
जमशेदपुर // के करनडीह जाहेरथान परिसर में सोमवार को राष्ट्रपति ने संताली राइटर्स के योगदान पर कहा कि आदिवासियों के स्वाभिमान और अस्तित्व की रक्षा के लिए इनका योगदान अभूतपूर्व है। कहा कि हर साल यह संगठन ओलचिकी उत्थान को काम करती है। अपने दैनिक जीवन से समय निकाल कर ये भाई बहन ओलचिकी के लिए काम कर रहे हैं और पंडित रघुनाथ मुर्मू के काम को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने संविधान के संताली अनुवाद पर कहा कि अटल बिहारी बाजपेयी के 100 साल पर ओलचिकी में संविधान का प्रकाशन किया गया। यह कार्य भी संताली समाज को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राष्ट्रपति ने कहा कि संताली आठवीं अनुसूची में शामिल हुआ है, इसलिए इसमें भी देश चलाने वाले रूल रेगुलेशन की जानकारी हमारे लोगों को होनी चाहिए। नियम कानून नहीं जानने के कारण कई बेगुनाह लोग जेल में थे। हमारे लोग अब भी जितने शिक्षित होना चाहिए इतने नहीं हुए हैं, इसलिए हमारे लोगों को अपनी भाषा में यह सारी जानकारी होनी चाहिए। आज मैं जिस जगह पहुंची हूं, इसमें अपने लोगों का प्रेम और इष्टदेवों का आशीष है। इसलिए मेरा कर्तव्य है कि अपने समाज और लिपि के लिए काम करूं। हम सब जानते हैं कि भारत और विश्व में कई जगह संताल निवास करते हैं। बड़े महानगरों से लेकर अलग- अलग शहरों में हमारे लोग रह रहे हैं। आदिवासियों में स्नातकों की सबसे अधिक आबादी है इसलिए इसका अपना अधिकार सुनिश्चित है। ओलचिकी संतालों की मजबूत पहचान है। इसी से समाज के लोगों में एकता आ रही है। यह आयोजन भी उसी में से एक है।