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एडीजे 2 की अदालत ने साइबर क्राइम के दो अलग मामले में 3 आरोपी को किया रिहा -

एडीजे 2 की अदालत ने साइबर क्राइम के दो अलग मामले में 3 आरोपी को किया रिहा

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देवघर// के एडीजे 2 की अदालत ने साइबर के दो अलग अलग मामले में सुनवाई करते हुए। 3 साइबर आरोपी को बरी कर दिया। चितरा थाना कांड संख्या 12/2017 में कुल 6 गवाहों का बयान दर्ज किया गया। अभियोजन और बचाव पक्ष की और से बहस हुई। अभियुक्त संजय दास और रंजीत दास दोनों की और से अधिवक्ता प्रमोद कुमार वर्मा और प्रीतम सिंह ने पक्ष रखा और वही और करो थाना कांड संख्या 61/2017 पिंकू मंडल और बी. कुमार मंडल , पिंकू कुमार मंडल की और से अधिवक्ता गोपाल शर्मा ने अपना पक्ष रखा। अभियोजन की और से 5 गवाहों का बयान हुआ। दोनों पक्षों को सुना गया और अभियुक्त को कोर्ट ने बरी कर दिया।

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अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोपों को साबित करने में विफल रहा

गवाह जो था वह छापेमारी दल का सदस्य है। वह ज़ब्ती का गवाह भी है। उसने अपने बयान में बताया कि 15.2.2017 को उन्होंने सोनातर गाँव में छापा मारा और रंजीत दास और संजय दास नामक दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। रंजीत दास के पास से 50,000 रुपये नकद, तीन एटीएम कार्ड, 7-8 पासबुक, तीन मोबाइल फ़ोन, दो आधार कार्ड, एक मोटरसाइकिल आदि बरामद किए गए। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों को सुना गया। केस रिकॉर्ड का अवलोकन किया गया। केस रिकॉर्ड के अवलोकन से पता चलता है कि अभियोजन पक्ष ने इस मामले में छह गवाहों से पूछताछ की है। भारतीय दंड संहिता की धारा 419/34, 420/34, 467/34, 468/34, 471/34 और आयकर अधिनियम की धारा 66बी, 66(सी) के तहत आरोप तय किए गए हैं। अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश करने में विफल रहा है। इसलिए यह सबूतों के अभाव का मामला है और यह कहा जा सकता है कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोपों को साबित करने में बुरी तरह विफल रहा है। साइबर अपराध मामला संख्या 23/2020आरोपी संजय दास को भारतीय दंड संहिता की धारा 419/34, 420/34, 467/34, 468/34, 471/34 और आयकर अधिनियम की धारा 66बी, 66(सी) के तहत आरोप में दोषी नहीं पाया गया। अतः, उन्हें इन आरोपों से बरी किया जाता है। उन्हें और उनके जमानतदारों को उनके संबंधित जमानत बांड की देनदारियों से भी मुक्त किया जाता है।

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