
जमीन, जंगल और संसाधन आदिवासियों के हैं, तो खनन और शराब जैसे मुद्दों पर नियंत्रण का अधिकार ग्राम सभा को क्यों नहीं दिया गया
पेसा कानून के नाम पर ग्राम सभा की शक्तियों को सीमित कर दिया गया
जमशेदपुर // में झारखंड के वरिष्ठ नेता चंपाई सोरेन ने जमशेदपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पेसा कानून (पंचायतों का विस्तार अनुसूचित क्षेत्रों तक) को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पेसा कानून आदिवासी स्वशासन, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और ग्राम सभा को सर्वोच्च अधिकार देने वाला संवैधानिक कानून है, लेकिन आज यह आदिवासियों के लिए एक बड़ा धोखा बन चुका है।
चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि पेसा कानून के नाम पर ग्राम सभा की शक्तियों को सीमित कर दिया गया है और इसके मूल उद्देश्य को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा आज केवल एक औपचारिक संस्था बनकर रह गई है, जबकि वास्तविक निर्णय प्रशासन और बाहरी ताकतों द्वारा लिए जा रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुसूचित (शेड्यूल) क्षेत्रों में ग्राम सभा सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है। भूमि अधिग्रहण, खनन, विस्थापन, पुनर्वास, लघु खनिज, जंगल और जल स्रोतों से जुड़े हर निर्णय में ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य है, लेकिन सरकार द्वारा इन प्रावधानों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के मुख्य सवाल
चंपाई सोरेन ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब जमीन, जंगल और संसाधन आदिवासियों के हैं, तो खनन और शराब जैसे मुद्दों पर नियंत्रण का अधिकार ग्राम सभा को क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा,
“जब आदिवासियों से उनके अधिकार छीने जाएंगे, तो वे केवल हवा खाकर कैसे जीवित रहेंगे?”
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि पेसा कानून को उसके मूल संवैधानिक स्वरूप में लागू किया जाए और ग्राम सभा को वास्तविक अधिकार दिए जाएं, ताकि आदिवासियों के हक, सम्मान और आजीविका की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
