झारखंड की आवाज

राजकीय बैद्यनाथ महोत्सव, 2026 का हुआ भव्य उद्घाटन -

राजकीय बैद्यनाथ महोत्सव, 2026 का हुआ भव्य उद्घाटन

सांस्कृतिक कला व संगीत प्रथा हमारी विरासत इन्हें अक्षुण्ण बनाये रखेंः- उपायुक्त

तीन दिवसीय राजकीय बैद्यनाथ महोत्सव के आयोजन में स्थानीय, राज्यस्तरीय व बॉलीवुड के कलाकार देंगे अपनी प्रस्तुति

देवघर और झारखंड की धरती विविध संस्कृतियों और लोकपरंपराओं से समृद्ध रही है।

देवघर// जिले में तीन दिवसीय राजकीय बैद्यनाथ महोत्सव, 2026 (16, 17 एवं 18 मार्च) का उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी नमन प्रियेश लकड़ा, पुलिस अधीक्षक श्री सौरभ, देवघर नगर निगम महापौर रवि राउत, मधुपुर नगर परिषद अध्यक्ष दरक्शां परवीन, देवघर नगर निगम उपमहापौर टीप चटर्जी व जनप्रतिनिधियों ने सयुंक्त रूप से किया।

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देवघर एक शहर नहीं, बल्कि आस्था, अध्यात्म और संस्कृति का संगम है।

इसके अलावे कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा देवघर की यह पुण्यभूमि केवल एक शहर नहीं, बल्कि आस्था, अध्यात्म और संस्कृति का संगम है। यहाँ स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम, जो भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है, सदियों से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। हर वर्ष महाशिवरात्रि और श्रावणी मेला के दौरान देश-विदेश से लाखों भक्त यहाँ आकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। ऐसे में राजकीय बैद्यनाथ महोत्सव का आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह देवघर और झारखंड की समृद्ध परंपरा, कला, संगीत, लोकसंस्कृति और अध्यात्म को एक मंच पर प्रस्तुत करने का सुंदर प्रयास है।

महोत्सव पर्यटन, स्थानीय कला, हस्तशिल्प और स्व-रोजगार को भी प्रोत्साहित करता है।

इस महोत्सव के माध्यम से हम अपनी लोककलाओं, परंपराओं, संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं। देवघर और झारखंड की धरती विविध संस्कृतियों और लोकपरंपराओं से समृद्ध रही है। यहाँ की लोककलाएँ, लोकगीत, आदिवासी नृत्य, शिल्पकला और पारंपरिक उत्सव हमारी पहचान हैं। इस महोत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह महोत्सव पर्यटन, स्थानीय कला, हस्तशिल्प और स्व-रोजगार को भी प्रोत्साहित करता है।

स्थानीय कला के साथ लोक कलाओं को मिलेगा बढ़ावाः-उपायुक्त….

.इसके अलावे महोत्सव के दौरान उपायुक्त ने कहा कि भारत में लोक कला और संस्कृति की एक समृद्ध परंपरा रही है, और राजकीय बैद्यनाथ महोत्सव के माध्यम से उन पारंपरिक लोक नृत्य विधाओं का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। साथ ही महोत्सव का उद्देश्य स्थानीय कलाकारों के अलावा लोक कलाओं को बढ़ावा देना और लोक कलाकारों को एक मंच प्रदान करना है, ताकि वे अपनी कला को और अधिक लोगों तक पहुंचा सकें और लोगों को अपने संस्कृति से रूबरू कराया जा सके। आगे उन्होंने कहा देवघर में पर्यटन के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा कार्य किया जा रहा है, ताकि देवघर को मुख्य पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जायेगा। साथ ही उपायुक्त ने सभी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से आयोजित राजकीय बैद्यनाथ महोत्सव एक नई ऊंचाईयों को छुएगा।

पहले दिन कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से लोगों का मनमोहा…


राजकीय बैद्यनाथ महोत्सव के दौरान सभी विशिष्ट अतिथि को शॉल व स्मृति चिन्ह् देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावे महोत्सव की शुरूआत गणेश वंदना के साथ की गयी, जिसके पश्चात सबसे पहले झारखंड की वीरता, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का सशक्त प्रतीक पाइका नृत्य से जुड़ी प्रस्तुति से लोगों का मनमोहा। ज्ञात हो कि यह एक ‘मार्शल’ लोक नृत्य है, जिसमें नर्तक एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में ढाल लेकर युद्ध कौशल का प्रदर्शन करते हैं। साथ ही कलाकार रंग-बिरंगे झिलमिलाते वस्त्र पहनते हैं। उनके सिर पर मोर पंख लगी पगड़ी और पैरों में घुंघरू इस नृत्य की शोभा बढ़ाते हैं और ढोल, नगाड़ा, शहनाई और नरसिंह जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूँज नृत्य में एक अद्भुत ऊर्जा भर देती है।

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इसके बाद धनंजय नारायण खवाड़े ग्रुप, संजीव परिहस्त ग्रुप, हर्षप्रीत कौर एवं ग्रुप और अंत में अजित-मनोज के भक्तिपूर्ण भजनों ने सब का मन मोहा। साथ ही राजकीय बैद्यनाथ महोत्सव का आयोजन 16 से 18 मार्च तक चलेगा, जिसमें स्थानीय, राज्यस्तरीय कलाकारों के साथ बॉलीवुड के कलाकारों द्वारा अपनी प्रस्तुति दी जाएगी।

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