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दो दिन पहले दो अभियुक्त को कोर्ट ने सुनाई 25 साल की सजा उसी मामले में तीसरे दिन मिला बेल -

दो दिन पहले दो अभियुक्त को कोर्ट ने सुनाई 25 साल की सजा उसी मामले में तीसरे दिन मिला बेल

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देवघर// एडीजे 3 सह विशेष न्यायाधीश पॉक्सो राजेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत ने देवघर जिला के करों थाना कांड संख्या 11/2023 आईपीसी की धारा 376 (D)(A), 506 और Pocso Act की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले में कुल 4 व्यक्ति को आरोपी बनाया गया था । जिसमें से दो आरोपी ने सरेंडर किया वही एक को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था । साथ ही 80 वर्ष के एक बुजुर्ग जो इस मामले में आरोपी है वो अभी भी फरार है। इस मामले में बजरंगी दास और श्यामसुंदर दास के खिलाफ पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया वही इसी बीच तीसरे आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। दो आरोपी के खिलाफ सुनवाई शुरू हुई और 14 अक्टूबर को कोर्ट ने दोषी पाया और बजरंगी दास जो बेल पर बाहर था उसे उसी दिन न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। और 16 अक्टूबर को कोर्ट ने बजरंगी दास और श्यामसुंदर दास को 25 साल की सजा सुनाई। वही छोटू दास उर्फ जितेंद्र दास जिसे पुलिस ने बाद में गिरफ्तार कर जेल भेजा था उसके खिलाफ कोई चार्जशीट दाखिल नहीं किया गया है।

पुलिस की गलती आरोपी को मिला लाभ

छोटू दास उर्फ जितेंद्र दास की और से अधिवक्ता बी एन चौधरी ने दलील दी कि याचिकाकर्ता निर्दोष है और उसने कोई अपराध नहीं किया है। इससे पहले याचिकाकर्ता ने इस अदालत में ए.बी.पी. दायर की थी जिसे 22.08.2024 को खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने माननीय उच्च न्यायालय, झारखंड के समक्ष डब्ल्यू.पी. (सीआरपीसी) भी दायर की थी। याचिकाकर्ता द्वारा इस अदालत सहित किसी भी अदालत द्वारा पहले कोई नियमित जमानत याचिका दायर या खारिज नहीं की गई थी। याचिकाकर्ता अपने खिलाफ एफआईआर में लगाए गए सभी आरोपों से इनकार करता है।याचिकाकर्ता को पुलिस ने गिरफ्तार किया था और उसे 25.06.2025 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था और तब से याचिकाकर्ता न्यायिक हिरासत में है और समय-समय पर जेल हिरासत में भेजा जा रहा है। जांच जारी है और पुलिस द्वारा अब तक इस याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई आरोप पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए याचिकाकर्ता सीआरपीसी की धारा 167(2) के तहत अनिवार्य डिफ़ॉल्ट जमानत का हकदार है। धारा 187 बी.एन.एस.एस. के अनुसार, क्योंकि 90 दिनों से अधिक का समय पहले ही समाप्त हो चुका है, इसलिए यहयाचिकाकर्ता जमानत का हकदार है। आरोपी याचिकाकर्ता स्थानीय जमानतदार प्रस्तुत करने के लिए तैयार है। इसलिए याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा किया जा सकता है। एल.डी. विशेष पी.पी. ने जमानत की प्रार्थना का विरोध किया और कहा कि इस मामले के जांच कार्यालय ने आज तक इस आरोपी याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत नहीं किया है।दोनों पक्षों को सुनने के बाद, मामले के रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर, ऐसा प्रतीत होता है कि यह मामला आईपीसी की धारा 376(डी) (ए)/506 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दर्ज किया गया है। धारा 376(डी)(ए) के तहत अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम सजा शेष जीवन है और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत निर्धारित अधिकतम सजा शेष जीवन या मृत्यु है, जो सीआरपीसी की धारा 167 (2)(ए)(आई) के तहत आती है, जिसमें जांच पूरी करने के लिए नब्बे (90) दिनों की अवधि निर्धारित की गई है।

90 दिन के अंदर नहीं दाखिल किया आरोप पत्र

आरोपी याचिकाकर्ता को रिमांड पर लिया गया है। शेष जीवन या मृत्यु जो Cr.P.C. की धारा 167 (2)(a)(i) के अंतर्गत आती है, जिसमें जाँच पूरी करने के लिए नब्बे (90) दिनों की अवधि निर्धारित की गई है। इस मामले में आरोपी याचिकाकर्ता को 25.06.2025 को रिमांड पर लिया गया है। इस न्यायालय के कार्यालय ने प्रतिवेदन दिया है कि इस मामले के जाँच अधिकारी ने आज तक आरोप पत्र प्रस्तुत नहीं किया है। आज 114वाँ दिन है, इसलिए आरोपी याचिकाकर्ता ने अपना अप्रतिदेय अधिकार प्राप्त कर लिया है। तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर कोर्ट ने कहा कि मैं आरोपी याचिकाकर्ता को Cr.P.C. की धारा 167(2)(a)(i) के अंतर्गत जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया जाता है साथ ही इस आदेश की एक प्रति पुलिस अधीक्षक, देवघर को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी जाए।

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