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नाबालिक के साथ यौन उत्पीड़न मामले में 10 साल की कठोर कारावास और जुर्माना -

नाबालिक के साथ यौन उत्पीड़न मामले में 10 साल की कठोर कारावास और जुर्माना

देवघर // एडीजे तृतीय सह पाॅक्सो एक्ट स्पेशल जज राजेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत ने मार्गोमुंडा थाना कांड संख्या 8/2025 । पॉक्सो केस संख्या 14/2025 की सुनवाई पूरी करने के बाद नामजद आरोपी पवन रमानी को 8 अप्रैल को दोषी करार दिया गया । वही आज (13 अप्रैल 2026 ) को दोषी पाए गए अभियुक्त को सजा सुनाई गई।

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दोषी अभियुक्त मार्गोमुंडा थाना क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला है । नाबालिक लड़की के साथ दुष्कर्म किए जाने की शिकायत पीड़िता की मां ने मारगोमुंडा थाना में 29 जनवरी 2025 को शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद 30 जनवरी को मार्गोमुंडा थाना में 65 (1) बीएनएस 4, 6 पोक्सो एक्ट के तहत एफआइआर दर्ज किया गया था।

पीड़िता की मां ने दर्ज कराई थी शिकायत

पीड़िता की मां ने शिकायत देते हुए आवेदन में उल्लेख किया था कि उसकी नाबालिग पुत्री घर में अकेली थी आरोपी जबरन घर में घुस गया व चाकू का भय दिखाकर दुष्कर्म किया। जिसके बाद हमलोग घर आए तो नाबालिक बेटी ने घटना की जानकारी हमलोगों को दी । जिसके बाद थाना जाकर इसकी शिकायत किया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से विशेष लोक अभियोजक सुनील कुमार सिंह ने घटना के समर्थन में नौ लोगों की गवाही दिलाई और दोष सिद्ध कराने में सफल रहा। बचाव पक्ष से अधिवक्ता प्रशांत कुमार राय ने अपना पक्ष रखा।

15 साल की कठोर कारावास 10 हजार का जुर्माना

सजा जज साहब ने लिखा कि पोक्सो के सेक्शन 4(1) की सज़ा BNS के सेक्शन 64(1) जैसी ही होगी, इसलिए POCSO एक्ट 2012 के सेक्शन 42 के प्रोविज़न के अनुसार, ऊपर बताए गए दोषी पवन रवानी को POCSO एक्ट के सेक्शन 4(1) के तहत सज़ा दी जाएगी क्योंकि यह एक स्पेशल एक्ट है और इसलिए ऊपर बताए गए दोषी को बच्चों के यौन अपराधों से सुरक्षा एक्ट 2012 (संशोधित 2019) की धारा 4(1) के तहत अपराध करने के लिए 15 साल (पंद्रह साल) की कठोर कैद और 10,000/- रुपये (दस हजार रुपये) का जुर्माना भरने की सज़ा सुनाई जाती है।

जुर्माना की राशि नहीं देने पर काटनी होगी सजा

जुर्माने का भुगतान न करने पर, दोषी को अलग से दो साल की कठोर कैद की सज़ा दी जाती है और इस मामले की जांच और ट्रायल के दौरान दोषी द्वारा बिताई गई हिरासत की अवधि को सेट ऑफ कर दिया जाएगा।

दोषी से जुर्माना वसूल होने पर, पीड़ित लड़की को मुआवजे के तौर पर दिया जाएगा। पीड़ित के आगे के मुआवजे और पुनर्वास का मामला डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ को भेजा जाता है।

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