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कानून की जानकारी केवल वकीलों या न्यायाधीशों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए : पीडीजे -

कानून की जानकारी केवल वकीलों या न्यायाधीशों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए : पीडीजे

घरेलू हिंसा और नशा मुक्ति के प्रति समन्वय स्थापित करते हुए कार्य करने की आवश्यकता

Law information should not be limited to lawyers or judges only: PDJ

माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश- सह – अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार, उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक की सयुंक्त अध्यक्षता में विधिक मामले से जुड़ी जानकारी और जागरूकता को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

समाहरणालय सभागार में एक दिवसीय विधिक कार्यशाला का आयोजन: न्यायपालिका और प्रशासन ने साझा की विधिक जानकारियां

कानूनी पेचीदगियों को सुलझाने और विधिक जागरूकता फैलाने पर दिया गया जोर

घरेलू हिंसा और नशा मुक्ति के प्रति समन्वय स्थापित करते हुए कार्य करने की आवश्यकता.

देवघर // माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश- सह – अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार कौशल किशोर झा, उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक की सयुंक्त अध्यक्षता में विधिक मामले से जुड़ी जानकारी और जागरूकता को लेकर समाहरणालय सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

प्रशासन और न्यायपालिका के बीच बेहतर समन्वय पर संवाद

कार्यशाला को संबोधित करते हुए माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि कानून की जानकारी केवल वकीलों या न्यायाधीशों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा, “विधिक साक्षरता ही वह सशक्त माध्यम है जिससे आम नागरिक अपने अधिकारों के प्रति सजग हो सकते हैं।” उन्होंने विशेष रूप से ‘निःशुल्क कानूनी सहायता’ और ‘मध्यस्थता के माध्यम से मामलों के त्वरित निपटारे पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।

महत्वपूर्ण कानूनी धाराओं के सही क्रियान्वयन से जुड़ी जानकारी दी गई

कार्यशाला के दौरान तकनीकी सत्र में ‘माइनिंग मिनरल कानूनी नियमावली’ की बारीकियों पर विस्तृत चर्चा की गई। खनन क्षेत्र से जुड़े कानूनी विवादों, अवैध उत्खनन पर प्रभावी कार्रवाई और संबंधित धाराओं के प्रयोग के बारे में अधिकारियों को जानकारी दी गई। साथ ही सही तरीके से शिकायत दर्ज कराने और एफआईआर की विधिक प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।

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इसके अलावा नागरिकों के मौलिक अधिकारों के साथ-साथ उनके संवैधानिक कर्तव्यों पर चर्चा करने के अलावा दैनिक प्रशासनिक कार्यों में आने वाली महत्वपूर्ण कानूनी धाराओं के सही क्रियान्वयन से जुड़ी जानकारी दी गई। कार्यशाला के दौरान समाज में बढ़ती घरेलू हिंसा की घटनाओं को रोकना और NDPS एक्ट (नशा विरोधी कानून) के प्रति अधिकारियों व पुलिस पदाधिकारियों को अवगत कराया गया।

पीड़ितों के लिए उपलब्ध मुफ्त कानूनी सहायता के बारे में बताया गया।

साथ ही घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत महिलाओं को मिलने वाले कानूनी अधिकारों, जैसे कि निवास का अधिकार और भरण-पोषण के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके अलावा कार्यशाला के दौरान महिलाओं को घरेलू हिंसा के विरुद्ध शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया (हेल्पलाइन नंबर 181/1091) की जानकारी दी गई। साथ ही नशे के दुष्प्रभावों और NDPS एक्ट के तहत सजा के प्रावधानों से अवगत कराया गया। वही पीड़ितों के लिए उपलब्ध मुफ्त कानूनी सहायता के बारे में बताया गया।

प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए जनता का कानूनन जागरूक होना अनिवार्य है

इसके अलावा हिट एंड रन से जुड़े मामलों में त्वरित निराकरण से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी गई। इसके अलावा उपायुक्त श्री नमन प्रियेश लकड़ा ने कार्यशाला में विकास और कानून के आपसी संबंध को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए जनता का कानूनन जागरूक होना अनिवार्य है। आगे उन्होंने कहा कि विकास और कानून के आपसी संबंध को रेखांकित करते हुए उन्होंने आगे कहा कि कानून केवल दंड देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विकास के लाभों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का एक सशक्त उपकरण है।

उन्होंने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में कानूनी प्रावधानों का कड़ाई से पालन करें ताकि जनता का विश्वास प्रशासन पर और अधिक सुदृढ़ हो सके। आगे कार्यशाला में पुलिस अधीक्षक श्री सौरभ ने पुलिस और जनता के बीच ‘विश्वास’ के सेतु को मजबूत करने पर बल दिया। उन्होंने जनसुरक्षा से जुड़े तकनीकी और कानूनी पहलुओं से सभी को अवगत कराया।

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