बाबा बैद्यनाथ धाम से कुछ किलोमीटर के दायरे में छिपी हैं कई धार्मिक और पर्यटन की खास जगहें, जानिए दूरी और उनसे जुड़ी मान्यताएं
देवघर। बाबा बैद्यनाथ धाम की नगरी देवघर सिर्फ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है। यहां धार्मिक आस्था के साथ-साथ पहाड़, मंदिर, गुफाएं, आश्रम और प्राकृतिक नजारे भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। अगर आप देवघर दर्शन के लिए आ रहे हैं, तो बाबा मंदिर के अलावा इन प्रमुख स्थानों को भी अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं।
🔱 1. बाबा बैद्यनाथ धाम — देवघर
दूरी: देवघर शहर के मध्य
देवघर की पहचान बाबा बैद्यनाथ धाम से होती है। जिला प्रशासन के अनुसार बैद्यनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। देशभर से श्रद्धालु यहां भगवान शिव के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं।

श्रावण के महीने में सुल्तानगंज से कांवर लेकर आने वाले श्रद्धालुओं के कारण देवघर की धार्मिक पहचान और भी व्यापक हो जाती है।
🛕 2. नौलखा मंदिर — बाबा मंदिर से करीब 1.5 KM
बाबा बैद्यनाथ मंदिर से लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नौलखा मंदिर देवघर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में है।
मंदिर में राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं स्थापित हैं और इसकी ऊंचाई करीब 146 फीट बताई गई है। जिला प्रशासन के अनुसार मंदिर के निर्माण में लगभग नौ लाख रुपये खर्च हुए थे, इसी कारण इसे नौलखा मंदिर कहा गया।
मान्यता: मंदिर के निर्माण की कहानी रानी चारुशीला और संत बालानंद ब्रह्मचारी से जुड़ी बताई जाती है।
🕉️ 3. नंदन पहाड़ — करीब 2 KM
देवघर बस स्टैंड से लगभग 2 किलोमीटर दूर नंदन पहाड़ धार्मिक आस्था और मनोरंजन दोनों का प्रमुख केंद्र है। यहां नंदी मंदिर के साथ शिव, पार्वती, गणेश और कार्तिकेय से जुड़े मंदिर भी हैं।
नंदन पहाड़ की पौराणिक मान्यता
स्थानीय पौराणिक मान्यता के अनुसार रावण भगवान शिव के धाम में प्रवेश करना चाहता था। वहां भगवान शिव के द्वारपाल नंदी ने उसे रोक दिया। इससे नाराज रावण ने नंदी को यहां फेंक दिया और इसी वजह से इस स्थान का नाम नंदन पहाड़ पड़ा, ऐसी मान्यता बताई जाती है।
आज यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का खूबसूरत नजारा भी देखा जा सकता है।
🔱 4. तपोवन — देवघर से करीब 10 KM
देवघर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में तपोवन का नाम भी शामिल है। यहां पहाड़ी, गुफाएं और मंदिर श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
झारखंड पर्यटन विभाग के अनुसार तपोवन की गुफाओं को साधु-संतों की तपस्या से जोड़कर देखा जाता है। यहां महर्षि वाल्मीकि और श्री बालानंद ब्रह्मचारी सहित कई संतों की तपस्या की मान्यता बताई गई है। रावण से जुड़ी तपस्या की मान्यता का भी पर्यटन विभाग के विवरण में उल्लेख है।
तपोवन के नीचे स्थित सीता कुंड को भी स्थानीय धार्मिक परंपरा में पवित्र माना जाता है।
⛰️ 5. त्रिकूट पहाड़ — करीब 20-21 KM
देवघर से लगभग 20-21 किलोमीटर की दूरी पर स्थित त्रिकूट पहाड़ धार्मिक आस्था और रोमांच का अनूठा संगम है। जिला प्रशासन इसे ट्रेकिंग, रोपवे, प्राकृतिक पर्यटन और तीर्थ के लिए महत्वपूर्ण स्थल बताता है।
त्रिकूट में तीन प्रमुख चोटियां हैं। यहां त्रिकुटाचल महादेव मंदिर और ऋषि दयानंद का आश्रम भी बताया गया है। झारखंड पर्यटन विभाग के अनुसार त्रिकूट की पहाड़ियों को लेकर मान्यता है कि यहां कई ऋषियों ने तपस्या कर मोक्ष प्राप्त किया।
ऊंचाई से देवघर का विस्तृत दृश्य पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है।
🛕 6. सत्संग आश्रम — देवघर
देवघर का सत्संग आश्रम भी प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। जिला प्रशासन के अनुसार यह ठाकुर अनुकूलचंद्र के भक्तों के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है और देवघर के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित है।
देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
🛕 7. बासुकीनाथ — देवघर से लगभग 40+ KM
देवघर-बासुकीनाथ धार्मिक यात्रा का विशेष महत्व है। बाबा बैद्यनाथ धाम के बाद श्रद्धालुओं के बीच बासुकीनाथ जाने की परंपरा भी काफी प्रसिद्ध है।
देवघर जिला प्रशासन भी बासुकीनाथ मंदिर को जिले के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में सूचीबद्ध करता है।
📍 एक नजर में देवघर के प्रमुख स्थल
| स्थान | लगभग दूरी |
|---|---|
| बाबा बैद्यनाथ धाम | देवघर शहर |
| नौलखा मंदिर | 1.5 KM |
| नंदन पहाड़ | करीब 2 KM |
| तपोवन | करीब 10 KM |
| त्रिकूट पहाड़ | करीब 20–21 KM |
| सत्संग आश्रम | देवघर |
| बासुकीनाथ | 40+ KM |
नोट: दूरी अलग-अलग स्थानों से मापे जाने और सड़क मार्ग के कारण बदल सकती है। इसलिए इन्हें लगभग दूरी के रूप में दिया गया है। त्रिकूट की दूरी सरकारी स्रोतों में करीब 18 से 21 KM तक बताई गई है।
देवघर क्यों है खास ?
देवघर में एक ही यात्रा के दौरान ज्योतिर्लिंग के दर्शन, प्राचीन मंदिर, पौराणिक स्थल, पहाड़, गुफाएं, रोपवे और प्राकृतिक नजारों का अनुभव किया जा सकता है।
यही वजह है कि बाबा बैद्यनाथ की नगरी धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ झारखंड के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में भी अपनी अलग पहचान रखती है।
