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परीक्षा प्रश्नों पर आपत्ति शुल्क को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एसएससी से मांगा जवाब -

परीक्षा प्रश्नों पर आपत्ति शुल्क को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एसएससी से मांगा जवाब

कोलकाता // कलकत्ता हाई कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग से पिछले वर्ष आयोजित भर्ती परीक्षा में कथित रूप से गलत प्रश्नों पर आपत्ति दर्ज कराने के एवज में अभ्यर्थियों से वसूली गई राशि का विवरण हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आयोग ने गलत प्रश्नों पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए प्रति प्रश्न 100 रुपये शुल्क लिया। अदालत ने आयोग से स्पष्ट करने को कहा कि जिन प्रश्नों को अभ्यर्थियों ने चिन्हित किया, क्या वे वास्तव में त्रुटिपूर्ण पाए गए थे और इस मद में कुल कितनी राशि वसूली गई।

अदालत ने यह भी जानना चाहा कि आयोग के नियमों और प्रक्रिया के अनुसार, जिन मामलों में प्रश्न बाद में गलत पाए गए, क्या उन अभ्यर्थियों को कोई धनवापसी की गई और यदि हां, तो कितनी राशि लौटाई गई। साथ ही न्यायालय ने कुल कितने प्रश्न अंततः त्रुटिपूर्ण पाए गए और परीक्षा संबंधी त्रुटियों को लेकर आयोग को कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं, इसका भी ब्योरा मांगा।

वैधानिक प्रावधान नहीं है, तो किस अधिकार के तहत अभ्यर्थियों से यह राशि ली गई

न्यायालय ने आयोग को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें सुनवाई के दौरान उठाए गए सभी बिंदुओं का जवाब देना होगा। सुनवाई के दौरान अदालत ने आपत्ति शुल्क वसूलने के कानूनी आधार पर भी प्रश्न उठाया। न्यायालय ने टिप्पणी की कि यदि इस तरह का शुल्क लेने का कोई स्पष्ट वैधानिक प्रावधान नहीं है, तो आयोग को यह बताना होगा कि किस अधिकार के तहत अभ्यर्थियों से यह राशि ली गई।

मामला पिछले वर्ष सितंबर में आयोजित दूसरे राज्य स्तरीय चयन परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें लगभग 24 प्रश्नों के गलत होने का आरोप लगाया गया है। इन्हीं आरोपों के आधार पर चंदन धर सहित कुछ अभ्यर्थियों ने याचिका दायर कर प्रश्नों की वैधता और आपत्ति शुल्क को चुनौती दी है।

मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता फिरदौस शमीम ने अदालत में तर्क दिया कि उत्तर पुस्तिका देखने के लिए शुल्क लिया जा सकता है, लेकिन प्रश्नपत्र में त्रुटि के विरुद्ध आपत्ति दर्ज कराने के लिए शुल्क लेने का कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह का शुल्क अभ्यर्थियों के निष्पक्ष मूल्यांकन के अधिकार को सीमित करता है।अदालत ने आयोग को निर्देश दिया कि वह हलफनामे के माध्यम से आपत्ति शुल्क वसूलने के कानूनी और प्रक्रियात्मक आधार को स्पष्ट करे। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

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