झारखंड की आवाज

लोग सड़कों पर उतरेंगे तो सरकार को कृषि कानून की तरह बीभी ग्राम योजना को वापस लेना होगा : प्रदीप यादव -

लोग सड़कों पर उतरेंगे तो सरकार को कृषि कानून की तरह बीभी ग्राम योजना को वापस लेना होगा : प्रदीप यादव

1004029721

देवघर // केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून का नाम बदले जाने के ख़िलाफ़ “मनरेगा बचाओ संग्राम” अभियान तहत देवघर जिला कांग्रेस कमिटी द्वारा जिलाध्यक्ष मुकुंद दास के नेतृत्व में टावर चौक स्थित महात्मा गांधी प्रतिमा स्थल पास एक दिवसीय उपवास कर विरोध जताया। उपवास कार्यक्रम में पार्टी के सैकड़ो नेताओं कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव एवं पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख मुख्य रूप से भाग शामिल हुए।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

मनरेगा कोई योजना नहीं एक एक्ट है, देश के करोड़ बेरोजगार मजदूरों को रोजगार की गारंटी देती है

विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने संबोधन में कहा कि मनरेगा कोई योजना नहीं एक एक्ट है,जिसके तहत् देश के करोड़ बेरोजगार मजदूरों को रोजगार की गारंटी देती है। लोगों को अपने घरों के पास 100 दिन का काम मिल जाता था। इसके साथ ही कई परिसंपत्तियां भी तैयार हो जाते थे। लेकिन जब से केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई है, लगातार मजदूर,किसानों,नौजवानों के हितों पर हमला कर रही है। कांग्रेस द्वारा लाए गए कानून को कमजोर करने का काम कर रही है, चाहे वह भूमि अधिग्रहण बिल हो,सूचना का अधिकार अधिनियम हो या फिर मनरेगा जैसा कानून हो। अगर 2010 और वर्तमान की बजट को देखें तो मनरेगा बजट और आवंटन से प्रतीत हो जाएगा कि पूर्व से ही इस योजना को समाप्त करने की साजिश चल रही है। मुख्यतः यह योजना बीभी ग्राम योजना है,जिसे राम के नाम के ढाल में जी राम जी बनाया गया है। कृषि कानून की तरह जब देश के मजदूर,बेरोजगार नौजवान सड़कों पर उतरेंगे तो इसे भी केंद्र सरकार को वापस लेना होगा।

सशरीर गांधी की हत्या 1948 में कर दी अब उनके आदर्शों और उनके विचारों की हत्या पर तुले हैं : पूर्व कृषि मंत्री

पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि राम हमारे आदर्श हैं, वो निर्विवाद है। उनके नाम में कोई विवाद ही नहीं है। महात्मा गांधी भी राम के सच्चे भक्त थे। इन लोगों ने इस राम के सच्चे भक्त गांधी के सशरीर गांधी की हत्या 1948 में कर दी अब उनके आदर्शों और उनके विचारों की हत्या पर तुले हैं, जो कतई संभव नहीं है। मनरेगा देश के करोड़ शारीरिक श्रमिकों की आत्मा और जान है। हम मजदूरों के हक एवं अधिकार की लड़ाई जारी रखेंगे। मनरेगा की तुलना इस योजना से कतई नहीं की जा सकती है। इसमें काफी विसंगतियां है। इस योजना से कभी भी मजदूरों का हित साधन नहीं जा सकता।

Leave a Reply