देवघर अदालत का फैसला: 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया, सास-ससुर साक्ष्य के अभाव में बरी
देवघर // देवघर की एडीजे-9 मुकुलेश चंद्र नारायण की अदालत ने पत्नी को आत्महत्या के लिए विवश करने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी पति सुनील यादव को दोषी करार दिया है। अदालत ने उसे 7 वर्ष की सश्रम कैद तथा 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने पर आरोपी को 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने जुर्माने की राशि मृतका के परिजनों को देने का निर्देश दिया है।
सास-ससुर को संदेह का लाभ
इस मामले में नामजद अन्य दो आरोपी प्यारी यादव (ससुर) और बॉबी देवी (सास) को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
दहेज प्रताड़ना का लगाया गया था आरोप
अभियोजन के अनुसार, मोहनपुर थाना क्षेत्र के डुमरिया गांव निवासी गोविंद यादव ने अपनी पुत्री लीलावती देवी की शादी वर्ष 2020 में गौरे गांव निवासी सुनील यादव से की थी। विवाह में सामर्थ्य के अनुसार उपहार दिए गए थे, लेकिन ससुराल पक्ष दहेज से संतुष्ट नहीं था और अतिरिक्त रुपये व सामान की मांग को लेकर मृतका को प्रताड़ित करता था।
2021 में दर्ज हुआ था मामला
2 मई 2021 को मृतका के परिजनों को सूचना मिली कि लीलावती देवी की तबीयत गंभीर है। जब पिता गोविंद यादव ससुराल पहुंचे तो उन्होंने अपनी पुत्री को मृत पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पति, सास और ससुर ने मिलकर उसकी हत्या कर दी। इसके आधार पर मोहनपुर थाना कांड संख्या 65/2021 दर्ज किया गया और मामले की सुनवाई शुरू हुई।
सात गवाहों की गवाही बनी अहम
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सात गवाहों के बयान प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर अदालत ने पति को पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी माना। हालांकि, सास और ससुर के खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं होने पर उन्हें बरी कर दिया गया।
दोनों पक्षों ने रखा अपना पक्ष
मामले में अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक विजय कुमार साह ने पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता फणीभूषण पांडेय ने बहस की।
