
रांची // दुमका के पूर्व उत्पाद अधीक्षक से बदला लेने के लिए उनके पुत्र को अगवा कर हत्या करने के दोषी जनक प्रसाद को सिविल कोर्ट के अपर न्याययुक्त अरविंद कुमार की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।साथ ही उसपर 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने बीते दिन जनक प्रसाद को दोषी ठहराया था।दरअसल यह मामला वर्ष 2014 का है। अभियुक्त ने बदला लेने के लिए दुमका जिला के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक अखौरी धनंजय कुमार सिन्हा के बेटे गौतम अखौरी का अपहरण किया था। बाद में गाैतम का शव नेतरहाट से बरामद किया गया था।
अधिवक्ता के अनुसार वर्ष 2010-11 जनक प्रसाद ने सहयोगी के साथ मिलकर लोहरदगा में दो लाइसेंसी शराब दुकान खोला था। इसमें उसे करीब 25 लाख का नुकसान हुआ था। अभियुक्त ने इसकी जानकारी उत्पाद आयुक्त को देकर ज्यादा आमदनी वाला जगह पर लाइसेंसी शराब दुकान दिलाने का आग्रह किया था। इस पर अखौरी ने कोई मदद नहीं की, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई थी।इस बर्बादी का कारण वह अखौरी धनंजय कुमार सिन्हा को मानता था। उसी दिन से उसने अखौरी को बर्बाद करने की ठान ली थी। उसने वर्ष 2012 में अपनी पत्नी काजेवर बेचकर रातु रोड स्थित गैलेक्सिया मॉल में एक दुकान खोला और अखौरी के एकलौते बेटे गौतम अखौरी से संपर्क बनाया। केक, आइसक्रीम, पेस्टी खिलाकर उसका भरोसा जीता और गौतम को नेतरहाट घुमाने के लिए तैयार किया। उस समय गौतम के परिजन दुमका में थे।
अभियुक्त ने उसका फायदा उठाते हुए गौतम को 4 मई 2014 को बस से नेतरहाट ले गया जहां योजना के तहत कोल्ड्रिंक में नींद की गोली मिलाकर पिला दिया। नींद में सोने के बाद गमछा से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी और साक्ष्य छुपाने की मंशा से शव को भारी भरकम पत्थर से कुचल दिया था।
