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राज्यपाल देवघर एम्स के छठी वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हुए शामिल -

राज्यपाल देवघर एम्स के छठी वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हुए शामिल

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देवघर // एम्स के छठी वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने द्वीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पश्चात राज्यपाल ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि सर्वप्रथम, विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल देवनगरी में स्थापित एम्स देवघर के ‘षष्ठम वार्षिकोत्सव’ के इस अवसर पर सम्पूर्ण एम्स देवघर परिवार को मैं हार्दिक बधाई देता हूँ। इस गौरवशाली अवसर पर आज यहाँ उपस्थित होकर मुझे अत्यंत हर्ष का अनुभव हो रहा है। यह अवसर केवल एक संस्थान का वार्षिकोत्सव मात्र नहीं है, बल्कि सेवा, समर्पण और संकल्प की उस यात्रा का उत्सव है, जिसने स्वास्थ्य और आशा की नई किरण जगाई है।

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किसी भी चिकित्सा संस्थान की साख मरीजों को दी जाने वाली सुविधा से ही आँकी जाती है।

इसके अलावा राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि हम सभी अवगत हैं कि 31 जुलाई, 2025 को एम्स देवघर ने अपना प्रथम दीक्षांत समारोह आयोजित किया, जिसमें आदरणीय राष्ट्रपति महोदया की गरिमामयी उपस्थिति रही। वह क्षण इस संस्थान के इतिहास में अमिट रहेगा। वह केवल डिग्री प्राप्ति का अवसर नहीं, बल्कि सेवा का संकल्प लेने का क्षण भी था। यह गौरव केवल विद्यार्थियों के लिए नहीं, बल्कि पूरे झारखण्ड के लिए भी था। आगे उन्होंने कहा कि मुझे यह कहते हुए हर्ष है कि 270 एकड़ में फैला यह आधुनिक परिसर 750 बेड वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, अत्याधुनिक डायग्नॉस्टिक सुविधाएँ, शोध केंद्र और उत्कृष्ट संकाय के साथ आज स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा का सशक्त आधार है।

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यहाँ न केवल झारखण्ड, बल्कि बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए आते हैं। वास्तव में किसी भी चिकित्सा संस्थान की साख उसके मरीजों को दी जाने वाली सुविधा और उनके विश्वास से ही आँकी जाती है। हम सबको यह स्मरण रखना चाहिए कि चिकित्सक का दायित्व केवल रोग का उपचार करना ही नहीं है, बल्कि रोगी के मन में स्वस्थ होने की आशा और विश्वास जगाना भी है। एक डॉक्टर की अच्छी वाणी, उसका धैर्य और उसका स्नेह कभी-कभी मरीजों के लिए सबसे बड़ी औषधि सिद्ध हो जाते हैं। यही कारण है कि अस्पताल केवल इलाज का स्थान नहीं होता, बल्कि मानवता और करुणा का मंदिर भी होता है। मैं चाहूँगा कि सभी अस्पताल इस आदर्श को आत्मसात करें।

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