना क्षेत्र के हाड़ीमारा गांव के रहने वाले हैं। परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है और वर्तमान में जीविका चलाने के लिए पश्चिम बंगाल में मजदूरी कर रहा है।
पुलिस प्रशासन से मदद की गुहार लगाई थी गुहार
परिजनों से संपर्क होने के बाद उन्हें पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने बालक को वापस लाने के लिए पुलिस प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। इसके बाद चाईबासा पुलिस ने एक टीम को केरल भेजा। पुलिस टीम ने आठ मार्च को केरल की बाल कल्याण समिति से बच्चे को प्राप्त किया और उसे लेकर वापस चाईबासा पहुंची।
पुलिस की सक्रियता और संवेदनशीलता की हर ओर चर्चा हो रही है।
मंगलवार को सोनुवा थाना में सभी औपचारिकताओं के बाद बालक को उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया। करीब 12 साल बाद अपने बेटे को पाकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस पूरे मामले में चाईबासा पुलिस की सक्रियता और संवेदनशीलता की हर ओर चर्चा हो रही है।