
साहिबगंज // जिले के प्राइवेट अस्पतालो में मौत का खेल पुराना हैं। जहाँ मरीजो को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के नाम पर केवल धोखा दिया जाता हैं। ताज़ा मामला साहिबगंज के जिरवाबाड़ी थाना क्षेत्र में संचालित रम्मैया सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल का हैं। जहाँ नीतू देवी नाम के एक मरीज का 7 नवंबर 25 को गोल ब्लडर स्टोन का ऑपरेशन डॉ जितेंद्र शर्मा द्वारा किया गया। ऑपरेशन के चार दिन बाद मरीज की हालत बिगड़ गई और 12 नवंबर को मरीज को हायर सेंटर रेफर कर दिया। यहाँ बता दे की मरीज का पति विजय राम एक गरीब इंसान हैं जो ई रिक्शा चला कर अपना घर चलता हैं।
ओपोलो का 11 लाख 40 हजार का बिल बकाया…
मरीज के रेफर के बाद परिजनो ने भागलपुर ले गया। वहां दो डॉक्टर को दिखाया गया। उन दोनों ने भी रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन अपने मरीज को पटना के एनएमसीएच ले गया। लेकिन वहां भी डॉक्टर ने दुबारा ऑपरेशन करने की बात कहा और इसके बाद भी बचने की गारंटी नहीं दिया। इसके परिजन को ओपोलो कोलकाता ले जाने की सलाह दी गई। इस बीच पति अपना घर भी गिरवी रख कर पैसे का जुगाड़ किया और पत्नी को ओपोलो कोलकाता में भर्ती कराया। लेकिन ओपोलो में भी एक सप्ताह से अधिक इलाज चलने के बाद मरीज को नहीं बचाया जा सका और 5 दिसंबर को नीतू देवी की मौत हो गई। इस बीच ओपोलो अस्पताल को 6 – 7 लाख रूपये की बिल जमा किया। इसके बावजूद ओपोलो ने 11 लाख 40 हजार का बिल बकाया बताया। जिस पर ओपोलो अस्पताल ने तीन एडवांस चेक जमा कर बॉन्ड पर परिजन को बॉडी सौंपा।
अस्पताल की जांच कर दोषी के खिलाफ उचित कार्यवाही की मांग की हैं…
इस पूरी घटना का लिखित शिकायत करते हुए मृतक के पति ने रम्मैया हॉस्पिटल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल की जांच करने , मुआवजा दिलाने और दोषी के खिलाफ उचित कार्यवाही की मांग की हैं। इधर अस्पताल प्रबंधन इलाज में लापरवाही और त्रुटि की बात को एक सिरे से इनकार करते हुए गोल ब्लडर ऑपरेशन को सफल बता रहे हैं। मरीज की मौत की वजह दूसरा बता रहा हैं। सबसे बड़ी बात हैं की जिन डॉक्टर जीतेन्द्र शर्मा के द्वारा ऑपरेशन करने की बात कहीं जा रही हैं। उनका अस्पताल के बोर्ड में केवल एम बी बी एस लिखा हैं। इसके बावजूद किस प्रकार डॉक्टर ने गोल ब्लडर का ऑपरेशन किया.। हालांकि फ़ोन पर डॉक्टर से हमारी बात हुई तो उन्होंने एम एस (सर्जन ) की डिग्री होने की बात बताई उन्होंने बताया की 2024 में उन्होंने एम एस की डिग्री हासिल की हैं और ऑपरेशन में सबकुछ ठीक था केवल उनका पानी अधिक आ रहा था इसलिए हायर सेंटर रेफर किया गया। बहरहाल यह पूरा मामला जांच का हैं। पुलिस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जाँच कर रही हैं। वही स्वास्थ्य विभाग को भी अस्पताल का जाँच कर यह देखना चाहिए की सरकार के मानको पर यह अस्पताल कितना सही हैं और डॉक्टर की योग्यता पर जो सवाल उठ रहे हैं उसकी भी जाँच होनी चाहिए।
