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हजारीबाग में सक्रिय यूट्यूबर वसूली गैंग जनता का कर रहे आर्थिक दोहन, FIR दर्ज -

हजारीबाग में सक्रिय यूट्यूबर वसूली गैंग जनता का कर रहे आर्थिक दोहन, FIR दर्ज

हजारीबाग// जिले में इन दिनों सोशल मीडिया के नाम पर चल रही फर्जी पत्रकारिता ने नया रूप ले लिया है। जिले में कुछ कथित यूट्यूबरों का एक गिरोह सक्रिय है जो खुद को पत्रकार बताकर लोगों से जबरन वसूली कर रहा है। यह गैंग आम नागरिकों, दुकानदारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों से “समाचार दिखाने” या “वायरल वीडियो बनाने” के नाम पर पैसों की मांग करता है। पैसे नहीं देने पर वे सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी देते हैं।इस वसूली गैंग की हरकतों से परेशान एक भुक्तभोगी ने आखिरकार कटकमदाग थाना में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता ने अपनी लिखित प्राथमिकी में कहा है कि कुछ यूट्यूबर अपने चैनलों पर किसी भी व्यक्ति या संस्था का नाम लेकर बिना पुष्टि के वीडियो बनाते हैं और फिर उसे हटाने या “सकारात्मक रिपोर्टिंग” के नाम पर पैसे की मांग करते हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग ….

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अमीत आनंद ने बताया कि शिकायत प्राप्त होने के बाद पुलिस अनुसंधान में जुट गई है। दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित ने इस प्रकरण की सूचना प्रार्थना पत्र के माध्म से हजारीबाग प्रेस क्लब को भी दी है।

प्रेस क्लब ने आवेदन प्राप्त कर घटना को गंभीरता से लिया है। प्रेस क्लब के सचिव विस्मय अलंकार ने कहा है कि ऐसे लोगों की वजह से असली पत्रकारिता की छवि धूमिल हो रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर कुछ लोग जनता से अवैध रूप से वसूली कर रहे हैं, जो निंदनीय है।स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि पत्रकारिता के नाम पर हो रही इस अवैध कमाई पर रोक लगाना बेहद जरूरी है। इससे न केवल आम नागरिकों की छवि प्रभावित हो रही है, बल्कि पत्रकारिता के प्रति जनता का भरोसा भी कम हो रहा है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुछ यूट्यूबरों की पहचान की जा चुकी है और जल्द ही उनसे पूछताछ की जाएगी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस नेटवर्क के पीछे कोई संगठित गिरोह कार्यरत है जो अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय है।हजारीबाग जिले में इस तरह की घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल मीडिया के नाम पर चल रही फर्जी पत्रकारिता पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन कब ठोस कदम उठाएगा।

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