झारखंड की आवाज

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उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर महिला किसानों को दिया प्रशिक्षण, दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन

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देवघर। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा), देवघर की ओर से एग्रीकल्चर एक्सटेंशन योजना के तहत उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया। कार्यक्रम का आयोजन गोविंदपुर पंचायत के कुर्मी डीह गांव में किया गया, जिसमें करीब 30 महिला किसानों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

प्रशिक्षण के दौरान महिला कृषकों को उर्वरकों के संतुलित और वैज्ञानिक इस्तेमाल के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के विभिन्न उपायों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में बताया गया कि फसल की बेहतर पैदावार के साथ मिट्टी और पर्यावरण की सेहत बनाए रखने के लिए उर्वरकों का जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करना जरूरी है।

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मिट्टी की जांच के बाद करें उर्वरकों का इस्तेमाल

प्रखंड तकनीकी प्रबंधक शशांक शेखर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बनाए रखने, फसल उत्पादन बढ़ाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए उर्वरकों का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अनियंत्रित इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और जल स्रोतों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर ही आवश्यक पोषक तत्वों और उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए।

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खेत की नियमित मृदा जांच कराई जाए और जांच रिपोर्ट के आधार पर मिट्टी में आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति की जाए। इसके साथ ही उर्वरक हमेशा अधिकृत एवं विश्वसनीय स्रोत से खरीदने और निर्धारित मात्रा में ही इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया।

जैविक और रासायनिक खाद के संतुलित उपयोग पर जोर

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को जैविक और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल की जानकारी दी गई। किसानों को गोबर की खाद, कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट और हरी खाद के प्रयोग के फायदे बताए गए।

प्रशिक्षकों ने कहा कि मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए जैविक खाद का उचित इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उत्पादन लागत को कम करने और उत्पादकता बढ़ाने पर भी चर्चा की गई।

नीम लेपित यूरिया और जैव उर्वरकों की जानकारी

प्रशिक्षण में किसानों को नीम लेपित यूरिया के इस्तेमाल की जानकारी दी गई। साथ ही राइजोबियम, एजोटोबैक्टर और पीएसबी जैसे जैव उर्वरकों के महत्व के बारे में बताया गया।

प्रशिक्षकों के अनुसार इन जैव उर्वरकों में मौजूद सूक्ष्मजीव पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। किसानों को बताया गया कि वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों का उपयोग करने से खेती की लागत में कमी, बेहतर उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल सकती है।

30 महिला किसानों को मिला प्रशिक्षण प्रमाण पत्र

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षक के रूप में अविनाश कुमार, अमन कुमार और बलराम कुमार वर्मा ने किसानों को आवश्यक जानकारी दी। मौके पर रिंकी कुमारी और शबनम कुमारी सहित करीब 30 महिला किसानों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी प्रतिभागी महिला किसानों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।

PM Kisan Yojana के नाम पर फर्जी APK भेजकर ठगी, देवघर पुलिस ने 3 साइबर अपराधियों को किया गिरफ्तार

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देवघर // जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच देवघर पुलिस को एक और सफलता मिली है। पुलिस ने सोनारायठाढ़ी थाना क्षेत्र में छापेमारी कर तीन संदिग्ध साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है।

इसी क्रम में पुलिस उपाधीक्षक कैलाश प्रसाद महतो के नेतृत्व में 21 सितंबर 2026 को सोनारायठाढ़ी थाना क्षेत्र के असूरबंधा स्थित ब्लॉक के पीछे मैदान में छापेमारी की गई।

पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि उक्त स्थान पर कुछ संदिग्ध साइबर अपराधी लोगों को अलग-अलग तरीके से ठगी का शिकार बनाने की तैयारी में हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान:-

  • सहादत अंसारी, उम्र करीब 21 वर्ष, पिता सहजाद अंसारी-
  • गुलफराज अंसारी, उम्र करीब 30 वर्ष, पिता अब्बास मियां-
  • सरफराज अंसारी, उम्र करीब 21 वर्ष, पिता जमशेद अंसारी

तीनों आरोपी बिंझा-पिपरा, थाना सोनारायठाढ़ी, जिला देवघर के रहने वाले बताए गए हैं।

PM Kisan के नाम पर APK भेजकर मोबाइल का लेते थे एक्सेस

पुलिस के मुताबिक आरोपियों द्वारा साइबर ठगी के लिए कई तरीके अपनाए जाते थे। इनमें PM Kisan Yojana, बिजली बिल और RTO Challan के नाम पर लोगों को APK फाइल भेजना शामिल था। आरोपी लोगों को इस तरह की फाइल डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते थे और मोबाइल का एक्सेस हासिल करने के बाद ठगी करने का प्रयास करते थे।इसके अलावा आरोपी खुद को Google Pay, PhonePe और Airtel Payment Bank का Customer Care अधिकारी बताकर भी लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।

Cashback का झांसा देकर ठगी

पुलिस के अनुसार आरोपी फर्जी Customer Care प्रतिनिधि बनकर उपभोक्ताओं को Cashback या अन्य लाभ का झांसा देते थे। बातचीत के दौरान लोगों से ऐसी जानकारी या प्रक्रिया पूरी कराने की कोशिश की जाती थी, जिससे उनके साथ वित्तीय धोखाधड़ी की जा सके।

Airtel Payment Bank के नाम पर भी ठगी

पुलिस ने बताया कि आरोपी खुद को Airtel Payment Bank का अधिकारी बताकर उपभोक्ताओं को विश्वास में लेते थे। इसके बाद Airtel Thanks App के माध्यम से Payment Bank कार्ड को बंद करने और फिर सहायता के नाम पर दोबारा चालू कराने का झांसा देकर ठगी करने की कोशिश की जाती थी।

मोबाइल और सिम कार्ड बरामद

छापेमारी के दौरान गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने:- 03 मोबाइल फोन- 04 सिम कार्डबरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड की प्रारंभिक जांच में साइबर ठगी से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। मामले में आगे की जांच की जा रही है।

छापेमारी टीम

कार्रवाई में पुलिस निरीक्षक राकेश कुमार रवि, साइबर थाना देवघर एवं अन्य सशस्त्र बल तथा पुलिस अवर निरीक्षक सह थाना प्रभारी सोनारायठाढ़ी रोहित दांगी और थाना बल शामिल रहे।

देवघर पुलिस द्वारा साइबर अपराध के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस लोगों से अपील करती रही है कि किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK फाइल को डाउनलोड न करें और Google, PhonePe, Airtel Payment Bank अथवा किसी अन्य कंपनी के Customer Care के नाम पर फोन करने वाले व्यक्ति के साथ अपनी बैंकिंग या निजी जानकारी साझा न करें।

मिलावटी एवं एनालॉग पनीर के विरुद्ध देवघर में सघन जांच अभियान

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देवघर // उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया के निर्देशानुसार पर्व-त्योहार को देखते हुए जिले में मिलावटी और एनालॉग (सिंथेटिक/नकली) पनीर के खिलाफ सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है।

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इसी क्रम में देवघर में खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी सुबीर रंजन ने शहर के जसीडीह, बरमसिया, कुंडा, कॉस्टर टाउन, सुभाष चंद्रा रोड के विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों में औचक निरीक्षण एवं पनीर का नमूना संग्रहित किया गया। सुभाष चंद्रा रोड स्थित वीयोरी इन, जसीडीह के सुख सागर, बरमसिया के संजू मिष्ठान भंडार से पनीर का नमूना लेकर राज्य खाद्य जाँच प्रयोगशाला भेजा गया।

जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने पर अग्रेत्तर कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण में खाद्य कारोबारियों को केवल वैध लाइसेंसधारी आपूर्तिकर्ता से ही पनीर प्राप्त कर बेचने का निर्देश दिया गया। अवैध स्रोत से प्राप्त पनीर और मिलावटी पनीर मिलने पर पनीर को जब्त करते हुए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की सुसंगत धाराओं में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गिरफ्तारी के आधार बताए बिना नहीं हो सकती मनमानी कार्रवाई, दोबारा गिरफ्तारी पर भी सुप्रीम कोर्ट ने तय की प्रक्रिया

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नई दिल्ली। गिरफ्तारी की प्रक्रिया और आरोपी के संवैधानिक अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। Jaskaran Jeet Singh Deol बनाम State of Punjab मामले में शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को गिरफ्तारी के आधार (Grounds of Arrest) लिखित रूप में उपलब्ध कराना संवैधानिक आवश्यकता है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि गिरफ्तारी संविधान के अनुच्छेद 22 के प्रावधानों के उल्लंघन के कारण अवैध घोषित होकर आरोपी को रिहा किया जाता है, तो उसके बाद की कार्रवाई निर्धारित कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप ही होनी चाहिए।

क्या था मामला?

मामला पंजाब के एसएएस नगर क्षेत्र की एक FIR से जुड़ा था। पुलिस ने 17 मई 2026 को आरोपी को गिरफ्तार किया था और अगले दिन उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट ने पाया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को लिखित रूप में गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध नहीं कराए गए थे।

मजिस्ट्रेट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत प्राप्त अधिकार का उल्लंघन माना और आरोपी की गिरफ्तारी को अवैध मानते हुए उसे रिहा करने का निर्देश दिया।

मामले में यह मुद्दा भी उठा कि गिरफ्तारी के दौरान 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने संबंधी संवैधानिक आवश्यकता का पालन हुआ या नहीं। सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यही था कि ऐसी स्थिति में आरोपी को उसी मामले में दोबारा गिरफ्तार करने के लिए जांच एजेंसी को किन शर्तों और प्रक्रिया का पालन करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) और 22(2) में दिए गए सुरक्षा प्रावधानों का कठोरता से पालन किया जाना चाहिए।

अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के आधार केवल औपचारिकता नहीं हैं। आरोपी को यह जानने का अधिकार है कि उसे किस आधार पर गिरफ्तार किया गया है। अदालत ने गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में उपलब्ध कराने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद यदि संवैधानिक या कानूनी उल्लंघन के कारण उसे रिहा किया जाता है, तो जांच एजेंसी केवल उसी आधार पर स्वतः उसे दोबारा हिरासत में नहीं ले सकती। यदि जांच के लिए आरोपी की कस्टोडियल इंटरोगेशन आवश्यक मानी जाती है, तो संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।

गंभीर अपराध होने से संवैधानिक अधिकार खत्म नहीं होते

फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी अपराध की गंभीरता संविधान द्वारा प्रदान किए गए अधिकारों को समाप्त नहीं करती। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर कानून के मुताबिक ही अंकुश लगाया जा सकता है और संविधान द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।

पुलिस अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई

मामले में गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में उपलब्ध नहीं कराने को लेकर संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई थी। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि संबंधित जांच अधिकारी को निलंबित किया गया और थाना प्रभारी को पद से हटाकर पुलिस लाइन में स्थानांतरित किया गया।

हाईकोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 29 मई 2026 के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि जांच एजेंसी आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक समझती है, तो उसे Mihir Rajesh Shah मामले में निर्धारित सिद्धांतों और वर्तमान फैसले में बताई गई प्रक्रिया का पालन करना होगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ लगाए गए मूल आरोपों के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले की प्रति सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल तथा राज्य न्यायिक अकादमियों के निदेशकों को भेजने का निर्देश भी दिया है।

फैसला: Jaskaran Jeet Singh Deol v. State of Punjab, Criminal Appeal No. 4234 of 2026, निर्णय दिनांक 21 सितंबर 2026.

देवघर में साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, चार आरोपी गिरफ्तार; 7 मोबाइल और 6 सिम बरामद

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देवघर // साइबर अपराध के खिलाफ देवघर पुलिस की लगातार कार्रवाई के बीच रविवार, 20 सितंबर 2026 को चार संदिग्ध साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी अलग-अलग कंपनियों के कस्टमर केयर प्रतिनिधि और बैंक अधिकारी बनकर लोगों को झांसे में लेते थे और ऑनलाइन ठगी को अंजाम देते थे।

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक देवघर प्रवीण पुष्कर के आदेश पर तथा वरीय पुलिस उपाधीक्षक, साइबर अपराध कैलाश प्रसाद महतो के निर्देश में की गई।

ठगी करने का तरीका

  • फर्जी कस्टमर केयर के नाम पर ठगी का आरोप
  • पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि देवघर जिले में कुछ लोग फर्जी तरीके से Flipkart और Amazon कस्टमर केयर प्रतिनिधि, Airtel Payment Bank अधिकारी तथा Google पर PhonePe कस्टमर केयर के नाम से लोगों से संपर्क कर साइबर ठगी कर रहे हैं।
  • पुलिस के मुताबिक, आरोपियों द्वारा PM किसान योजना और लोन दिलाने के नाम पर भी फर्जी मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाने की जानकारी मिली थी।
  • आरोपियों की कथित कार्यशैली में फर्जी Google Pay, PhonePe, Paytm Customer Care और IRCTC अधिकारी बनकर लोगों से संपर्क करना शामिल था।

सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस टीम ने छापेमारी कर चार लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में गिरफ्तार आरोपियों के पास से मिले मोबाइल फोन और सिम कार्ड के साइबर ठगी में इस्तेमाल होने की बात सामने आई है। मामले में आगे की जांच जारी है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है—-

  • मन्टु दास (38 वर्ष), पिता- बालदेव दास, निवासी लखनुवाँ, थाना मधुपुर, देवघर।-
  • उपेन्द्र कुमार दास (28 वर्ष), पिता- गुलाब दास, निवासी लखनुवाँ, थाना मधुपुर, देवघर।-
  • देवानन्द दास (22 वर्ष), पिता- बालदेव दास, निवासी लखनुवाँ, थाना मधुपुर, देवघर।-
  • अंशु कुमार दास (22 वर्ष), पिता- होरो दास, निवासी तिलौना, थाना देवीपुर, देवघर।

एक आरोपी का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड

  • पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी अंशु कुमार दास पूर्व में साइबर थाना देवघर के कांड संख्या 65/2025 में आरोप-पत्रित है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से

  • कुल—मोबाइल फोन – 07 सिम कार्ड – 06 बरामद किए हैं।

पुलिस बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड की तकनीकी जांच कर रही है। जांच के आधार पर साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों और मामलों के संबंध में भी जानकारी सामने आने की संभावना है।

BKD News Jharkhand अपने पाठकों से अपील करता है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, बैंकिंग पासवर्ड, UPI PIN, कार्ड संबंधी जानकारी या Gift Card की जानकारी साझा न करें। किसी कंपनी के कस्टमर केयर नंबर की पुष्टि उसके आधिकारिक माध्यम से ही करें।

झारखंडी संस्कृति की रंगीन झलक, मांदर की थाप पर थिरके सैकड़ों लोग

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करम महोत्सव में झूमे साहिबगंज के कुर्मी समाज के लोग

साहिबगंज // रविवार को झारखंड प्रदेश अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष प्रेम लाल मंडल उर्फ मंटा मंडल के नेतृत्व में साहिबगंज जिले से सैकड़ों कुर्मी-महतो समाज के लोग पश्चिम बंगाल के पुरुलिया स्थित कोड़ाडीह मैदान में आयोजित करम महोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान भाजपा नेत्री कृष्णा महतो, संजय पटेल, झूलन महतो समेत महासभा के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।करम महोत्सव में पहुंचने पर साहिबगंज से पहुंचे लोगों ने झारखंडी लोक संस्कृति और परंपरा की अनूठी झलक देखी। मैदान में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। मांदर की थाप और पारंपरिक गीत-संगीत के बीच लोग सामूहिक रूप से करम नृत्य करते नजर आए। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे लोगों की सामूहिक प्रस्तुति ने पूरे आयोजन को आकर्षक बना दिया।

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महासभा के सदस्यों ने बताया कि करम पर्व झारखंड की लोक संस्कृति और सामाजिक एकजुटता से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी पारंपरिक संस्कृति, लोकगीत, लोकनृत्य और रीति-रिवाजों से जोड़ने का अवसर मिलता है। साहिबगंज से पहुंचे लोगों ने भी आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए मांदर की थाप पर जमकर नृत्य किया और करम महोत्सव का आनंद उठाया। इस दौरान कोड़ाडीह मैदान में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से पूरे परिसर में उत्सव का माहौल बना रहा। साहिबगंज से पहुंचे कुर्मी-महतो समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से आयोजन में भाग लेकर सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव का संदेश भी दिया। मौके पर मौजूद ओमप्रकाश महतो, राजू महतो, और अन्य महतो परिवार मौजूद थे।

देवघर में रंगदारी और हथियार के भय का मामला: जमशेदपुर से दो आरोपी गिरफ्तार, पिस्टल-कारतूस व CCTV-DVR बरामद

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देवघर। बाबा बैद्यनाथ मंदिर के समीप शिवगंगा क्षेत्र में लगे अस्थायी भादो मेला के दुकानदारों और व्यवसायियों से कथित रूप से मारपीट, छिनतई, रंगदारी मांगने और धमकी देने के मामले में देवघर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले में वांछित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में दो को जमशेदपुर के साकची थाना क्षेत्र से पकड़ा गया, जबकि तीसरे आरोपी की गिरफ्तारी देवघर से की गई।

पुलिस के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से सूचना मिल रही थी कि गौरव झा, निहाल मिश्रा, राहुल शर्मा/मिश्रा तथा उनके अन्य सहयोगी कथित तौर पर अवैध हथियार का भय दिखाकर शिवगंगा क्षेत्र के अस्थायी मेला दुकानदारों एवं व्यवसायियों से रंगदारी मांग रहे थे। रंगदारी नहीं देने पर जान से मारने की धमकी देने और मारपीट करने के आरोप भी सामने आए थे।

पुलिस का यह भी कहना है कि घटनाओं से जुड़े साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरे और DVR को जबरन ले जाने की बात सामने आई थी।

चार अलग-अलग मामले दर्ज

मामले को लेकर देवघर नगर थाना में अलग-अलग तिथियों पर कुल चार प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इनमें नगर थाना कांड संख्या 336/26, 360/26, 363/26 और 364/26 शामिल हैं। इन मामलों में BNS की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, देवघर के नेतृत्व में तीन टीमों का गठन किया गया। गठित टीमों द्वारा नामजद आरोपियों और अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही थी।

जमशेदपुर में छिपे थे आरोपी

पुलिस के मुताबिक, 18 सितंबर 2026 को सूचना मिली कि मामले के वांछित आरोपी जमशेदपुर जिले के साकची थाना क्षेत्र स्थित सरकारी क्वार्टर में छिपे हुए हैं और पुलिस की कार्रवाई के बीच राज्य से बाहर भागने की तैयारी में हैं।

इसके बाद एक पुलिस टीम को तत्काल जमशेदपुर भेजा गया। साकची थाना पुलिस के सहयोग से की गई छापेमारी में नामजद आरोपी गौरव झा और निहाल मिश्रा को पकड़ लिया गया। दोनों को पूछताछ और आगे की कार्रवाई के लिए देवघर नगर थाना लाया गया।

निशानदेही पर पिस्टल और दो कारतूस बरामद

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों द्वारा शिवगंगा स्थित श्मशान घाट की झाड़ियों में हथियार छिपाकर रखने की जानकारी दी गई। इसके बाद पुलिस ने उनकी निशानदेही पर श्मशान घाट की झाड़ियों से एक देशी पिस्टल और दो जिंदा कारतूस बरामद किए।

वहीं, एक अन्य टीम ने आरोपी विक्रम कुमार चौरसिया को उसके घर से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, उसकी निशानदेही पर छतीसी स्थित उसके दूसरे घर से CCTV कैमरा और DVR बरामद किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है—

  1. गौरव झा, उम्र 26 वर्ष, पिता सुभाकांत झा, लक्ष्मीचरण द्वारी लेन, नगर थाना, देवघर।
  2. निहाल मिश्रा, उम्र 26 वर्ष, पिता स्व. मुन्ना मिश्रा, चक्रवर्ती लेन, नगर थाना, देवघर।
  3. विक्रम कुमार चौरसिया, उम्र 25 वर्ष, पिता उमेश मोदी, हरिहरबाड़ी, शयनशाला के पास, नगर थाना, देवघर।

दो आरोपियों को हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी गौरव झा और निहाल मिश्रा पूर्व में कुंडा थाना कांड संख्या 110/23 से जुड़े रहे हैं। इस मामले में दोनों को धारा 302/201/34 IPC के तहत आजीवन कारावास की सजा होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार गौरव झा और निहाल मिश्रा के विरुद्ध देवघर नगर थाना एवं कुंडा थाना में पूर्व के कई मामले भी दर्ज हैं। निहाल मिश्रा के खिलाफ वर्ष 2026 में आर्म्स एक्ट से संबंधित मामला भी दर्ज होने की जानकारी दी गई है।

पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया?

पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान निम्न सामान बरामद किया गया—

  • एक पिस्टल
  • दो जिंदा कारतूस
  • CCTV कैमरा
  • DVR

पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर मामले में शामिल अन्य लोगों और घटनाओं के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

ट्रेन में 13 लाख के आभूषण की चोरी, हावड़ा क्राइम ब्रांच पहुंची राजमहल

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बरहरवा के आरोपी को ससुराल से पकड़ा, लाल मार्केट की दुकान से दो चेन व एक जोड़ी बाली बरामद

राजमहल साहिबगंज // हावड़ा डिविजन के कोटालपोखर के आसपास चलती ट्रेन में कूचबिहार निवासी महिला यात्री निरुपमा दास से करीब 13 लाख रुपये के आभूषण व अन्य सामान की चोरी के मामले में शनिवार को हावड़ा क्राइम ब्रांच की टीम राजमहल पहुंची। टीम ने पाकुड़, साहिबगंज पुलिस और आरपीएफ के साथ मिलकर आभूषणों की बरामदगी को लेकर कार्रवाई की।

जानकारी के अनुसार घटना 14-15 सितंबर की रात की है. निरुपमा दास ट्रेन के एस-1 कोच में बर्थ संख्या 75 व 77 पर यात्रा कर रही थीं.रात करीब 1:30 से 2 बजे के बीच कोटालपोखर के आसपास उनका कॉफी रंग का लेडीज हैंडबैग ट्रेन से गिर गया। बैग में दो सोने की चेन, चूड़ा, माला, हार, दो अंगूठियां, एक अन्य सोने की चेन, मोटोरोला जी35 मोबाइल और जरूरी दस्तावेज थे।

सामान की कीमत करीब 13 लाख रुपये बतायी गयी है । जांच के दौरान पुलिस ने बरहरवा थाना क्षेत्र के एक आरोपी को राजमहल थाना क्षेत्र के नगेनश्वर बाग स्थित उसके ससुराल से पकड़ा । पूछताछ में आरोपी ने आभूषणों को अलग-अलग जगहों पर बेचने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने बरामदगी के लिए छापेमारी शुरू की । इसी क्रम में राजमहल थाना क्षेत्र के लाल मार्केट स्थित प्रदीप साह की सोना दुकान में जांच की गयी, जहां से दो सोने की चेन और एक जोड़ी कान की बाली बरामद की गयी।

पुलिस बरामद आभूषणों का पीड़िता के बताये सामान से मिलान करा रही है।आरपीएफ इंस्पेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि मामले की जांच जारी है. आरोपी को पकड़ा गया है और उसके द्वारा बेचे गये आभूषणों की बरामदगी के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। बरामद सामान का मिलान कराया जा रहा है। लालू मार्केट से दुकानदार नयाबाजार निवासी प्रदीप साह को गिरफ्तार कर किया गया। मौके पर राजमहल थाना प्रभार प्रभारी ओम प्रकाश चौहान पुलिस बल के साथ मौजूद थे। कार्रवाई में हावड़ा क्राइम ब्रांच, सीआईबी बर्द्धमान, आरपीएफ बरहरवा, पाकुड़ आरपीएफ और साहिबगंज पुलिस की टीम शामिल रही। पुलिस अन्य आभूषणों की बरामदगी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

DUSU Election : आंदोलन की राजनीति बनाम संगठन की चुनावी रणनीति

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डूसू चुनाव ने खोली कांग्रेस-NSUI की रणनीति की परतें, टिकट से ज्यादा चला उम्मीदवार का अपना जनाधार

विशेष यादव और दीपांशु शौकीन के प्रदर्शन ने छात्र राजनीति में छेड़ी नई बहस, कांग्रेस-NSUI के टिकट वितरण पर उठे सवाल

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 के नतीजों ने छात्र राजनीति में एक बार फिर संगठन, टिकट और व्यक्तिगत जनाधार के बीच चल रही खींचतान को सामने ला दिया है। चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने तीन प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की, जबकि उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन की शानदार जीत ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि संगठन से टिकट की उम्मीद रखने वाले कुछ चेहरों ने टिकट नहीं मिलने के बाद अलग रास्ता चुना और चुनाव मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। इनमें दीपांशु शौकीन (Dipanshu Sokin) और विशेष यादव (Vishesh Yadav) का नाम प्रमुखता से सामने आया।

15 हजार से ज्यादा वोट लेकर भी जीत से दूर रहे विशेष यादव

संयुक्त सचिव पद का चुनाव बेहद दिलचस्प रहा। ABVP के लक्ष्यराज सिंह को 16,615 वोट मिले और उन्होंने जीत दर्ज की। वहीं विशेष यादव को 15,778 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे। NSUI के गोपाल चौधरी 15,206 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

इस परिणाम का एक खास पहलू यह रहा कि तीनों प्रमुख उम्मीदवारों को 15 हजार से अधिक वोट मिले। यानी मुकाबला केवल संगठन बनाम संगठन नहीं रहा, बल्कि उम्मीदवारों के व्यक्तिगत समर्थन ने भी चुनावी समीकरण को प्रभावित किया।

विशेष यादव गुरुग्राम, हरियाणा के रहने वाले बताए जाते हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के बुद्धिस्ट स्टडीज विभाग के छात्र हैं। उनके पिता सरकारी शिक्षक और मां गृहिणी हैं।

चुनाव से पहले विशेष यादव के NSUI से टिकट की उम्मीद लगाए जाने की चर्चा थी। टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। चुनाव परिणाम में उनका दूसरे स्थान पर रहना इस बात की ओर संकेत करता है कि टिकट नहीं मिलने के बावजूद उम्मीदवार अपना अलग जनाधार तैयार कर सकता है।

दीपांशु शौकीन ने बदल दिया उपाध्यक्ष पद का पूरा समीकरण

डूसू चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर उपाध्यक्ष पद पर देखने को मिला। निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर जीत दर्ज की।

उन्होंने संगठन आधारित राजनीति के मजबूत दावेदारों को पीछे छोड़ते हुए उपाध्यक्ष पद अपने नाम किया। इस चुनाव ने यह सवाल जरूर खड़ा किया कि क्या विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में अब पार्टी या छात्र संगठन के आधिकारिक टिकट से ज्यादा महत्व उम्मीदवार के व्यक्तिगत संपर्क और छात्र समुदाय में उसकी स्वीकार्यता का हो रहा है?

दीपांशु शौकीन की कहानी इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि वह पहले NSUI से टिकट की मांग कर रहे थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उनका नामांकन हुआ था, लेकिन बाद में संगठन की ओर से नामांकन वापस लेने को कहा गया। शौकीन ने नामांकन वापस नहीं लिया और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में डटे रहे।

नतीजा सामने आया तो उन्होंने न केवल चुनाव जीता, बल्कि बड़े अंतर से जीत दर्ज की।

साधारण परिवार से निकला छात्र नेता

दीपांशु शौकीन दिल्ली के पीरागढ़ी इलाके से आते हैं। उनके पिता बस कंडक्टर और मां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने भगत सिंह कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की है और वर्तमान में बुद्धिस्ट स्टडीज विभाग में अध्ययनरत हैं।

उनकी जीत को लेकर समर्थकों का दावा है कि उन्हें विभिन्न वर्गों के छात्रों का समर्थन मिला। हालांकि किसी चुनाव में वोट मिलने के कारणों को केवल एक कारक से जोड़ना उचित नहीं होगा। व्यक्तिगत लोकप्रियता, छात्र मुद्दे, प्रचार, संगठनात्मक समर्थन और उम्मीदवार की स्थानीय पकड़ जैसे कई तत्व परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

NSUI के सामने अब सबसे बड़ा सवाल—टिकट या जनाधार?

डूसू चुनाव के बाद NSUI की रणनीति पर बहस स्वाभाविक है। खासकर इसलिए क्योंकि संगठन से जुड़े रहे उम्मीदवारों में से एक ने टिकट विवाद के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

यह परिणाम NSUI के लिए एक संगठनात्मक सवाल जरूर खड़ा करता है—क्या उम्मीदवार चयन में जमीनी लोकप्रियता और छात्र समुदाय के बीच व्यक्तिगत स्वीकार्यता को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है?

यह सवाल केवल दिल्ली विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है। छात्र राजनीति में उम्मीदवार चयन किसी भी संगठन की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में डूसू का यह परिणाम आने वाले समय में टिकट वितरण और उम्मीदवार चयन को लेकर होने वाली बहस को प्रभावित कर सकता है।

राहुल गांधी के सामाजिक न्याय के मुद्दों और चुनावी टिकट वितरण के बीच अंतर?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी लंबे समय से जाति जनगणना, सामाजिक न्याय और आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व की बात करते रहे हैं। कांग्रेस की राजनीति में SC, ST और OBC प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी लगातार प्रमुखता से उठाया जाता रहा है।

लेकिन राजनीतिक बहस का एक दूसरा पहलू यह है कि संगठन इन मुद्दों को चुनावी उम्मीदवार चयन में किस हद तक लागू करता है।

डूसू चुनाव के बाद कांग्रेस और NSUI को लेकर आलोचकों की ओर से यही सवाल उठाया जा रहा है कि राजनीतिक मंच पर सामाजिक प्रतिनिधित्व की बात और चुनावी मैदान में उम्मीदवार चयन—क्या दोनों के बीच पर्याप्त तालमेल है?

हालांकि डूसू जैसे एक छात्रसंघ चुनाव के परिणाम के आधार पर विधानसभा, लोकसभा या राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस की लगातार हार का एकमात्र कारण टिकट वितरण को मानना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा। बड़े चुनावों के परिणाम कई अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों से प्रभावित होते हैं।

आंदोलन की राजनीति बनाम संगठन की चुनावी रणनीति

कांग्रेस की ओर से आरक्षण, संविधान और जाति जनगणना जैसे मुद्दों को लेकर अभियान चलाया जाता रहा है। इन मुद्दों से जुड़े राजनीतिक संदेशों का प्रभाव व्यापक स्तर पर देखने को मिलता है।

लेकिन चुनावी राजनीति में केवल मुद्दे उठाना और उन मुद्दों को उम्मीदवार चयन तथा संगठन के स्थानीय ढांचे में लागू करना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।

डूसू चुनाव ने इसी अंतर पर नई बहस को जन्म दिया है।

एक तरफ सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व की राजनीति का संदेश है, तो दूसरी तरफ छात्र चुनाव का जमीनी गणित है—कौन उम्मीदवार छात्रों के बीच कितना सक्रिय है, किसकी व्यक्तिगत पकड़ है और कौन संगठन के बाहर रहकर भी समर्थन जुटाने में सक्षम है।

डूसू चुनाव का संदेश क्या है?

2026 के डूसू चुनाव में ABVP ने तीन प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय दीपांशु शौकीन के खाते में गया।

विशेष यादव का 15,778 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहना और दीपांशु शौकीन का निर्दलीय रहते हुए उपाध्यक्ष पद जीतना छात्र राजनीति के बदलते समीकरण की ओर जरूर ध्यान खींचता है।

इन परिणामों से कम से कम इतना स्पष्ट है कि छात्र राजनीति में संगठन की ताकत के साथ-साथ उम्मीदवार का व्यक्तिगत जनाधार भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

अब देखना होगा कि डूसू के इस चुनावी परिणाम से NSUI और कांग्रेस अपनी संगठनात्मक रणनीति, उम्मीदवार चयन और छात्र राजनीति के मॉडल को लेकर क्या निष्कर्ष निकालते हैं।

घटवाल-घटवार समाज ने मनाया आदिम जनजाति सांस्कृतिक करम परब महोत्सव

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देवघर // जिला के मोहनपुर प्रखंड क्षेत्र में घटवाल-घटवार आदिवासी समाज द्वारा शनिवार को तिरनगर मैदान (त्रिकूट पहाड़, देवघर) में आदिम जनजाति सांस्कृतिक करम परब महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन किया गया। यह महोत्सव करम गोसाईं, करमा परब और जावा गोसाईं की पारंपरिक मान्यताओं एवं लोक संस्कृति को समर्पित रहा, जिसमें समाज के सैकड़ों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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महोत्सव के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ करम पूजा संपन्न हुई। महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीत और नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम को आकर्षक बनाया। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक संगीत की धुन पर प्रस्तुत नृत्य ने आदिवासी संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में माताएं, बहनें, बेटियां, युवा एवं बुद्धिजीवी शामिल हुए। सभी ने सामूहिक रूप से करम पर्व की परंपराओं का निर्वहन करते हुए सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश दिया।

अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक

आयोजकों ने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी सामूहिक रूप से महोत्सव का आयोजन किया गया है। इसका उद्देश्य समाज की पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाज, लोकगीत, लोकनृत्य और धार्मिक मान्यताओं को संरक्षित करना तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। महोत्सव के दौरान पूरे क्षेत्र में उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला।

मोके पर ये प्रमुख रूप से उपस्थित रहे

कार्यक्रम में खुशवंत प्रधान,महेंद्र सिंह, शैलेश राय, राजू सिंह, हेम नारायण सिंह, बलवंत सिंह, वनवारी प्रधान, विरेन्द्र सिंह, अनिल सिंह, मुकेश कुमार राय, चुन्ना सिंह, चंदन राय, कुलवंत सिंह, अजय बाबा, तीर्थनाथ, देव नारायण सिंह, सुघरी सिंह, भीम सिंह, पल्टू राय, प्रकाश राय, मृतुंजय राय, भूपाल सिंह, संजय सिंह, रोहित राय, नागेंद्र राय, शालिग्राम सिंह, टिपन राय, रघुनाथ राय, मनोज राय, नरेंद्र राय, भोला राय, शिव शंकर, विजय, पंकज कुमार, नीतीश कुमार राय, कालेश्वर सिंह, अनिल राय, विकास राय, विजय सिंह, किशन सिंह, जानकी देवी, रंजीत राय, दुर्गा सिंह, देवनारायण राय एवं अजय कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

देवघर में 10 साइबर अपराधी गिरफ्तार, 15 मोबाइल और 18 सिम बरामद

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देवघर // साइबर अपराध के खिलाफ देवघर पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर के निर्देश पर डीएसपी कैलाश प्रसाद महतो के नेतृत्व में पुलिस टीम ने 18 सितंबर 2026 को पथरड्डा ओपी क्षेत्र में छापेमारी कर कथित तौर पर साइबर ठगी में संलिप्त 10 लोगों को गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार, गुप्त सूचना मिली थी कि पथरड्डा ओपी क्षेत्र में कुछ लोग अलग-अलग कंपनियों और सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को फोन कर ऑनलाइन ठगी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने संदिग्धों को पकड़ा। उनके पास से मिले मोबाइल फोन और सिम कार्ड की प्रारंभिक जांच में साइबर ठगी से जुड़े साक्ष्य मिलने की बात पुलिस ने कही है।

अलग-अलग तरीकों से करते थे ठगी

  • पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी फर्जी कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर लोगों को कैशबैक या सहायता का झांसा देते थे।
  • इसके अलावा PM किसान योजना, बिजली बिल और RTO चालान आदि के नाम पर APK फाइल भेजकर मोबाइल का एक्सेस हासिल करने की कोशिश की जाती थी।
  • Airtel Payment Bank का अधिकारी बताकर ग्राहकों को झांसे में लेते थे। Airtel Thanks App के माध्यम से कार्ड बंद होने या उसे दोबारा चालू कराने के नाम पर भी ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

15 मोबाइल और 18 सिम बरामद

  • छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 15 मोबाइल फोन, 18 सिम कार्ड और एक एटीएम कार्ड बरामद किया है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी जांच में जब्त मोबाइल नंबरों और IMEI नंबरों के संबंध में अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

ये आरोपी हुए गिरफ्तार

  • महेश राणा, गौतम राणा, पाण्डव महतो, शुभम यादव, उत्तम राणा, लालूमोहन राणा, कैलाश दास, कुन्दन कुमार दास, मनुवर अंसारी और छलबली कुमार शामिल हैं।

सभी देवघर जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों के रहने वाले बताए गए हैं।चार आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी सामने आया

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में उत्तम राणा के खिलाफ देवघर साइबर थाना कांड संख्या 38/21, कैलाश दास के खिलाफ कांड संख्या 102/24, कुन्दन कुमार दास के खिलाफ कांड संख्या 85/20 और मनुवर अंसारी के खिलाफ कांड संख्या 81/20 में मामला दर्ज है।पुलिस ने बताया कि मामले में बरामद डिजिटल उपकरणों की तकनीकी जांच जारी है। जांच के आधार पर साइबर ठगी से जुड़े अन्य मामलों और संभावित नेटवर्क के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

साहिबगंज पुलिस की बड़ी कार्यवाही तीन अपराधि हथियार के साथ गिरफ्तार

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साहिबगंज// बीती रात मुफ्फसील थाना पुलिस ने तीन अपराधियों को हथियार के साथ गिरफ्तार किया है। सभी अपराधी हथियार के बल पर बलुआ दियारा में पिकअप वाहन से लूट की योजना बना रहा था। जिसकी सुचना समय रहते पुलिस अधीक्षक साहिबगंज को मिली। जिनके निर्देश पर मुफ्फसिल थाना पुलिस की एक विशेष टीम गठित कर छापामारी की गई। जिसमे एक बड़ी देशी बन्दुक के साथ तीन अपराधी मौका से गिरफ्तार हुआ है। जिनकी पहचान मो जुनैद पिता मो निसार महादेवगंज, मो फजल पिता मो खुर्शीद रेजानगर और मो अरबाज पिता शेख जलु कोदरजन्ना सभी थाना मुफ्फसिल साहिबगंज का रहने वाला है। जिनके पास से पुलिस को एक 25 इंच लम्बा देशी कट्टा, और एक मोटर साइकिल पुलिस ने बरामद किया। सभी पर प्राथमिकी दर्ज कर जेल भेज दिया। पुलिस की त्वरित कार्यवाही से एक बड़ी वारदात को ताला जा सका।

देवघर में साइबर ठगी के आरोप में चार गिरफ्तार, 6 मोबाइल और 4 सिम बरामद

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देवघर // साइबर अपराध के खिलाफ देवघर पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर के निर्देश पर पुलिस उपाधीक्षक कैलाश प्रसाद महतो के नेतृत्व में 16 सितंबर 2026 को मधुपुर थाना क्षेत्र में छापेमारी कर चार संदिग्ध साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार, गुप्त सूचना मिली थी कि मधुपुर थाना क्षेत्र में कुछ लोग अलग-अलग कंपनियों और सरकारी योजनाओं के नाम पर आम लोगों को फोन कर ऑनलाइन ठगी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने चार आरोपियों को पकड़ा।

इन तरीकों से करते थे साइबर ठगी

  • पुलिस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक आरोपी फर्जी कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। इनमें Flipkart, Amazon Pay, Google Pay, PhonePe और Paytm के कस्टमर केयर अधिकारी बनकर कैशबैक या सहायता के नाम पर ठगी करने का तरीका शामिल था।
  • इसके अलावा आरोपियों द्वारा PM किसान योजना, बिजली बिल और RTO चालान के नाम पर APK फाइल भेजकर लोगों के मोबाइल तक पहुंच हासिल करने और उसके बाद साइबर ठगी करने की बात सामने आई है।
  • पुलिस के मुताबिक, एक अन्य तरीके में आरोपी खुद को Airtel Payment Bank का अधिकारी बताकर ग्राहकों को विश्वास में लेते थे। Airtel Thanks App के माध्यम से कार्ड बंद होने की बात कहकर उसे दोबारा चालू कराने या सहायता उपलब्ध कराने के नाम पर लोगों को ठगी का शिकार बनाया जाता था।

चारों आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है

  • —1. अनिश दास, उम्र करीब 21 वर्ष, पिता बिनोद दास, निवासी बियाही गड़हा, थाना मधुपुर।
  • 2. सुमेश महरा, उम्र करीब 38 वर्ष, पिता फुचा महरा, निवासी खरना, थाना सारठ।
  • 3. राहुल दास, उम्र करीब 26 वर्ष, पिता बुलबुल दास, निवासी रोहिणी आजान टोला, थाना जसीडीह।
  • 4. दिनेश दास, उम्र करीब 22 वर्ष, पिता कार्तिक दास, निवासी गुनियासोल, थाना मधुपुर।सभी आरोपी देवघर जिले के रहने वाले बताए गए हैं।

छह मोबाइल और चार सिम बरामद

  • छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 6 मोबाइल फोन और 4 सिम कार्ड बरामद किए हैं।

पुलिस के अनुसार, बरामद मोबाइल और सिम की प्रारंभिक जांच में साइबर ठगी से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।पुलिस ने बताया कि तकनीकी जांच के दौरान जब्त मोबाइल नंबरों और IMEI नंबरों के विरुद्ध विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी से संबंधित शिकायतें दर्ज पाए जाने की जानकारी सामने आई है।

एक आरोपी का आपराधिक इतिहास भी सामने आया

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी सुमेश महरा पूर्व में देवघर साइबर थाना कांड संख्या 102/24 में भी आरोपित रहा है।

फिलहाल पुलिस बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच कर रही है। जांच के आधार पर साइबर ठगी के नेटवर्क और अन्य संभावित संलिप्त लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

बेटे के जन्म के कुछ घंटों बाद महिला दारोगा की मौत, रांची पुलिस लाइन में दी गई अंतिम सलामी

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रांची // राजधानी रांची में एक दुखद घटना सामने आई है। वर्ष 2018 बैच की महिला दारोगा सुमित्रा कच्छप का इलाज के दौरान निधन हो गया। वह गिरिडीह जिला बल में पदस्थापित थीं और वर्तमान में झारखंड हाईकोर्ट, रांची में गिरिडीह जिला बल की कोर्ट नोडल पदाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त थीं।

जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह रांची के तुपुदाना स्थित राजेंद्र नर्सिंग होम में ऑपरेशन के जरिए सुमित्रा कच्छप ने एक बेटे को जन्म दिया था। परिवार में नवजात के आगमन की खुशी थी, लेकिन प्रसव के कुछ घंटों बाद देर रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।

परिजनों के अनुसार, रात करीब 12 बजे उनकी हालत गंभीर होने लगी। उन्हें तत्काल देवनिका अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजन उन्हें लालपुर क्षेत्र के एक बड़े अस्पताल लेकर पहुंचे। गंभीर स्थिति को देखते हुए वहां भी भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए रिम्स ले जाया गया।

रिम्स में चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन बुधवार सुबह करीब छह बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। बेटे को जन्म देने के कुछ ही घंटों बाद महिला दारोगा की मौत से परिवार में मातम पसर गया।

पुलिस विभाग में शोक की लहर

सुमित्रा कच्छप के निधन की सूचना मिलने के बाद झारखंड पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। अधिकारियों और सहकर्मियों ने उनके आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त किया।पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके पार्थिव शरीर को रांची पुलिस लाइन लाया गया। यहां पुलिस विभाग की ओर से उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी गई। इस दौरान पुलिस अधिकारी और उनके सहकर्मी भावुक नजर आए।

नवजात के जन्म की खुशी बदली मातम में

जिस परिवार में मंगलवार सुबह बेटे के जन्म की खुशी थी, वहां कुछ ही घंटों बाद मातम छा गया। नवजात ने दुनिया में कदम रखा, लेकिन उसकी मां सुमित्रा कच्छप हमेशा के लिए इस दुनिया से विदा हो गईं। सुमित्रा कच्छप के आकस्मिक निधन से उनके परिवार के साथ-साथ झारखंड पुलिस विभाग में भी शोक का माहौल है।

UPI लेन-देन पर MDR लागू करने के निर्णय का संथाल चैंबर ने किया विरोध

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देवघर // संथाल परगना चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, देवघर ने 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के व्यापारिक UPI (P2M) लेन-देन पर 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) लागू किए जाने के निर्णय पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार एवं NPCI से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

चैंबर अध्यक्ष गोपाल कृष्ण शर्मा एवं महासचिव निरंजन कुमार सिंह ने कहा

UPI देश के व्यापार एवं डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। ऐसे में व्यापारियों पर किसी भी प्रकार की अतिरिक्त भार लेन-देन पर लागू करना विशेषकर छोटे एवं मध्यम व्यवसायों के लिए चिंता का विषय है।*चैंबर ने कहा कि भले ही MDR सीधे ग्राहक से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है, लेकिन इसका भार व्यापारियों की व्यावसायिक लागत, लाभ एवं डिजिटल भुगतान को अपनाने की प्रवृत्ति को प्रभावित कर सकता है।

सरकार के अनुसार ₹2,000 तक के भुगतान तथा पात्र छोटे व्यापारियों के लेन-देन पर MDR नहीं लगेगा, जबकि निर्धारित श्रेणी के ₹2,000 से अधिक के P2M लेन-देन पर 0.4% MDR लागू होगा।चैंबर ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि UPI को देश की डिजिटल भुगतान व्यवस्था का कम-लागत एवं व्यापार-अनुकूल माध्यम बनाए रखने के लिए MDR व्यवस्था की पुनः समीक्षा की जाए तथा व्यापारिक संगठनों से व्यापक परामर्श के बाद ही आगे की व्यवस्था लागू की जाए।

चैंबर ने स्पष्ट किया कि वह डिजिटल भुगतान एवं UPI के विस्तार का पूर्ण समर्थन करता है, लेकिन डिजिटल व्यापार को प्रोत्साहित करने वाली व्यवस्था व्यापारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ का कारण नहीं बननी चाहिए।