झारखंड की आवाज

पूर्वी सिंहभूम में मेयर चुनाव बना सियासी प्रतिष्ठा का संग्राम -

पूर्वी सिंहभूम में मेयर चुनाव बना सियासी प्रतिष्ठा का संग्राम

IMG 20260215 154737

पूर्वी सिंहभूम // जमशेदपुर के मानगो और जुगसलाई नगर निगम का मेयर चुनाव इस बार स्थानीय विकास के मुद्दों से आगे बढ़कर राजनीतिक वर्चस्व, संगठनात्मक अनुशासन और पारिवारिक प्रभाव की सीधी टक्कर बन गया है। महिलाओं के लिए आरक्षित सीट ने जहां महिला नेतृत्व को अवसर दिया है, वहीं जमीनी स्तर पर यह चुनाव प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में उभर रहा है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

मानगो में झारखंड के पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता अपनी पत्नी सुधा गुप्ता के समर्थन में खुलकर चुनावी मोर्चा संभाले हुए हैं। उनके समर्थक इसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रहे हैं। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व जिलाध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव ने अपनी पत्नी कुमकुम श्रीवास्तव को मैदान में उतारा। प्रदेश नेतृत्व से मतभेद के बाद मामला तूल पकड़ गया।

भाजपा के प्रदेश महामंत्री प्रदीप वर्मा की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस में राजकुमार श्रीवास्तव से स्पष्ट करने को कहा गया कि वे पार्टी लाइन का पालन करेंगे या पत्नी की उम्मीदवारी का समर्थन करेंगे। इसके बाद उन्होंने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता और सभी दायित्वों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने 45 वर्षों की सेवा के बावजूद अपमानित किए जाने का आरोप लगाया और न्यायालय जाने की बात कही। इस घटनाक्रम ने भाजपा की स्थानीय इकाई में असंतोष को उजागर कर दिया है।

चुनावी चर्चा में राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा महिलाओं के लिए आरक्षण को लेकर उठाए गए कदम भी केंद्र में हैं। राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या यह आरक्षण वास्तविक महिला नेतृत्व को आगे ला रहा है या प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों के विस्तार का माध्यम बन रहा है।

जुगसलाई नगर निगम में भी समीकरण कम दिलचस्प नहीं हैं।

जुगसलाई नगर निगम में भी समीकरण कम दिलचस्प नहीं हैं। यहां नौशीन खान मैदान में हैं, जिनके पति हेदायतुल्ला खान को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) से जुड़ा प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। हालांकि पार्टी ने उन्हें आधिकारिक समर्थन नहीं दिया है, फिर भी उनका राजनीतिक नेटवर्क चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर रहा है। डॉली मल्लिक के पीछे उनके पति मानिक मल्लिक की सक्रियता चर्चा में है, जबकि बलबीर कौर के समर्थन में उनके पति शैलेंद्र सिंह, जो सिख समाज में प्रभाव रखते हैं, रणनीति में जुटे हैं।

इसके अलावा नीलूफर और रिंकू सिंह भी मेयर पद की प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रिंकू सिंह को छोड़ अधिकांश प्रत्याशियों के पीछे मजबूत सामाजिक और राजनीतिक आधार वाले परिवार खड़े हैं, जिससे मुकाबला और अधिक बहुआयामी हो गया है।

परिवार की राजनीतिक विरासत’ बनाम ‘पार्टी अनुशासन

मानगो और जुगसलाई का चुनाव इस बार दलीय सीमाओं से आगे निकलकर ‘परिवार की राजनीतिक विरासत’ बनाम ‘पार्टी अनुशासन’ की बहस का केंद्र बन गया है। एक ओर भाजपा आंतरिक अनुशासन और आधिकारिक समर्थन की लाइन पर कायम रहने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस और अन्य दल इसे अपनी-अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रहे हैं।राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह मतदान सिर्फ मेयर का फैसला नहीं करेगा, बल्कि यह भी संकेत देगा कि स्थानीय राजनीति में मतदाता पार्टी की आधिकारिक रणनीति को तरजीह देते हैं या प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों की पकड़ को।

यह चुनाव आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले शहरी राजनीतिक समीकरणों की दिशा भी तय कर सकता है।

Leave a Reply