राँची // अलग झारखंड राज्य आंदोलन के नायक और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को भारत सरकार ने मरणोपरांत पद्मभूषण सम्मान देने की घोषणा की है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या सरकार की और से इसकी घोषणा की गई।

देश का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण इस साल 13 नायकों को मिला है। जिसमें झारखंड से शिबू सोरेन को सार्वजनिक मामलों के लिए यह पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा : दिशोम गुरु श्रद्धेय शिबू सोरेन जी को उनके अतुलनीय योगदान के लिए मरणोपरांत पद्मभूषण सम्मान प्रदान किया जाना अत्यंत गौरव का विषय है।
श्रद्धेय शिबू सोरेन जी ने आदिवासी, मूलवासी एवं शोषित समाज के अधिकार, झारखंड राज्य का निर्माण और सामाजिक न्याय के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनका जीवन त्याग, संकल्प और जनसेवा की मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
गुरु जी का जन्म 11 जनवरी 1944 को हजारीबाग जिला अब रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में एक साधारण आदिवासी परिवार में हुआ था। उनके पिता सोबरन सोरेन एक सामाजिक रूप से जागरूक व्यक्ति थे, जो अपने समुदाय के लिए कार्य करते थे।
शिबू सोरेन के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएं:
पिता की हत्या : 27 नवंबर 1957 को उनके पिता सोबरन सोरेन की हत्या महाजनों और साहूकारों के साथ जमीन विवाद के कारण हुई थी, जिसने उनके जीवन को एक नया मोड़ दिया और उन्हें सामाजिक कार्यों और राजनीति की ओर प्रेरित किया।
आंदोलन की शुरुआत :
शिबू सोरेन ने महाजनी प्रथा के खिलाफ लड़ाई शुरू की और महाजन के विरोध आंदोलन शुरू किया और उसी से शुरू हुआ धनकटनी आंदोलन शुरू किया इस आंदोलन में महिलाएं धान काटती और पुरुष तीर कमान लिए घूमता इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य आदिवासियों को उनकी जमीन पर अधिकार दिलाना और महाजनों के शोषण से मुक्ति दिलाना था।
आंदोलन से गुरु जी को लोगों ने झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना :
4 फरवरी 1973 को शिबू सोरेन ने अपने सहयोगियों बिनोद बिहारी महतो और एके राय के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य झारखंड के आदिवासियों और मूलवासियों के अधिकारों की रक्षा करना और एक अलग झारखंड राज्य की मांग को बल देना था।
पहली बार जेल 1975 में गए थे
शिबू सोरेन पहली बार जेल 1975 में गए थे, जब उन्हें चिरूडीह कांड के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस घटना में 11 लोगों की मौत हुई थी, और शिबू सोरेन पर हिंसक भीड़ का नेतृत्व करने का आरोप लगा था। उन्हें कई साल तक जेल में रखा गया था, लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था।
चिरूडीह कांड के मामले में शिबू सोरेन की गिरफ्तारी और जेल जाने के पीछे का कारण आदिवासी अधिकारों की लड़ाई और उनके आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को माना जाता है। इस घटना ने उनके जीवन और राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला।
राजनीतिक सफर :
शिबू सोरेन ने तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और केंद्र में कोयला मंत्री भी रहे। वे आठ बार लोकसभा सांसद और दो बार राज्यसभा सदस्य चुने गए ।
शशीनाथ झा हत्याकांड : 1994 में उनके निजी सचिव शशीनाथ झा की हत्या के मामले में भी उनकी संलिप्तता का आरोप लगा, जिसके लिए उन्हें दिल्ली की एक अदालत ने दोषी ठहराया था, लेकिन बाद में वे बरी हो गए ।
विरासत: शिबू सोरेन का जीवन आदिवासी अधिकारों की लड़ाई और राजनैतिक परिवर्तन का प्रतीक रहा। उनकी विरासत अब उनके बेटे हेमंत सोरेन और JMM के बैनर तले जारी है, जो आदिवासी राज्य की स्थापना और आज़ादी से जुड़ी मूल मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेती है । शिबू सोरेन ने अपने राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण चुनाव लड़े। उनकी चुनावी यात्रा के कुछ महत्वपूर्ण पड़ाव इस प्रकार हैं 1977 : शिबू सोरेन ने अपना पहला चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
1980 : उन्होंने दुमका लोकसभा सीट से चुनाव जीता और पहली बार सांसद बने। 1989, 1991, 1996 : शिबू सोरेन ने दुमका लोकसभा सीट से लगातार तीन बार चुनाव जीते। 2019 : उन्होंने अपना आखिरी चुनाव लड़ा, लेकिन दुमका लोकसभा सीट से हार गए।
शिबू सोरेन झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री
2000 : शिबू सोरेन पहली बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने, लेकिन उनकी सरकार ज्यादा समय तक नहीं चल सकी।
2008-2009 : शिबू सोरेन दूसरी बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने।2009-2010 : शिबू सोरेन तीसरी बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने।इसके अलावा, शिबू सोरेन तीन बार राज्यसभा के सदस्य भी रहे। उनकी राजनीतिक यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने हमेशा आदिवासी समुदाय के अधिकारों की लड़ाई जारी रखी।