देवघर // प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कौशल किशोर झा ने अपने सभागार में आने वाले राष्ट्रीय लोक अदालत 09-05-2026 के उपलक्ष्य पर एक बैठक रखा गया जिसमें इस सभा का मुख्य उद्देश्य था कि नेशनल लोक अदालत में बैंक ग्राहकों को विभिन्न लाभ मिल सकते हैं, जैसे कि ब्याज और जुर्माने में छूट प्राप्त करना, परस्पर बातचीत से समझौते के माध्यम से विवादों का समाधान करना और कम खर्च और समय में मामले को निपटाना। इसके अतिरिक्त, अदालती शुल्क नहीं लगना और लोक अदालत द्वारा दिए गए निर्णय को कानूनी दर्जा प्राप्त होना है।
राष्ट्रीय लोक अदालत की मुख्य विशेषताएँ
राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat) भारत की न्याय व्यवस्था में एक वैकल्पिक विवाद निपटान (ADR) प्रणाली है, जिसका उद्देश्य मामलों को जल्दी, सस्ता और आपसी सहमति से निपटाना है। इसे National Legal Services Authority (NALSA) आयोजित करती है।
मुख्य विशेषताएँ:
- त्वरित न्याय (Speedy Justice) : मामलों का निपटारा एक ही दिन में या बहुत कम समय में हो जाता है।
- कोई कोर्ट फीस नहीं (No Court Fee) लोक अदालत में कोई फीस नहीं लगती, और अगर पहले फीस जमा की गई है तो वह वापस मिल जाती है।
- आपसी सहमति से समाधान (Mutual Settlement) फैसला दोनों पक्षों की सहमति से होता है, इसलिए विवाद खत्म होने के बाद भी रिश्ते खराब नहीं होते।
- सरल प्रक्रिया (Simple Procedure) कोर्ट की तरह जटिल प्रक्रिया नहीं होती, नियम लचीले होते हैं।
- अंतिम और बाध्यकारी निर्णय (Final & Binding Award) लोक अदालत का फैसला कोर्ट के डिक्री (decree) जैसा होता है और उस पर अपील नहीं होती।
- लंबित और प्री-लिटिगेशन दोनों केस जो केस कोर्ट में चल रहे हैं (pending cases) और जो अभी कोर्ट में नहीं गए हैं (pre-litigation cases), दोनों का निपटारा हो सकता है।
- कानूनी वैधता लोक अदालत द्वारा पारित आदेशों को कानूनी दर्जा प्राप्त होता है और वे सभी पक्षों पर बाध्यकारी होते हैं, जिन्हें सामान्य अदालतों में अपील नहीं किया जा सकता है। जिससे विवादों का निपटारा स्थायी लोक अदालतों में जा सकती है।
विभिन्न प्रकार के मामलों का निपटारा
- मोटर दुर्घटना क्लेम
- बैंक ऋण विवाद
- पारिवारिक विवाद
- बिजली/पानी बिल आदि (गंभीर आपराधिक मामलों का निपटारा नहीं होता)
ग्राहकों को मिलने वाले मुख्य फायदे पर छूट और राहत ,बैंक लोक अदालत के माध्यम से बकाया राशि पर ब्याज, जुर्माना और अन्य शुल्कों में छूट देना ।
समझौता के आधार पर ग्राहक और बैंक आपसी बातचीत और सौहार्दपूर्ण तरीके से विवादों का समाधान करना, जिससे कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने से राहत दिलाना,
