देवघर // आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत, 12 सितंबर 2026 के सफल आयोजन को लेकर माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री कौशल किशोर झा की अध्यक्षता में उनके सभागार में बैठक आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण समाधान को लेकर चर्चा की गई।
बैठक में विशेष रूप से बैंक से जुड़े मामलों के निपटारे पर जोर दिया गया। बताया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से बैंक ग्राहकों को अपने बकाया ऋण एवं अन्य संबंधित मामलों के निपटारे में कई तरह की राहत मिल सकती है। बैंक और ग्राहक आपसी सहमति एवं बातचीत के आधार पर विवादों का समाधान कर सकते हैं।
बैंक ग्राहकों को मिल सकते हैं ये प्रमुख लाभ
ब्याज, जुर्माना एवं अन्य शुल्क में राहत: बैंक मामलों में आपसी समझौते के आधार पर बकाया राशि पर लगने वाले ब्याज, जुर्माने एवं अन्य शुल्क में नियमानुसार छूट या राहत मिल सकती है।
आपसी समझौते से समाधान: लोक अदालत में बैंक और ग्राहक के बीच बातचीत के माध्यम से सौहार्दपूर्ण तरीके से मामले का निपटारा किया जाता है। इससे लंबे समय तक चलने वाली अदालती प्रक्रिया से राहत मिलती है।
कम खर्च में समाधान: लोक अदालत में मामलों के निपटारे के लिए सामान्य न्यायालय की तरह न्यायालय शुल्क नहीं लिया जाता है। इससे पक्षकारों को कम खर्च में विवाद का समाधान प्राप्त करने में मदद मिलती है।
समय की बचत: लोक अदालत का उद्देश्य मामलों का त्वरित समाधान करना है। इसके माध्यम से नियमित न्यायालय की लंबी प्रक्रिया की तुलना में कम समय में मामलों का निपटारा किया जा सकता है।
कानूनी मान्यता: लोक अदालत द्वारा पक्षकारों की सहमति से पारित निर्णय को कानूनी मान्यता प्राप्त होती है और वह संबंधित पक्षों पर बाध्यकारी होता है। ऐसे निर्णय के विरुद्ध सामान्यतः अपील का प्रावधान नहीं होता।
बैठक के माध्यम से बैंक अधिकारियों एवं संबंधित पक्षों से अपील की गई कि वे राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर का लाभ उठाते हुए लंबित एवं समझौता योग्य मामलों के निपटारे की दिशा में प्रभावी पहल करें, ताकि अधिक से अधिक लोगों को त्वरित, सुलभ एवं कम खर्च में न्याय मिल सके।
