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प्रकृति पर्व सरहुल पर विषेश पूजा अर्चना -

प्रकृति पर्व सरहुल पर विषेश पूजा अर्चना

लोहरदगा // प्रकृति पर्व सरहुल को लेकर लोहरदगा के झखरा कुंबा में विशेष पूजा अर्चना की गई। कार्यक्रम में आदिवासी समाज के नेता जिसमें विधायक रामेश्वर उरांव, नगर परिषद अध्यक्ष अनिल उरांव, रोहित प्रियदर्शी उरांव समेत अन्य हुए शामिल।

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सरहुल के विषेश अवसर पर पारंपरिक रूप से सरहूल जुलूस पूरे शहर में निकाली गई।

सरहुल मतलब ‘साल वृक्ष की पूजा’

सरहुल मतलब ‘साल वृक्ष की पूजा’ सरहुल पर्व प्रकृति से जुड़ा हुआ है यह पर्व धरती माता को समर्पित है – इस त्योहार के दौरान प्रकृति की पूजा की जाती है। सरहुल कई दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें मुख्य पारंपरिक नृत्य सरहुल नृत्य किया जाता है।

सरहुल पर्व मनाने का मुख्य उद्देश्य

सरहुल पर्व क्यों मनाया जाता है इसको लेकर कहा जाता है कि सरहुल पर्व प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने साल वृक्ष की पूजा और नई फसल के स्वागत मतलब सरहुल के बाद ही नए फसल धान, फूल, पेड़ों के पत्ते का उपयोग करते हैं और नव वर्ष की शुरुआत के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

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