साहिबगंज। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार, 9 अगस्त 2026 को साहिबगंज कॉलेज में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने की, जबकि एसडीएम अमर जॉन ऐंद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस वर्ष कार्यक्रम का प्रमुख विषय “आदिवासी दाइयों का सम्मान – जीवन और कल्याण की रक्षा” रहा।
कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान, प्रकृति संरक्षण और सामाजिक विकास में समुदाय की भूमिका पर चर्चा की गई। विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की देखभाल में पारंपरिक रूप से योगदान देने वाली आदिवासी दाइयों की भूमिका को सम्मानपूर्वक याद किया गया।
आदिवासी संस्कृति और प्रकृति संरक्षण पर जोर
प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों, सम्मान, संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय का जल, जंगल और जमीन के साथ सदियों पुराना संतुलित संबंध रहा है। प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से जुड़ी उनकी परंपराएं आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति को केवल लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक रीति-रिवाजों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व, सामुदायिक सहयोग, सामाजिक समानता और जीवन के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण जैसे महत्वपूर्ण मूल्य शामिल हैं।
आदिवासी दाइयों के पारंपरिक ज्ञान को सम्मान देने की जरूरत
डॉ. सिंह ने कहा कि सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं वाले ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आदिवासी दाइयों ने पीढ़ियों से प्राप्त पारंपरिक ज्ञान के माध्यम से माताओं और नवजात शिशुओं की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि इन महिलाओं के अनुभव और पारंपरिक ज्ञान को सम्मान मिलना चाहिए। साथ ही, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ आवश्यक समन्वय स्थापित कर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है।
प्राचार्य ने शिक्षा और स्वास्थ्य को आदिवासी समाज के सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने आदिवासी विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ आदिवासी भाषाओं और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण पर भी जोर दिया।
विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण का आह्वान
डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने विद्यार्थियों से आदिवासी समाज की परंपराओं से सीख लेने और पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति का सम्मान देश की विविधता और साझा सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है।
मुख्य अतिथि एसडीएम अमर जॉन ऐंद ने भी आदिवासी समाज के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय की विशिष्ट पहचान और परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए उन्हें विकास के समान अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।
शिक्षक, विद्यार्थी और गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में डॉ. धुर्व ज्योति सिंह, प्रो. प्रिया सिंह, प्रो. अनु सुमन बड़ा, सोनू फ्रांसिस मुर्मू, अक्षय कुमार, सुभाष हांसदा, प्रीफेक्ट अमित हांसदा, नायक बाबू धन सोरेन सीनियर, मनोहर टुडू, विनोद टुडू, मोहन हेम्ब्रम, प्रेम चंद्र मोहाली, अनूप टुडू, प्रीफेक्ट सोनी मुर्मू, सचिव बाली बेटी सोरेन, सोना बेसरा और दीपिका हांसदा सहित महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में आदिवासी संस्कृति, परंपरागत ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया गया। उपस्थित लोगों ने आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने और जल, जंगल एवं जमीन के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
