
दुमका // झारखंड की उपराजधानी दुमका में न्याय का महाकुंभ। झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री तरलोक सिंह चौहान की अगुवाई में स्टेट लेवल लीगल सर्विसेज कम एंपावरमेंट कैंप का आयोजन किया गया। यहीं से पूरे राज्य में राष्ट्रीय लोक अदालत का वर्चुअल उद्घाटन भी हुआ। दुमका कन्वेंशन सेंटर में आयोजित नेशनल लोक अदालत कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था न्याय को आम जनता तक पहुँचाना। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने कहा न्याय केवल कोर्ट तक सीमित न रहे, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में उसकी अनुभूति हो। विधिक सेवा शिविर न्यायपालिका को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का प्रयास है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद व झालसा कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा गायब हुई लड़कियों की रिकवरी के बाद उन्हें सेल्फ हेल्प ग्रुप से जोड़ा जाये ताकि उनका इनकम होने से वे कभी भी दिल्ली या दूसरे शहरों में नहीं जाएंगी। वही उन्होंने डायन-बिसाही जैसी कुप्रथाओं को अज्ञानता बताया और कहा कि समाज को इन अंधविश्वासों के खिलाफ जागरूक करना होगा। इस दौरान विभिन्न सरकारी विभागों के लगाये गए स्टॉल का मुख्य न्यायाधीश ने निरिक्षण किया। मुख्य न्यायाधीश और अतिथियों ने मौके पर ही अबुआ आवास की चाबियां, अबुआ स्वास्थ्य कार्ड, क्षतिपूर्ति राशि और आजीविका योजनाओं जैसे दीदी की दुकान और जेंडर रिसोर्स सेंटर के लिए वित्तीय सहायता (₹3-3 लाख) सहित कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लाभुकों को वितरित किया। नेशनल लोक अदालत प्रशासन, न्यायिक पदाधिकारियों और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी के साथ सम्पन्न हुआ, जो न्याय और सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।