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जिला अदालतें पेशेवर संस्कृति को विकसित करने का केंद्र : मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत -

जिला अदालतें पेशेवर संस्कृति को विकसित करने का केंद्र : मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत

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दिल्ली// मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि न्याय प्रदान करने में जिला अदालतों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने उच्च न्यायालयों के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट से भी युवा वकीलों को जिला अदालतों में वकालत करने के लिए प्रोत्साहित के करने का आग्रह किया। यदि किसी में वादी को इस प्राथमिक केंद्र में संतोषजनक ढंग से उपचार मिल जाता है, तो मुझे पूरा विश्वास है कि उसे बड़े अस्पतालों में स्थानांतरित करने की जरूरत नहीं होगी। निश्चित रूप से, उसे किसी ट्रॉमा सेंटर में जाने की जरूरत नहीं होगी। जिला अदालत से अपने कानूनी करियर की शुरुआत का जिक्र करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि जिला अदालतें पेशेवर संस्कृक्ति को विकसित करने के केंद्र हैं। वहां प्रारंभिक प्रशिक्षण अपीलीय अदालतों में वकालत के लिए नींव रखता है।

जस्टिस सूर्यकांत ने दिल्ली बार काउंसिल द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में ये बातें कहीं। यह कार्यक्रम उनके 53 वें प्रधान न्यायाधीश बनने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।

निचली अदालत कहना गलत

निचली अदालत कहना गलत : सीजेआई ने देश में जिला अदालतों को निचली अदालतों के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत किए जाने पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र न्यायपालिका के एक महत्वपूर्ण अंग होने के नाते ये अदालतें अपीलीय मंचों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि न्याय मुख्य रूप से केवल अपीलीय मंचों में ही निहित नहीं होता है। सीजेआई ने कहा कि सच्चा न्याय जमीनी स्तर की अदालतों में ही निहित है क्योंकि आम नागरिक को अपने अधिकारों के क्रियान्वयन के लिए पहली बार जिला अदालतों में ही सामना करना पड़ता है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि जिला अदालतें वे स्थान हैं जहां कानून वास्तविक, तात्कालिक रूप लेता है और मानवीय दृष्टिकोण का स्वरूप ग्रहण करता है।

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