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देवघर में जमीन की कथित फर्जी बिक्री और रजिस्ट्री का मामला, पांच लोगों के खिलाफ परिवाद -

देवघर में जमीन की कथित फर्जी बिक्री और रजिस्ट्री का मामला, पांच लोगों के खिलाफ परिवाद

देवघर// देवघर में पैतृक एवं खतियानी जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेचने और उसकी रजिस्ट्री कराने का मामला सामने आया है। मामले में प्रताप दास ने अपने अधिवक्ता पप्पु कुमार यादव के माध्यम से देवघर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत में परिवाद दायर किया है। परिवाद दिनांक 10 अगस्त 2026 को दाखिल किया गया, जिसका परिवाद वाद संख्या 1014/2026 बताया गया है।

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परिवाद में सुधीर कुमार घोष, वीणा कुमारी, अंचल अधिकारी देवघर अनिल कुमार, जिला अवर निबंधक देवघर हीरा कुमार और समीर कुमार को आरोपी बनाया गया है।

11.57 डिसमिल जमीन को फर्जी कागजात के आधार पर बेचने का आरोप

परिवादी प्रताप दास का आरोप है कि उनकी मौजा खोरादह स्थित जमाबंदी संख्या-04, प्लॉट संख्या-275 की पैतृक खतियानी जमीन से संबंधित कथित फर्जी कागजात तैयार कर सुधीर कुमार घोष ने वीणा कुमारी के पक्ष में जमीन का बिक्री पत्र तैयार कराया।

परिवाद के अनुसार, 28 जुलाई 2026 के बिक्री पत्र संख्या-458 के माध्यम से करीब 11.57 डिसमिल जमीन की बिक्री किए जाने का आरोप लगाया गया है।

फर्जी रजिस्टर-II तैयार करने का भी आरोप

परिवादी ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2025-26 में उक्त जमीन से संबंधित रजिस्टर-II की ऑफलाइन और ऑनलाइन प्रविष्टि कथित तौर पर फर्जी तरीके से तैयार की गई। आरोप के मुताबिक इसमें हेमचंद्र घोष का नाम दर्ज किया गया, जबकि परिवादी पक्ष का कहना है कि उक्त व्यक्ति को उनके परिवार ने कभी देखा या उसके बारे में सुना तक नहीं।

परिवाद में यह भी आरोप लगाया गया है कि सुधीर कुमार घोष ने खुद को हेमचंद्र घोष का इकलौता पुत्र बताते हुए जमीन के बिक्री पत्र का निष्पादन किया, जबकि परिवादी के अनुसार यह दावा गलत है।

अवर निबंधक पर भी लगाए गंभीर आरोप

परिवाद में देवघर के जिला अवर निबंधक हीरा कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन की वास्तविक प्रकृति और उससे जुड़े दस्तावेजों की जानकारी होने के बावजूद बिक्री पत्र का निबंधन कर दिया गया।

परिवाद के मुताबिक, विक्रेता और क्रेता की ओर से आवश्यक दस्तावेज एवं अनुमति के संबंध में भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बिना आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए तथा कथित फर्जी एवं असत्यापित दस्तावेजों के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई।

हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप

परिवाद में झारखंड हाईकोर्ट के WP(C) No. 75/2025 में 3 नवंबर 2025 को पारित आदेश का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश और उससे संबंधित सरकारी निर्देशों के बावजूद जमीन की रजिस्ट्री की गई।

परिवाद में देवघर के अवर निबंधक पर अपने ही राज्य सरकार के आदेश की कथित अवहेलना करते हुए प्रताप दास की जमीन का बिक्री पत्र गैरकानूनी तरीके से निबंधित करने का आरोप लगाया गया है।

BNS की विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की मांग

परिवादी ने आरोप लगाया है कि पूरे मामले में आरोपियों द्वारा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 336(3), 337, 339, 340, 198, 199, 201, 61(2), 318(2) और 3(5) के तहत अपराध किया गया है।

इन आरोपों को लेकर प्रताप दास ने अधिवक्ता पप्पु कुमार यादव के माध्यम से मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, देवघर की अदालत में परिवाद दाखिल कर मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, परिवाद में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में आरोपित पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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