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AIIMS देवघर का MFAT प्रोजेक्ट: गांव-गांव पहुंच रही FNAC जांच, कैंसर और TB की होगी शुरुआती पहचान -

AIIMS देवघर का MFAT प्रोजेक्ट: गांव-गांव पहुंच रही FNAC जांच, कैंसर और TB की होगी शुरुआती पहचान

देवघर // ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से All India Institute of Medical Sciences Deoghar द्वारा संचालित MFAT (Mobile FNAC Awareness and Testing) Project तेजी से लोगों के बीच जागरूकता फैला रहा है। यह परियोजना विशेष रूप से शरीर में होने वाली लिम्फ नोड यानी गांठ की पहचान, जांच और समय पर इलाज सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई है।

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क्या है MFAT Project ?

इस परियोजना के माध्यम से गांवों और दूर-दराज इलाकों में रहने वाले लोगों को यह जानकारी दी जा रही है कि शरीर में लंबे समय तक रहने वाली गांठ कैंसर, टीबी या किसी अन्य गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है। ऐसे मरीजों की जल्द पहचान कर FNAC जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र या AIIMS देवघर रेफर किया जा रहा है।

MFAT Project का पूरा नाम Multi phase FNAC Aided by Telepathology है। यह एक स्वास्थ्य जागरूकता एवं जांच कार्यक्रम है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लिम्फ नोड से संबंधित मरीजों की पहचान करना और उनका FNAC टेस्ट कराना है।

लिम्फ नोड की सूजन क्यों होती है ?

इस परियोजना के तहत स्वास्थ्य कर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और मेडिकल टीम को प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे गांव स्तर पर संदिग्ध मरीजों की पहचान कर सकें। परियोजना का मकसद कैंसर और TB जैसी बीमारियों की शुरुआती अवस्था में जांच कर मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।

मानव शरीर में मौजूद लिम्फ नोड छोटी-छोटी गांठ जैसी संरचनाएं होती हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं। कई बार इन गांठों में सूजन आ जाती है या वे आकार में बढ़ जाती हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें टीबी, संक्रमण, कैंसर या अन्य बीमारियां शामिल हैं।

क्या होता है FNAC टेस्ट?

आमतौर पर यह गांठ गर्दन, बगल या जांघ के आसपास दिखाई देती है। यदि कोई गांठ दो से तीन सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे या लगातार बढ़ती जाए तो तुरंत चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी माना जाता है।

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FNAC यानी Fine Needle Aspiration Cytology एक सरल और सुरक्षित जांच प्रक्रिया है। इसमें पतली सुई की सहायता से गांठ से थोड़ा सा सैंपल लिया जाता है और लैब में उसकी जांच की जाती है।यह जांच बिना ऑपरेशन के की जाती है और कम समय में रिपोर्ट उपलब्ध हो जाती है। FNAC के जरिए कैंसर, टीबी और अन्य रोगों की शुरुआती पहचान आसान हो जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह जांच कम दर्दनाक, सुरक्षित और सस्ती प्रक्रिया मानी जाती है, जिससे गरीब और ग्रामीण मरीजों को भी आसानी से लाभ मिल सकता है।

गांव स्तर पर चल रहा जागरूकता अभियान

MFAT Project के तहत स्वास्थ्य विभाग और AIIMS देवघर की टीम द्वारा गांव स्तर पर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।CHO, ANM, STS, STLS, साहिया और साहिया साथी को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि शरीर में गांठ वाले मरीजों की पहचान कैसे करें और उन्हें कहां रेफर करना है।स्वास्थ्य कर्मियों को यह भी समझाया जा रहा है कि दर्द रहित गांठ, लगातार सूजन, वजन कम होना, बुखार या TB का इतिहास जैसे लक्षण गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं।कैसे किया जाता है मरीजों का चयन?परियोजना के अंतर्गत गांव या अस्पताल में आने वाले मरीजों की स्क्रीनिंग की जाती है। यदि किसी व्यक्ति के शरीर में लंबे समय से गांठ हो या सूजन बनी हुई हो तो उसका नाम और जानकारी दर्ज की जाती है।

निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत FNAC जांच करानी चाहिए

वहीं STS और STLS समन्वय का कार्य कर रहे हैं तथा Pathology Team और Research Scientist जांच और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया संभाल रहे हैं।किन मरीजों को तुरंत जांच की जरूरत?

विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति में निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत FNAC जांच करानी चाहिए—दो से तीन सप्ताह से अधिक समय तक गांठ रहनालगातार गांठ का बढ़नादर्द रहित सूजनअचानक वजन कम होनालगातार बुखार आना

AIIMS देवघर की टीम कर रही फील्ड विजिट

AIIMS देवघर की pathology और research टीम समय-समय पर गांवों, स्कूलों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य संस्थानों में जाकर जागरूकता एवं जांच शिविर आयोजित कर रही है। इन शिविरों में लोगों को लिम्फ नोड की पहचान, कैंसर और TB के लक्षण तथा FNAC जांच के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।

लोगों से जागरूक रहने की अपील

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि यदि शरीर में किसी भी प्रकार की गांठ लंबे समय तक बनी रहे तो उसे नजरअंदाज न करें। समय पर जांच कराने से गंभीर बीमारियों का खतरा कम किया जा सकता है।विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाकर ही कैंसर और TB जैसी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। MFAT Project इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।

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