दुमका। न्यायालय को जब्त बाइक की सही जानकारी नहीं देना दुमका नगर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अशोक राम को भारी पड़ गया। करीब पांच साल पहले जब्त की गई बाइक की स्थिति को लेकर न्यायालय ने जब थाना से रिपोर्ट मांगी, तो पुलिस ने रिपोर्ट दी कि संबंधित नंबर की बाइक थाना में मौजूद नहीं है। बाद में तलाश शुरू हुई तो वही बाइक थाना के पास एक गड्ढे में जर्जर हालत में मिली। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी की अनुशंसा पर डीआइजी ने नगर थाना प्रभारी अशोक राम को लाइन हाजिर कर दिया।
न्यायालय ने बाइक की स्थिति की मांगी थी रिपोर्ट
मामला नगर थाना के सामने पेट्रोल पंप के पीछे रहने वाले विमान काहली की बाइक से जुड़ा है। करीब पांच वर्ष पहले पुलिस ने उनकी बाइक जब्त की थी। इसके बाद परिवहन विभाग की ओर से वाहन का चालान भी काटा गया था।
वाहन मालिक ने बाइक को मुक्त कराने के लिए न्यायालय में आवेदन दिया। न्यायालय ने नगर थाना को बाइक की स्थिति की जांच कर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
थाना की रिपोर्ट में बताया गया- बाइक मौजूद नहीं
न्यायालय के आदेश के बाद थाना स्तर से बाइक की तलाश करने के बजाय रिकॉर्ड के आधार पर रिपोर्ट भेजी गई कि संबंधित नंबर की कोई बाइक नगर थाना में मौजूद नहीं है।
इसके बाद मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब पुलिसकर्मियों ने जब्त वाहनों की गहनता से तलाश शुरू की।
थाने के पास गड्ढे में मिली जर्जर बाइक
तलाश के दौरान संबंधित बाइक नगर थाना के पास ही एक गड्ढे में जर्जर हालत में पड़ी मिली। बाइक मिलने के बाद थाना प्रभारी की ओर से न्यायालय को इसकी जानकारी दी गई।
पहले न्यायालय को बाइक थाना में नहीं होने की रिपोर्ट देना और बाद में उसी बाइक का थाना के पास मिलना सामने आने पर न्यायालय ने नाराजगी जतायी।
एसपी की अनुशंसा पर डीआइजी ने की कार्रवाई
मामले की जानकारी एसपी को मिलने के बाद न्यायालय को सही जानकारी नहीं देने के मामले को गंभीरता से लिया गया। एसपी ने नगर थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा डीआइजी से की।
अनुशंसा के बाद रविवार शाम इंस्पेक्टर अशोक राम को लाइन हाजिर कर दिया गया।
नए थाना प्रभारी की नियुक्ति तक संभालेंगे अतिरिक्त प्रभार
नए नगर थाना प्रभारी की नियुक्ति होने तक मुफस्सिल थाना प्रभारी जगन्नाथ धान नगर थाना का भी काम संभालेंगे।
करीब पांच साल से जब्त बाइक की स्थिति और उसके संबंध में थाना स्तर से न्यायालय को दी गई रिपोर्ट ने पुलिस के रिकॉर्ड, जब्त वाहनों की निगरानी और उनके रखरखाव को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
