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उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर महिला किसानों को दिया प्रशिक्षण, दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन -

उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर महिला किसानों को दिया प्रशिक्षण, दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन

देवघर। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा), देवघर की ओर से एग्रीकल्चर एक्सटेंशन योजना के तहत उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया। कार्यक्रम का आयोजन गोविंदपुर पंचायत के कुर्मी डीह गांव में किया गया, जिसमें करीब 30 महिला किसानों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

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प्रशिक्षण के दौरान महिला कृषकों को उर्वरकों के संतुलित और वैज्ञानिक इस्तेमाल के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के विभिन्न उपायों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में बताया गया कि फसल की बेहतर पैदावार के साथ मिट्टी और पर्यावरण की सेहत बनाए रखने के लिए उर्वरकों का जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करना जरूरी है।

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मिट्टी की जांच के बाद करें उर्वरकों का इस्तेमाल

प्रखंड तकनीकी प्रबंधक शशांक शेखर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बनाए रखने, फसल उत्पादन बढ़ाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए उर्वरकों का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अनियंत्रित इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और जल स्रोतों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर ही आवश्यक पोषक तत्वों और उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए।

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खेत की नियमित मृदा जांच कराई जाए और जांच रिपोर्ट के आधार पर मिट्टी में आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति की जाए। इसके साथ ही उर्वरक हमेशा अधिकृत एवं विश्वसनीय स्रोत से खरीदने और निर्धारित मात्रा में ही इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया।

जैविक और रासायनिक खाद के संतुलित उपयोग पर जोर

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को जैविक और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल की जानकारी दी गई। किसानों को गोबर की खाद, कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट और हरी खाद के प्रयोग के फायदे बताए गए।

प्रशिक्षकों ने कहा कि मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए जैविक खाद का उचित इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उत्पादन लागत को कम करने और उत्पादकता बढ़ाने पर भी चर्चा की गई।

नीम लेपित यूरिया और जैव उर्वरकों की जानकारी

प्रशिक्षण में किसानों को नीम लेपित यूरिया के इस्तेमाल की जानकारी दी गई। साथ ही राइजोबियम, एजोटोबैक्टर और पीएसबी जैसे जैव उर्वरकों के महत्व के बारे में बताया गया।

प्रशिक्षकों के अनुसार इन जैव उर्वरकों में मौजूद सूक्ष्मजीव पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। किसानों को बताया गया कि वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों का उपयोग करने से खेती की लागत में कमी, बेहतर उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल सकती है।

30 महिला किसानों को मिला प्रशिक्षण प्रमाण पत्र

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षक के रूप में अविनाश कुमार, अमन कुमार और बलराम कुमार वर्मा ने किसानों को आवश्यक जानकारी दी। मौके पर रिंकी कुमारी और शबनम कुमारी सहित करीब 30 महिला किसानों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी प्रतिभागी महिला किसानों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।

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