
जींद // साइबर थाना पुलिस ने युवती को डिजिटल अरेस्ट कर 81 हजार रुपये की धोखाधड़ी के मामले में लगभग पौने दो साल बाद धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। नरवाना के बीरबल नगर निवासी नीतू ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह ट्रेड मार्क फाइलिंग एजेंट का कार्य करती है। 15 व 16 जुलाई 2024 को उसके पास अलग-अलग नंबरों से कॉल आई और बताया कि वो ट्राई से बोल रहे हैं और आपके नंबर को बंद किया जा रहा है। अगर कोई दिक्कत है तो मुंबई पुलिस को कॉल ट्रांसफर की जा रही है। फिर एक व्यक्ति ने मुंबई पुलिसकर्मी बन कर उसका नंबर मनी लोंड्रिंग में प्रयोग होना बताया। बाकायदा उसे दो दिन फोन किए और अपना बैंक खाता वेरीफाई करवाने की बात कही। जिसके बाद आरोपितों ने खाता नंबर देकर अलग-अलग समय में 81 हजार रुपये डलवा लिए।
जिसके बाद उसने वेरीफिकेशन पूरी होने के बाद राशि वापस मांगी तो आरोपित ने केस से नाम निकलवाने के लिए डेढ़ लाख रुपये की डिमांड की। जब उसने अपने दोस्त से बात शेयर की तो धोखाधड़ी का पता चला। 24 जुलाई 2024 को उसने बैंक तथा टोल फ्री नंबर पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई। लगातार वो कभी किसी थाने तो कभी किसी थाने में अपनी शिकायत लेकर जाती रही। कार्रवाई न होने पर उसने अदालत में याचिका डाली तो अदालत के आदेश पर उसकी होल्ड राशि तो वापस आ गई लेकिन मामला दर्ज नही हुआ। आखिरकार उसने शहर थाना नरवाना, साइबर थाना, बैंक को लीगल नोटिस भेजे। कई बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी कोई रिप्लाई नही आया। आखिरकार उसने दो सितंबर 2025 को पुलिस रवैये के खिलाफ मानव अधिकार आयोग को शिकायत भेजी। जिसमें शहर थाना नरवाना ईश्वर सिंह, आईओ सुरेश कुमार, सब इंसपेक्टर गीता पर लापरवाही बरतने, अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाए गए।मानव अधिकार आयोग ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सिन्हा को सौंपी गई। जिसके आधार पर साइबर थाना पुलिस ने नीतू शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। रविवार को जानकारी देते हुए साइबर थाना प्रभारी कुलदीप सिंह ने बताया कि साइबर धोखाधड़ी की शिकायत मिलने पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
