नई दिल्ली // उच्चतम न्यायालय पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई को तैयार हो गया है। आज याचिकाकर्ताओं के वकील मेनका गुरुस्वामी ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मेंशन करते हुए याचिका पर सुनवाई की मांग की, जिसके बाद कोर्ट ने 10 मार्च को सुनवाई करने का आदेश दिया।
मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि अपील स्वीकार्य है।
याचिका में कहा गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान याचिकाकर्ताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया। याचिकाकर्ताओं के नाम पहले के वोटर लिस्ट में नाम थे। इन्होंने पहले मतदान किया था लेकिन उनके दस्तावेज स्वीकार नहीं किए गए। तब कोर्ट ने कहा कि मौजूदा हालात में वे न्यायिक अधिकारियों के फैसलों पर अपील नहीं कर सकती। तब मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि अपील स्वीकार्य है।
झारखंड और ओडिशा से भी न्यायिक अधिकारियों की तैनाती करें।
उच्चतम न्यायालय ने 24 फरवरी को पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के एसआईआर में दावे और आपत्तियों का निपटारा करने के लिए राज्य के बाहर के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती करने की अनुमति दी थी। उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस से कहा था कि वे इस काम में तीन साल के अनुभव वाले एडिशनल सिविल जजों के अलावा झारखंड और ओडिशा से भी न्यायिक अधिकारियों की तैनाती करें।
न्यायिक अधिकारियों की तैनाती पर आया खर्च निर्वाचन आयोग वहन करेगा।
दरअसल, कलकत्ता उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस ने उच्चतम न्यायालय से कहा था कि राज्य में ‘तार्किक विसंगति’ के 50 हजार से ज्यादा मामले हैं जिनका निपटारा करने के लिए न्यायिक अधिकारियों की कमी पड़ जाएगी। उच्च न्यायालय की ओर से कहा गया था कि इस काम के लिए करीब 250 न्यायिक अधिकारियों को 80 दिनों तक तैनात करना पड़ेगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि पश्चिम बंगाल से बाहर के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती पर आया खर्च निर्वाचन आयोग वहन करेगा। निर्वाचन आयोग राज्य के बाहर के न्यायिक अधिकारियों के यात्रा, ठहरने और मानदेय का खर्च वहन करेगा।
