दो साल से फाइलों में कैद है जीर्णोद्धार की योजना, न प्रशासनिक स्वीकृति मिली और न ही आवंटन; खिलाड़ियों को बदहाल मैदान में खेलने की मजबूरी
देवघर/मोहनपुर। मोहनपुर प्रखंड के एकमात्र प्रखंड स्तरीय स्टेडियम की बदहाली दूर करने के लिए दो साल पहले सरकारी स्तर पर पहल की गई थी। झारखंड सरकार के मंत्री हफीजुल हसन के निर्देश के बाद स्टेडियम के जीर्णोद्धार के लिए 47 लाख 66 हजार 400 रुपये का प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा गया था। लेकिन दो साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है।

न तो जीर्णोद्धार कार्य शुरू हुआ और न ही स्टेडियम की स्थिति में कोई सुधार हो पाया। ऐसे में स्थानीय खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के बीच निराशा बढ़ती जा रही है।
मंत्री के निर्देश के बाद भेजी गई थी अनुशंसा
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, जिला खेल शाखा, देवघर कार्यालय की ओर से पत्रांक 265, दिनांक 21 सितंबर 2024 को स्टेडियम के जीर्णोद्धार के लिए सरकार को विस्तृत प्रस्ताव भेजा गया था। यह पहल मंत्री हफीजुल हसन के मोहनपुर क्षेत्र भ्रमण के दौरान दिए गए निर्देश के बाद की गई थी।

स्टेडियम की मरम्मत और विकास कार्यों के लिए जिला परिषद के जिला अभियंता द्वारा तकनीकी स्वीकृति प्राप्त प्राक्कलन तैयार किया गया था। इसके आधार पर कुल 47 लाख 66 हजार 400 रुपये की अनुमानित लागत निर्धारित की गई। इसके बाद उपायुक्त की ओर से प्रशासनिक स्वीकृति और राशि आवंटित करने के लिए पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवाकार्य विभाग, रांची को अनुशंसा भेजी गई थी।
पवेलियन से लेकर बाउंड्री वॉल तक होना था काम
प्रस्ताव के तहत स्टेडियम में कई महत्वपूर्ण विकास कार्य किए जाने थे। इनमें पवेलियन बिल्डिंग की मरम्मत, गैलरी का जीर्णोद्धार, दुकानों का निर्माण, बाउंड्री वॉल की मरम्मत, खेल मैदान को तैयार करना, डीप बोरिंग और नाली निर्माण जैसे कार्य शामिल थे।
इन कार्यों के पूरा होने से स्टेडियम की स्थिति में सुधार होने और खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी। लेकिन प्रशासनिक स्वीकृति और आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण प्रस्तावित कार्य अब तक शुरू नहीं हो सके हैं।
मैदान में घास-झाड़, गड्ढों से खिलाड़ियों को परेशानी
वर्तमान में मोहनपुर स्टेडियम की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मैदान में जगह-जगह घास-झाड़ उगे हैं और गड्ढों के कारण खिलाड़ियों को खेलने में परेशानी होती है। पवेलियन की छत टूटी हुई है, बाउंड्री वॉल कई जगहों पर क्षतिग्रस्त है और गैलरी भी जर्जर अवस्था में है।

हाल ही में आयोजित पुलिस बनाम प्रेस मैत्री क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान भी खिलाड़ियों को इसी बदहाल मैदान में खेलना पड़ा। इस आयोजन ने एक बार फिर स्टेडियम की वास्तविक स्थिति को सामने ला दिया। खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने की बातों के बीच बुनियादी सुविधाओं का अभाव स्थानीय खेल व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
युवाओं की खेल प्रतिभाओं पर पड़ रहा असर
मोहनपुर जैसे बड़े प्रखंड में एक बेहतर खेल मैदान युवाओं के लिए महत्वपूर्ण सुविधा साबित हो सकता है। लेकिन स्टेडियम की बदहाली के कारण स्थानीय खिलाड़ियों को अभ्यास और खेल गतिविधियों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

हाल ही में पत्रकार बनाम पुलिस मैत्री क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान भी खिलाड़ियों को इसी बदहाल मैदान में खेलना पड़ा था, जिससे स्टेडियम की हकीकत सबके सामने आ गई।
स्थानीय खिलाड़ियों और ग्रामीणों का कहना है कि स्टेडियम का जीर्णोद्धार होने से युवाओं को बेहतर माहौल मिलेगा और उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर प्राप्त होगा। लोगों ने सरकार और संबंधित विभाग से जल्द पहल कर स्टेडियम को खेलने योग्य बनाने की मांग की है।
दो साल बाद भी प्रस्ताव पर कार्रवाई का इंतजार
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मंत्री के निर्देश के बाद प्राक्कलन तैयार हुआ और उपायुक्त की ओर से विभाग को अनुशंसा भी भेजी गई, तो अब तक योजना पर काम क्यों शुरू नहीं हो सका? क्या प्रस्ताव को प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली है या आवंटन की प्रक्रिया लंबित है? इस संबंध में संबंधित विभाग की आधिकारिक स्थिति सामने आना बाकी है।

फिलहाल 47.66 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित जीर्णोद्धार योजना के धरातल पर उतरने का इंतजार है। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इस मामले में कब तक कार्रवाई करते हैं और मोहनपुर स्टेडियम की बदहाल तस्वीर बदलने की दिशा में कब ठोस कदम उठाया जाता है।
