देवघर // उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा की अध्यक्षता में जिला समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक समाहरणालय सभागार में आयोजित की गई। बैठक में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) एवं महिला पर्यवेक्षिकाएं उपस्थित थे।
बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन, बच्चों के पोषण, आधार नामांकन एवं विभिन्न योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।इसके अलावा बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त द्वारा निर्देश दिया गया कि सेविका एवं सहायिका के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र भरा जाए, ताकि आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन में कोई परेशानी न हो। साथ ही सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि प्रतिदिन पूर्वाह्न 09:00 बजे तक अपने-अपने पोषक क्षेत्र अंतर्गत संचालित एवं बंद आंगनबाड़ी केंद्रों की प्रतिवेदन उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे।
प्रत्येक महिला पर्यवेक्षिका को प्रतिदिन कम से कम पांच आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करेंगे
आगे उप विकास आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जो आंगनबाड़ी केंद्र लगातार बंद पाए जाएंगे, वहां की सेविका एवं सहायिका के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रत्येक महिला पर्यवेक्षिका को प्रतिदिन कम से कम पांच आंगनबाड़ी केंद्रों का भ्रमण कर निरीक्षण प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। बैठक में पोषण ट्रैकर पर नियमित रूप से डाटा अपडेट करने का निर्देश दिया गया। इसके अतिरिक्त सभी सीडीपीओ को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि कोई भी आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर भवन में संचालित न हो, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
विशेष कैंप आयोजित कर बच्चों का आधार कार्ड बनवाने का आदेश दिया गया
इसके अलावा उप विकास आयुक्त द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के लोकेशन मैपिंग कार्य को शीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। साथ ही जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (यूआईडी) को आवश्यकतानुसार विशेष कैंप आयोजित कर आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चों का आधार कार्ड बनवाने का निर्देश दिया गया। बैठक के दौरान कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें तत्काल एमटीसी सेंटर में भर्ती कराने का निर्देश सभी महिला पर्यवेक्षिकाओं को दिया गया, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार लाया जा सके।
अंत में उप विकास आयुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन एवं बच्चों से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए तथा नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
