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झारखंड सरकार विधि‍-व्यवस्था संभालने में असफल : डॉ. नीरा यादव -

झारखंड सरकार विधि‍-व्यवस्था संभालने में असफल : डॉ. नीरा यादव

रांची // झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधायक नीरा यादव ने राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान राज्य सरकार को भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था की स्थिति, जंगली हाथियों के उत्पात और विकास योजनाओं में कथित अनियमितताओं जैसे कई मुद्दों को उठाते हुए सरकार को घेरा।

नीरा यादव ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को पूरी तरह विफल बताते हुए कहा कि अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने रांची के कचहरी चौक पर एक किन्नर को सरेआम कुचलने के प्रयास की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटना राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विधि-व्यवस्था बनाए रखने में असफल रही है।

भाजपा विधायक ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले 100 दिनों की रोजगार गारंटी थी, जिसे बढ़ाकर 125 दिन किया गया है और मजदूरी भुगतान 15 दिनों के भीतर करने का प्रावधान जोड़ा गया है। उन्होंने योजनाओं के नाम को लेकर हो रहे विवाद पर तंज कसते हुए कहा कि अनावश्यक राजनीतिक विवाद खड़ा किया जा रहा है।

जंगल और पहाड़ों के लगातार नुकसान के कारण हाथियों का उत्पात बढ़ा

इस टिप्पणी पर सत्तापक्ष के विधायकों, जिनमें मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और कांग्रेस विधायक अनुप सिंह शामिल थे, ने आपत्ति जताई, जिससे सदन में हल्की नोकझोंक हुई। विधायक नीरा यादव ने राज्य में जंगली हाथियों के बढ़ते उत्पात पर चिंता जताते हुए कहा कि जंगल और पहाड़ों के लगातार नुकसान के कारण हाथियों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हुआ है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए सभी राजनीतिक दलों से मिलकर काम करने की आवश्यकता बताई । इस पर राज्य के वन मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने जवाब देते हुए कहा कि यह समस्या पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों का परिणाम है। हालांकि, नीरा यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि जंगल संरक्षण के लिए सभी सरकारों को संयुक्त रूप से प्रयास करना चाहिए।

विधायक ने डोमचांच नगर निकाय चुनाव, नाली निर्माण, बिजली-पानी और स्ट्रीट लाइट से जुड़े कथित घोटालों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने इन मामलों में उच्च स्तरीय जांच की मांग की और कहा कि विकास योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिला, जिससे सदन का माहौल गरमाया रहा।

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