मुलायम सिंह यादव पुण्यतिथि विशेष: किसान परिवार से निकलकर यूपी की सत्ता तक पहुंचे नेताजी, जानिए उनके जीवन से जुड़ा चुंगी का चर्चित किस्सा
Bkd News Jharkhand | विशेष रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुलायम सिंह यादव का नाम उन नेताओं में लिया जाता है, जिनकी पहचान गांव, किसान और ग्रामीण समाज से जुड़ी राजनीति के कारण बनी। समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव को समर्थक ‘नेताजी’ के नाम से पुकारते थे। उनकी पुण्यतिथि पर उनके शुरुआती जीवन से जुड़ा बैलगाड़ी और 25 पैसे की चुंगी का एक दिलचस्प किस्सा फिर चर्चा में आता है।
यह कहानी उस दौर की बताई जाती है, जब मुलायम सिंह यादव राजनीति में बड़े मुकाम तक नहीं पहुंचे थे। वह किशोर अवस्था में थे और गांव की जिंदगी तथा खेती-किसानी से उनका सीधा जुड़ाव था।
जब धान बेचने निकले थे मुलायम सिंह यादव
अमर उजाला में प्रकाशित एक संस्मरण के अनुसार, भाजपा नेता अमित पुरी ने यह किस्सा मुलायम सिंह यादव के साथ लंबे समय तक काम कर चुके भगवती सिंह के हवाले से साझा किया था।
किस्से के मुताबिक, एक दिन मुलायम सिंह यादव बैलगाड़ी पर धान लादकर शहर में एक व्यापारी के पास बेचने जा रहे थे। शहर के नजदीक पहुंचने पर उन्हें चुंगी चौकी पर रोक लिया गया। वहां कर्मचारियों ने उनसे चुंगी के रूप में 25 पैसे मांगे।
मुलायम सिंह यादव ने बताया कि उस समय उनके पास पैसे नहीं हैं। उन्होंने धान बेचकर लौटते समय शुल्क देने की बात कही, लेकिन उन्हें बिना चुंगी चुकाए आगे जाने की अनुमति नहीं मिली।
25 पैसे जुटाने के लिए जाना पड़ा व्यापारी के पास
संस्मरण में बताया गया है कि चुंगी चुकाने के लिए मुलायम सिंह यादव को बैलगाड़ी छोड़कर व्यापारी के पास जाना पड़ा। वहां से 25 पैसे उधार लेने के बाद वह वापस लौटे और चुंगी देकर आगे बढ़ सके।

आज 25 पैसे की रकम छोटी लग सकती है, लेकिन उस दौर में खेती-किसानी से जुड़े परिवारों के लिए हर पैसे का महत्व था। इस घटना ने उनके मन पर क्या प्रभाव छोड़ा, इसे लेकर संस्मरण में एक और दिलचस्प प्रसंग बताया गया है।
मुख्यमंत्री बनने पर चुंगी खत्म करने का लिया था संकल्प!
किस्से के अनुसार, मुलायम सिंह यादव ने उस घटना के बाद संकल्प जताया था कि यदि वह कभी मुख्यमंत्री बने, तो ऐसी चुंगी व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में काम करेंगे। बताया जाता है कि उस समय वहां मौजूद लोगों ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया था।
यह प्रसंग उनके जीवन से जुड़ी एक प्रचलित कहानी के रूप में सामने आता है। हालांकि, इसे स्वतंत्र ऐतिहासिक दस्तावेज से प्रमाणित घटना के बजाय प्रकाशित संस्मरण में दर्ज विवरण के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
गांव की पृष्ठभूमि से प्रदेश की राजनीति तक का सफर
मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवंबर 1939 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई गांव में हुआ था। उनका शुरुआती जीवन ग्रामीण परिवेश में बीता। शिक्षक के रूप में काम करने और पहलवानी से जुड़ाव के बाद उन्होंने राजनीति में अपनी पहचान बनाई।
वह 1989, 1993 और 2003 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। वर्ष 1996 में उन्होंने केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। उन्होंने 1992 में समाजवादी पार्टी की स्थापना की थी।
नेताजी की पुण्यतिथि पर याद आते हैं संघर्ष के किस्से
10 अक्टूबर 2022 को मुलायम सिंह यादव का निधन हुआ था। उनकी पुण्यतिथि पर उनके राजनीतिक सफर के साथ-साथ उनसे जुड़े ऐसे संस्मरण भी याद किए जाते हैं, जो उनके शुरुआती जीवन और ग्रामीण परिवेश की झलक दिखाते हैं।
बैलगाड़ी पर धान लेकर जाने और 25 पैसे की चुंगी का यह किस्सा भी उन्हीं में से एक है। इसकी चर्चा इसलिए होती है क्योंकि यह एक साधारण ग्रामीण अनुभव को उस नेता के जीवन से जोड़ता है, जिसने आगे चलकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
