देवघर // जिला के मोहनपुर प्रखंड क्षेत्र के कटवन पंचायत के सिमराकिता गाँव में गुरुवार देर रात किसी असामाजिक तत्वों के द्वारा बाबा साहब डॉ भीम राव अम्बेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया। बाबा साहब के एक साइड के चश्मे को क्षतिग्रस्त किया गया है। ग्रामीणों ने सुबह प्रतिमा को देखा तो इसकी सूचना पंचायत के मुखिया को दी गई।

साथ ही मोहनपुर थाना को भी इसकी सूचना दी गई। सूचना के बाद मोहनपुर थाना प्रभारी और मुखिया प्रतिनिधि कृष्णा यादव मौके पर पहुंचे। थाना प्रभारी ने लोगों से घटना के संबंध में जानकारी जुटाने का प्रयास किया। वही मुखिया प्रतिनिधि ने इसके स्थायी निदान को लेकर ग्रामीणों से बात किया ।
क्या बारातियों ने प्रतिमा को किया क्षतिग्रस्त ?
गांव में शादी थी और दूसरे जगहों से बाराती आया हुवा था। ऐसे में यह भी कयास लगाया जा रहा है कि कहीं शराब के नशे में शरारती तत्वों द्वारा तो नहीं इस घटना को अंजाम दिया गया इन सभी बिंदुओं पर पुलिस जांच पड़ताल कर रही है।
थाना प्रभारी ने कहा आज ही इसे ठीक किया जाएगा
थाना प्रभारी सालों हेम्ब्रम ने कहा कि आज ही क्षतिग्रस्त प्रतिमा को ठीक करवाने का काम करेंगे वहीं घटना को अंजाम देने वाला का पता लगाने के लिए पुलिस अपने स्तर से पता लगाने का प्रयास करेगी। घटना को अंजाम देने वाले को किसी भी हाल में बक्सा नहीं जाएगा। उस पर कार्रवाही की जाएगी।
ग्रामीणों में आक्रोश कार्यवाही की मांग
मूर्ती क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना को लेकर ग्रामीणों में काफी आक्रोश देखने को मिला ग्रामीणों का कहना है कि आखिर बाबा साहब ने किसका क्या बिगाड़ा है । हमलोग बाबा साहब की पूजा करते हैं तो इससे दूसरों को क्यों दिक्कत हो रहा है। हमलोग चाहते हैं क्षतिग्रस्त प्रतिमा को जल्द ठीक किया जाए और प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने वाला को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए ।
आखिर बाबा साहेब के प्रतिमा को क्यों क्षतिग्रस्त किया जाता है ?
B. R. Ambedkar (बाबा साहेब) की प्रतिमा को नुकसान पहुँचाने की घटनाएँ भारत के कई हिस्सों में समय-समय पर सामने आती रही हैं। यह केवल “शरारत” नहीं होती—अक्सर इसके पीछे गहरे सामाजिक, राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक कारण होते हैं ।
जातीय तनाव और सामाजिक भेदभाव
डॉ. अम्बेडकर दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों के सबसे बड़े प्रतीक हैं। उनकी प्रतिमा को नुकसान पहुँचाना कई बार उन शक्तियों की प्रतिक्रिया होती है जो बराबरी और सामाजिक न्याय के विचार से असहज होती हैं।
प्रतीकात्मक हमला
प्रतिमा सिर्फ मूर्ति नहीं होती, वह एक विचार और आंदोलन का प्रतीक होती है। इसलिए किसी विचारधारा के विरोधी लोग सीधे व्यक्ति पर नहीं, बल्कि उसके प्रतीक (प्रतिमा) पर हमला करते हैं।
स्थानीय विवाद या राजनीति
कई मामलों में यह घटनाएँ स्थानीय स्तर के झगड़ों, जमीन विवाद, या राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से भी जुड़ी होती हैं। छोटी घटनाएँ भी जातीय रंग ले लेती हैं।
उकसाने या माहौल बिगाड़ने की कोशिश
कभी-कभी असामाजिक तत्व जानबूझकर ऐसी हरकत करते हैं ताकि दो समुदायों के बीच तनाव फैले और दंगा या विरोध प्रदर्शन हो। और वह भीड़ में शामिल होकर इस दंगा और विरोध प्रदर्शन का मजा ले ।
कानून का डर कम होना
जहाँ कानून का सख्त पालन नहीं होता, वहाँ ऐसे कृत्य करने वालों को लगता है कि वे बच जाएँगे—इससे ऐसी घटनाएँ बढ़ती हैं। कानूनी दृष्टि से ऐसी हरकतें गंभीर अपराध मानी जाती हैं।
बाबा साहब की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने वाला को हो सकती है कठोर कार्रवाई
- BNS Section 298👉 अगर किसी समुदाय की भावनाएँ आहत करने के इरादे से प्रतिमा तोड़ी गई सजा : 1 से 3 साल तक की जेल और जुर्माना
- समुदायों में वैमनस्य फैलाना BNS Section 196👉 यदि घटना से जाति/समुदाय के बीच तनाव या नफरत फैलती है सजा: 3 से 5 साल तक की जेलऔर जुर्माना
- संपत्ति को नुकसान (मिसचीफ)BNS Section 324👉 प्रतिमा तोड़ना या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान सजा: नुकसान की मात्रा के अनुसार 1 से 5 साल तक की जेल और जुर्माना
- अगर मामला SC/ST समुदाय से जुड़ा हो SC/ST (Prevention of Atrocities) Act भी लागू होता है👉 क्योंकि बाबा साहेब दलित समाज के प्रतीक हैं सजा : सख्त और गैर-जमानती प्रावधान विशेष अदालत में सुनवाई
