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दुमका के बाबा बासुकिनाथ धाम में 1342 ईस्वी का ऐतिहासिक प्रमाण -

दुमका के बाबा बासुकिनाथ धाम में 1342 ईस्वी का ऐतिहासिक प्रमाण

दुमका // झारखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थान बाबा बासुकीनाथ धाम स्थित शिवगंगा सरोवर में विराजमान पातालेश्वर महादेव ( स्वयंभू ज्योतिर्लिंग ) के दर्शन को श्रद्धालुओं की काफी भीड़ देखी जा रही है आपको बता दे की हर 5 वर्षों में एक बार शिव गंगा सरोवर की सफाई की जाती है और सरोवर का जल को सुखाया जाता है इसके बाद शिव गंगा के अंदर विराजमान स्वयंभू ज्योतिर्लिंग का दर्शन होता है… और बारिश होने के बाद जैसे ही शिवलिंग तक जल पहुंच जाता है पुनः शिवगंगा सरोवर में जल को भर दिया जाता है..

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1342 ईस्वी का ऐतिहासिक प्रमाण

जब झारखंड सरकार के विशेष प्रमंडल द्वारा शिवगंगा सरोवर को सुखाकर इसकी व्यापक साफ-सफाई कराई गई, तो कीचड़ और पानी हटने के बाद इस प्राचीन पाताल कुंड के दर्शन हुए। इस कुंड की खुदाई के दौरान पाताल शिवलिंग के समीप प्राचीन त्रिशूल, सिंदूर और अन्य पूजन सामग्रियों के साथ एक ऐतिहासिक शिलापट्ट (पत्थर का बोर्ड) मिला।

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इस शिलापट्ट पर सन 1342 ईस्वी अंकित है, जो यह साबित करता है कि वर्तमान मंदिर और शिवगंगा के बड़े स्वरूप में आने से सदियों पहले भी लोग इसी स्थान पर पूजा करते थे ।

हर 5 वर्षों के बाद देखने को मिलता है यहचमत्कार

हैरानी की बात तो यह है कि शिवगंगा सरोवर के अंदर विराजमान इस ज्योतिर्लिंग में जो भी फूल चढ़ाया जाता है हर 5 वर्षों के बाद वह वैसा का वैसा ही मिलता है लकड़ी का खड़ाव जल में नहीं तैरता ना ही वर्षों से जल के अंदर खराब हुआ और भी कई चमत्कारी बातें इस ज्योतिर्लिंग से जुड़ी हुई है ।

पाताल शिवलिंग की पूजा अर्चना करने को आतुर नजर आ रहे

बता दें कि श्रावणी मेला 2026 की तैयारियों को लेकर प्रशासन की ओर से शिवगंगा सरोवर की साफ सफाई की जा रही है और इस दौरान शिवगंगा के जल को मोटर पंप की मदद से पूरी तरह से बाहर निकाल दिया गया है। शिवगंगा का जल हट जाने एवं कुंड के गड्ढे से कीचड़ हटाने के बाद तलहटी में मौजूद शिवलिंग बाहर निकल आया है। वर्षों बाद निकले आस्था के प्रतीक पाताल बाबा के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। हर कोई इस दुर्लभ संयोग से मिले पाताल शिवलिंग की पूजा अर्चना करने को आतुर नजर आ रहे हैं और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

शिवगंगा में मौजूद शिवलिंग का इतिहास वर्षों पुराना है

पंडा धर्म रक्षिणी सभा के प्रवक्ता सुबोध कांत झा बताते हैं कि शिवगंगा में मौजूद शिवलिंग का इतिहास वर्षों पुराना है और जब जब शिवगंगा की सफाई की जाती तब श्रद्धालुओं को पाताल बाबा का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। तीन वर्ष पूर्व किये गये सफाई कार्य के समय लोगों को ऐसा दुर्लभ दर्शन मिला था।

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पाताल बाबा का पूजा अर्चना करते श्रद्धालु

तीन वर्ष बाद एक बार फिर से पाताल बाबा के दर्शन का दुर्लभ संयोग मिला है। चूंकि अभी इस क्षेत्र में बारिश नहीं हो रही इसलिए शिवलिंग का श्रद्धालु सुलभ दर्शन कर रहे हैं। बारिश होते ही कुंड में जल भर जाएगा जिससे पाताल बाबा जल में समाहित हो जाएंगे और लोग दर्शन से वंचित हो जाएंगे।

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