लखनऊ // उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में काकोरी थाना क्षेत्र में ससुराल आए दामाद की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम भेजकर चार आराेपिताें को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है। सहायक पुलिस आयुक्त काकोरी शकील अहमद ने मंगलवार काे बताया कि काकोरी ग्राम लालताखेड़ा के बाहर एक बाग में दो भाइयाें को चाकू मार दिया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने फारेंसिक टीम के साथ घटना की जांच कर घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इलाज के दौरान एक युवक की मौत हो गई, जबकि एक भाई की हालत गंभीर है।सहायक पुलिस आयुक्त ने बताया कि मृतक की पहचान पीलीभीत जिले के निवासी ग्राम रामसागर (24) के रूप में हुई। पूछताछ में घायल युवक राहुल ने अपनी तहरीर में बताया कि रामसागर का दिसंबर 2024 में काकोरी के ग्राम लालताखेड़ा निवासी कामिनी से प्रेम विवाह हुआ था। कुछ समय से कामिनी ससुराल में रह रही थी। बाद में उसके परिजन उसे अपने घर लालताखेड़ा ले गए। आरोप है कि उसके परिजन उसकी दूसरी जगह शादी कराने की तैयारी कर रहे थे।रविवार को राहुल अपने भाई राम सागर के साथ उसकी पत्नी को विदा कराने लालताखेड़ा आया था। वहां पर कामिनी के पिता भीमा गौतम, उसके पुत्र सुमित, अमित और मौसी का लड़का पंकज से लालताखेड़ा गांव के बाहर बातचीत के दौरान विवाद हो गया। इसके बाद सभी लोगों ने मिलकर राम सागर और उसके भाई राहुल के साथ गाली-गलौज व मारपीट शुरू कर दी।
इसी दौरान सुमित ने चाकू से प्रहार करके रामसागर को घायल कर दिया। राहुल के बीच-बचाव करने पर उसके साथ मारपीट की गई। शोर शराबा होने पर आरोपित मौके से फरार हो गये। इधर, घटना की जानकारी पर पहुंची पुलिस ने घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने राम सागर को मृत घोषित कर दिया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम भेजकर घायल को अस्पताल पहुंचाया।सहायक पुलिस आयुक्त ने बताया कि परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने चार नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई कर रही है।
कोरियन लवर गेम के चलते गाजियाबाद की तीन बहनों की खुदकुशी ने आज के हालात और बच्चों की बदलती मानसिकता को लेकर झकझोर कर रख दिया है। अभी तीन बहनों की चिता की आग ठंडी भी नहीं हुई कि ऑनलाइन गेम के चलते मेरठ का 22 वर्षीय युवक मोहम्मद कैफ हेडफोन लगाकार गेम खेलते खेलते ही बेहोश होकर गिर गया और ब्रेन हेमरेज होने से मौत के आगोश में समा गया। इसे इंटरनेट गेमिंग डिसआर्डर के रुप में देखा व समझा जा सकता है।
फायर-फायर चिल्लाने की लत….
इस तरह की घटनाएं देश-दुनिया में आये दिन हो रही है और इनमें से कुछ ही घटनाएं हमारे सामने आ पाती है। ऐसा नहीं है कि ऑनलाइन गेम की गिरफ्त में हमारे देश के बच्चे या युवा आ रहे हों अपितु दुनिया के अधिकांश देश इस समस्या से दो-चार हो रहे हैं। इस तरह की घटनाओं को हत्या के रुप में ही देखा जाना चाहिए। आत्महत्या कहकर इसे हल्का किया जा रहा है। हालात यहां तक है कि बच्चे या ऑनलाइन गेम खेलने वाले रात को सोने की स्थिति में गेम में चल रहे टास्क से संबंधित बातें बोलते हुए देखे जा सकते हैं। पिछले दिनों ऑनलाइन गेम से ग्रसित बच्चे द्वारा नींद में फायर-फायर चिल्लाने का समाचार आम होता देखा गया। दरअसल, ऑनलाइन गेम मनोस्थिति को इस कदर प्रभावित कर देते हैं कि उठते-बैठते टास्क ही टास्क दिमाग में घूमता रहा है। इसी कारण से दुनिया के कई देशों में बच्चों के लिए इंटरनेट के उपयोग को लेकर सख्ती या रोक जैसे कदम उठाने शुरु किये हैं।
आस्ट्रेलिया, फ्रांस, ब्रिट्रेन, सिंगापुर दक्षिण कोरिया आदि देश इस दिषा में सक्रिय हुए हैं।दरअसल, देखा जाएं तो आनलाइन गेम की लत अन्य नशों से भी अधिक गंभीर होती जा रही है। माना जाता है कि दुनिया के देशों में 1982 में आनलाइन गेमिंग के चलते पहली मौत का मामला सामने आया था जबकि उस समय तो इंटरनेट की पहुंच एक प्रतिशत तक भी नहीं थी। 2022 के बाद ऑनलाइन गेमों की बाढ़ सी आ गई और भारत ही नहीं दुनिया के देशों में गेमिंग के चलते होने वाले दुष्प्रभावों से हिला कर रख दिया है।
कोविड के साइड इफेक्ट या ऑनलाइन गेमिंग के चस्के
देखा जाए तो जहां तक बच्चों में ऑनलाइन गेमिंग के चस्के का प्रमुख कारण माना जाए तो इसे कोविड के साइड इफेक्ट के रुप में देखा जा सकता है। कोविड के चलते बच्चों की जिस तरह से ऑनलाइन कक्षाएं शुरु हुई और जिस तरह से आज भी इसे देखा जा सकता है तो बच्चों के हाथों में एंड्रायड़ फोन आने और ऑनलाइन कक्षाओं के बाद स्क्रिन की अवधि बढ़ने और आकर्षक भ्रमित करने वाले गेमों से बच्चों के जुड़ने से हालात दिन-प्रतिदिन खराब ही हुए हैं। इस लत में बच्चे ही नहीं अपितु युवा भी आते जा रहे हैं। ब्लू व्हेल चैलेंज, पबजी, चोकिंग गेम, फार्टनाइट, फ्री फायर, पपी प्ले टाइम, द बेबी इन येलो, एविल नन, आइसक्रीम आदि गेम ने सर्वाधिक प्रभावित किया है।
ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया मुख्यतौर से दो दिशाओं में चलती है।
ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया मुख्यतौर से दो दिशाओं में चलती है। एक टास्कबेस्ड गेम है तो दूसरे इमर्सिंव गेम है। टास्कबेस्ड गेम में लगातार नए नए टास्क दिए जाते हैं। यहां तक कि ऐसा भी गया है कि इस तरह के गेम में कई बार तो खेलने वाले को स्वयं को नुकसान पहुंचाने वाले टास्क दे दिए जाते हैं। वाइल्ड हंट, विचर 3, होरिजोन जैसे इस तरह के अनेक गेम है। यह तो केवल उदाहरण मात्र है। इसी तरह से इमर्सिंग गेमों में तकनीक और ग्राफिक्स के माध्यम से यर्थाथ दुनिया जैसे हालात दिखाते हैं। जीरो डॉन, रेड डेड, फॉलआउट और इसी तरह के अनेक गेम उपलब्ध है। खतरनाक तथ्य यह है कि 10-12 से लेकर 40 वर्ष तक के लोग इनके ज्यादा शिकार हो रहे हैं।ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया की बात करें तो यह अपने आप में बड़ा व्यापार है। 2024 में 3.7 बिलियन के कारोबार को माना जा रहा है। साल 2029 तक इसके 9.1 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
यानी 2029 तक लगभग तीन गुणा बढ़ जाएगा। सबसे बड़ी चिंतनीय बात यह है कि ऑनलाइन गेम के कारण भले ही मौत के समाचार कभी कभार ही सामने आते हो पर इससे ज्यादा गंभीरता यह है कि मनोवैज्ञानिक असर अधिक दिखाई देने लगा है। ऑनलाइन गेम के लत वालों में डर, अकेलापन, अनिंद्रा, खुद को नुकसान पहुंचाने के साथ ही शारीरिक और मानसिक विकार आम होते जा रहे हैं। कुंठा, आक्रोश, संवेदनहीनता, तनाव आम होते जा रहे हैं।
परिजनों को निरंतर निगरानी रखने की जरूरत…
समय आ गया है जब ऑनलाइन गेमिंग की समस्या का हल खोजा ही जाना चाहिए। अन्यथा हालात दिन-प्रतिदिन बद से बदतर ही होंगे। ऑनलाइन गेमिंग बनाने वालों को तो एक मात्र उद्देश्य अधिक से अधिक पैसा कमाना है उन्हें इसके दुष्प्रभावों से कोई लेना-देना नहीं होता। हालांकि भारत सहित कुछ देशों की सरकारें सक्रिय हुई है। पर मनोवैज्ञानिकों को भी आगे आकर कोई समाधान खोजना होगा वहीं अभिभावकों, परिजनों व समाज का भी दायित्व हो जाता है। परिजनों को निरंतर निगरानी रखने, मोबाइल देखने की समय सीमा तय करने, किसी और रचनात्मक कार्य में लगाने, सामाजिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय करने और परंपरागत आउट डोर गेम्स के प्रति रुचि पैदा करने के ठोस प्रयास करने ही होंगे। सरकार को भी मौत की राह में ले जाने वाले गेम फॉरमेट पर रोक लगाने के सख्त कदम उठाने होंगे। (डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा , लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैंं।)
रोहतास // जिले के परसथूआ थाना क्षेत्र के ग्राम सोहसा के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 319 पर छात्रों से भरी बस दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से दो शिक्षक की मौत हो गई,जबकि पांच शिक्षक और 11 छात्र गंभीर रूप से जख्मी हैं।
पुलिस के अनुसार सभी शिक्षक और छात्र कैमूर जिला के चैनपुर थाना क्षेत्र के मध्य विद्यालय बढौना के हैं। बस छात्रों और शिक्षकों काे लेकर शैक्षणिक परिभ्रमण पर पटना जा रही थी। घटना साेमवार रात डेढ़ बजे की बताई जाती है। मृतकों में शिक्षक पुनीत कुमार और सुमित कुमार शामिल हैं।एसपी रौशन कुमार ने बताया कि बस दुर्घटना में दो शिक्षक की माैत हो गई है तथा पांच शिक्षक और 11 छात्र जख्मी हुए हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल सासाराम ले जाया गया है। बताया कि बस कुल सात शिक्षक और 36 छात्र के अलावा एक अभिभावक भी सवार थे। एसपी ने बताया कि दोनों शव को पोस्टमार्टम कराने के लिए सदर अस्पताल सासाराम ले जाया गया है।
नई दिल्ली // उच्चतम न्यायालय ने जोधपुर जेल प्रशासन को निर्देश दिया है कि वो लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हिरासत के दौरान दी गई पेन ड्राइव सीलबंद कर कोर्ट में दाखिल करें। उच्चतम न्यायालय ने इस बात का संदेह जताया कि केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक के भाषणों से संबंधित जो ट्रांसक्रिप्ट दी है उसके अनुवाद में काफी फर्क है। जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सोनम वांगचुक के भाषणों के ट्रांसक्रिप्ट में कई वैसे शब्द हैं जो उन्होंने कहा ही नहीं। तब कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि आपने जो सूची सौंपी है उसमें हिरासत के आदेश का जिक्र ही नहीं है। कम से कम वांगचुक के भाषणों का सही ट्रांसक्रिप्ट तो होना ही चाहिए। तब एएसजी केएम नटराज ने कहा कि एक विभाग ने किया है। हम इसके विशेषज्ञ नहीं हैं। तब कोर्ट ने कहा कि आज के आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के दौर में 98 फीसदी सही होने की गुंजाइश है। तब सिब्बल ने कहा कि हिरासत में लेने वाल ने उस पर भरोसा किया है जिसका अस्तित्व ही नहीं है।
सुनवाई के दौरान हल्के फुल्के अंदाज में कोर्ट ने कहा कि हमने वो भी सुना जो उन्होंने कहा ही नहीं। इस पर सिब्बल ने कहा कि और जो हम कह रहे हैं उन्होंने सुना ही नहीं। तब कोर्ट ने कहा कि हम सुन रहे हैं ना। इस पर सिब्बल ने कहा कि तभी तो हम यहां आये हुए हैं।बता दें कि केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि उन्हें गिरफ्तार करने के बाद लद्दाख में हिंसा थम गई। केएम नटराज ने कहा था कि सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद लद्दाख में हिंसा खत्म हो गई थी। हिंसा का खत्म होना ही बताता है कि उनकी गिरफ्तारी सही थी।
8 जनवरी को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चौरी चौरा कांड का जिक्र करते हुए कहा था कि हिंसा के बाद सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल तत्काल वापस ले लिया था। आपको याद होगा कि गांधीजी ने भी ऐसा ही किया था। जब चौरी चौरा की घटना के बाद हिंसा हुई थी, तो उन्होंने भी बिल्कुल वैसा ही किया था। सिब्बल ने कहा कि हिरासत में लेने के 28 दिन बाद उनको हिरासत में लेने के आधार बताए गए जो कानूनी समय-सीमा का साफ उल्लंघन है। सिब्बल ने कहा कि कानून यह है कि जिन दस्तावेजों के आधार पर हिरासत में लिया गया है अगर आरोपी को उपलब्ध नहीं किया जाता है, तो हिरासत का आदेश रद्द हो जाता है। उच्चतम न्यायालय ने अपने कई फैसलों में यह बात कही है।
रांची // रांची के कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में सोमवार रात गिरिडीह जिले के उपायुक्त रामनिवास यादव ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर श्री यादव ने मुख्यमंत्री को 20 फरवरी 2026 को गिरिडीह में आयोजित होने वाले “मरांग बुरू जुग जाहेर बाहा बोंगा 2026” समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सादर आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने उक्त आमंत्रण को स्वीकार करते हुए अपनी पूर्ण सहमति प्रदान की तथा गिरिडीह वासियों के प्रति अपनी हार्दिक शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
रांची // झारखंड उच्च न्यायालय ने हजारीबाग शहर में बढ़ती यातायात समस्या और अव्यवस्थाओं के मामलों में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने आदेश का अनुपालन न करने पर हजारीबाग के उपायुक्त (डीसी), पुलिस अधीक्षक (एसपी) और नगर आयुक्त को अवमानना नोटिस जारी किया है। सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई।
मामले में न्यायालय के 9 जनवरी के आदेश के बावजूद डीसी, एसपी और नगर आयुक्त ने व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल नहीं किया। इनके द्वारा अपने कनिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से शपथ पत्र दायर किए जाने पर अदालत ने नाराजगी जताई। खंडपीठ ने उन्हें 10 मार्च तक व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।
अधिवक्ता अच्युत स्वरूप मिश्रा ने न्यायालय को बताया कि डीसी, एसपी और नगर आयुक्त ने अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं किया और समय सीमा के भीतर शपथ पत्र दाखिल नहीं किया। अधिकारियों को हजारीबाग में सड़क पर अतिक्रमण हटाने, पार्किंग स्थलों पर कब्जा हटाने और खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों को ठीक करने के लिए व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।
अदालत ने पहले भी कहा था कि आदेशों का पालन केवल कागजों पर किया जा रहा है और जमीन पर वास्तविक सुधार नहीं दिख रहा। अब जिम्मेदारी जूनियर अधिकारियों पर नहीं छोड़ी जाएगी, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं जवाबदेही लेनी होगी।
खंडपीठ ने नोट किया था कि 2017 में लगाए गए लगभग 160 सीसीटीवी कैमरे एएमसी न होने के कारण बंद पड़े हैं। अदालत ने अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर संयुक्त बैठक कर स्थिति की समीक्षा और विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। इसके अलावा, पार्किंग स्थलों से अतिक्रमण हटाने और ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराने पर भी जोर दिया गया
पूर्वी सिंहभूम // शहर के उलीडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत शंकोसाई रोड नंबर 5 स्थित बस्ती में मागे पर्व के अंतिम दिन हरमंगेया के अवसर पर एक अनोखी और परंपरागत रस्म ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। हो समाज की सदियों पुरानी मान्यता के अनुसार दो छोटे बच्चों का प्रतीकात्मक विवाह कुतिया से कराया गया।मौके पर समाज के बुजुर्गों ने बताया कि यदि किसी बच्चे के ऊपर के दांत पहले निकल आते हैं तो इसे अशुभ संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में भविष्य में संभावित अनहोनी या दुर्घटना से बचाव के लिए यह विशेष अनुष्ठान किया जाता है। मान्यता है कि कुत्ते या कुतिया से प्रतीकात्मक विवाह कराने से अशुभ ग्रहों का प्रभाव समाप्त हो जाता है और बच्चे का जीवन सुरक्षित रहता है। यह परंपरा आज भी हो समाज के कुछ परिवारों में निभाई जाती है।
इस अवसर पर अजय हेंब्रम के चार वर्षीय पुत्र रुपेश हेंब्रम और लक्ष्मण सोय के दो वर्षीय पुत्र सूर्य सोय की अलग-अलग बारात निकाली गई। बस्ती में ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच दोनों बच्चों को पारंपरिक वेशभूषा में सजाया गया। परिजन और ग्रामीण नाचते-गाते हुए बारात में शामिल हुए, जिससे माहौल उत्सवमय बन गया। विवाह से पूर्व समधी मिलन, मंगनी, हल्दी, पांव पूजा जैसी सभी पारंपरिक रस्में पूरी की गईं। महिलाओं ने मंगलगीत गाए और बुजुर्गों ने विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न कराई। इसके बाद साड़ पेड़ के नीचे विवाह की मुख्य रस्म अदा की गई। समाज की मान्यता है कि साड़ पेड़ में विशेष आध्यात्मिक शक्ति होती है और उसके नीचे संपन्न विवाह से बच्चों का ग्रह दोष पेड़ अपने ऊपर ले लेता है, जिससे दोष समाप्त हो जाता है।
श्रीनगर // पहलगाम हमले के बाद बंद किये गए 14 पर्यटन स्थल सोमवार को व्यापक सुरक्षा समीक्षा के बाद फिर से खोलने का फैसला लिया गया है। उपराज्यपाल ने कहा कि गहन सुरक्षा समीक्षा और चर्चा के बाद मैंने कश्मीर और जम्मू डिवीजनों में और अधिक पर्यटन स्थलों को फिर से खोलने का आदेश दिया है जिन्हें एहतियाती उपाय के तौर पर अस्थायी रूप से बंद किया गया था।
जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के अनुसार एहतियाती उपाय के तौर पर अस्थायी रूप से बंद किए गए पर्यटन स्थलों को तत्काल प्रभाव से फिर से खोला जाएगा। उनके अनुसार कश्मीर डिवीजन के 11 पर्यटन स्थलों बडगाम में यूसमर्ग, दूधपथरी, कोकरनाग में दांडीपोरा पार्क, शोपियां में पीर की गली, दुबजान और पदपावन, श्रीनगर में अस्तनपोरा, ट्यूलिप गार्डन, थजवास ग्लेशियर, गांदरबल में हंग पार्क और बारामूला में वुलर/वाटलैब को तत्काल फिर से खोला जाएगा।इसके अलावा जम्मू डिवीजन के 3 पर्यटन स्थल रियासी में देवी पिंडी, रामबन में महू मंगत और किश्तवाड में मुगल मैदान तुरंत खोले जाएंगे। कश्मीर डिवीजन के 3 स्थल गुरेज, अथवाटू और बंगस और जम्मू डिवीजन का 1 स्थल रामबन में रामकुंड बर्फ पिघलने के बाद फिर से खोले जाएंगे। इन स्थलों के फिर से खुलने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और उम्मीद है कि ये स्थल बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करेंगे।
खैरथल-तिजारा // राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के खुशखेड़ा-भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार सुबह एक केमिकल फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट और आगजनी की घटना में सात मजदूरों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली (एम्स) रेफर किया गया है। हादसे के बाद फैक्टरी को सील कर दिया गया है और अवैध गतिविधियों के संबंध में जांच तेज कर दी गई है।
विपक्ष ने उठाए सवाल, मंत्री बोले– दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
यह हादसा सोमवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे खुशखेड़ा के कारोली औद्योगिक क्षेत्र में हुआ। उस समय फैक्टरी में लगभग 25 मजदूर कार्यरत थे। अचानक हुए तेज धमाके के बाद आग ने पूरी यूनिट को अपनी चपेट में ले लिया। विस्फोट इतना भीषण था कि सात मजदूर जिंदा जल गए। कई शव बुरी तरह जल चुके थे और घटनास्थल पर शरीर के अंगों के टुकड़े बिखरे मिले, जिन्हें रेस्क्यू टीम ने पॉलीथीन में एकत्र किया। मृतकों की शिनाख्त डीएनए जांच से कराई जा रही है।प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संबंधित फैक्टरी में अवैध रूप से पटाखों का निर्माण किया जा रहा था। मौके से बारूद, तैयार पटाखे और पैकिंग सामग्री बरामद हुई है।
वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने घटनास्थल का निरीक्षण कर कहा कि यह गारमेंट जोन है, यहां दूसरा व्यवसाय नहीं हो सकता। प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि गेट पर ताले लगाकर गैरकानूनी तरीके से पटाखे बनाने का कार्य किया जा रहा था। राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि मृतकों की पहचान डीएनए से कराई जा रही है। इस दुखद घटना की गहन जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता दी जाएगी। मंत्री अस्पताल भी पहुंचे और घायलों की स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने पुलिस थाने में मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया।
खैरथल-तिजारा जिला कलेक्टर डॉ. अर्तिका शुक्ला ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह छोटा एक्सप्लोसिव मटेरियल प्रतीत हो रहा है और गैस रिसाव की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने आगामी सात दिनों में पूरे औद्योगिक क्षेत्र की सभी इकाइयों की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान संचालित गतिविधियों, अग्नि सुरक्षा उपायों, वैधानिक अनुमतियों और श्रमिक सुरक्षा मानकों की गहन समीक्षा की जाएगी। नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार पूरे घटनाक्रम की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की है और रीको सहित संबंधित विभागों को सघन निरीक्षण के निर्देश दिए हैं।
इस बीच राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने घटना को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद और चिंताजनक घटना है, जिसने सरकार के सुशासन और बेहतर कानून व्यवस्था के दावों की पोल खोल दी है। जूली ने आरोप लगाया कि समय पर सूचना और राहत नहीं पहुंचने से हताहतों की संख्या बढ़ी। उन्होंने कहा कि भिवाड़ी प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में से एक है, जहां से सरकार को भारी राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में सुरक्षा मानकों, निगरानी और अनुमति प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि वहां विस्फोटक सामग्री संग्रहीत की जा रही थी। ऐसे में किन विभागों ने अनुमति दी? कौन-कौन से विभाग नियमित जांच के लिए जाते हैं और मॉनिटरिंग की क्या व्यवस्था थी? सरकार को इन सभी बिंदुओं पर जवाब देना चाहिए। हि.स.
नई दिल्ली // राऊज एवेन्यू कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब के केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जुड़े मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और राबड़ी देवी के खिलाफ औपचारिक रुप से आरोप तय कर दिया है। साेमवार काे कोर्ट में पेश होकर दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों ने आरोपों से इनकार करते हुए ट्रायल का सामना करने की बात की। स्पेशल जज विशाल गोगने ने इस मामले में 9 मार्च से रोजाना सुनवाई करने का आदेश दिया।
सीबीआई ने कहा था कि इस मामले में 103 आरोपित हैं, जिसमें से पांच की मौत हो चुकी है। इससे पहले कोर्ट 4 दिसंबर और 10 नवंबर, 2025 को किसी न किसी वजह से फैसला टाल चुका था। कोर्ट ने सीबीआई के मामले में आरोप तय करने पर 25 अगस्त, 2025 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले की आरोपित राबड़ी देवी ने प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज के समक्ष याचिका दायर करके जज विशाल गोगने की कोर्ट से दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की थी। प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज दिनेश भट्ट ने 19 दिसंबर को राबड़ी देवी की याचिका खारिज कर दी थी।
उच्चतम न्यायालय ने 18 जुलाई, 2025 को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। 7 अक्टूबर, 2022 को लैंड फॉर जॉब मामले में सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। ट्रायल कोर्ट ने 25 फरवरी, 2025 को सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था।
नई दिल्ली// दिल्ली उच्च न्यायालय ने चेक बाउंस के मामले में जेल में बंद बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को एक लाख के मुचलके पर 18 मार्च तक की अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को करने का आदेश दिया।
आज सुबह जब सुनवाई शुरु हुई, ताे कोर्ट ने कहा कि जब राजपाल यादव दोपहर तीन बजे तक पैसे जमा करेंगे, तो उनकी जमानत पर विचार किया जाएगा। दोपहर तीन बजे कोर्ट को बताया गया कि इस मामले के शिकायतकर्ता मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के खाते में डेढ़ करोड़ रुपये जमा कर दिए गए हैं। उसके बाद कोर्ट ने राजपाल यादव को एक लाख के मुचलके पर जमानत पर 18 मार्च तक रिहा करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान 12 फरवरी को कोर्ट ने राजपाल यादव के व्यवहार पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालयमें भी चुनौती दी गई थी लेकिन कोई राहत नहीं मिली। इसके पहले 5 फरवरी को उच्च न्यायालय ने राजपाल यादव को कोई भी राहत देने से इनकार करते हुए तुरंत सरेंडर करने को कहा था जिसके बाद राजपाल यादव ने जेल में सरेंडर कर दिया था।
राजपाल यादव को कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस के एक मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। हालांकि, जून 2024 में उच्च न्यायालय ने सजा को निलंबित कर दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि राजपाल यादव आदतन अपराधी नहीं हैं इसलिए उनकी सजा निलंबित की जाती है। दरअसल, कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस केस में दोषी करार देने के बाद राजपाल यादव पर 1.60 करोड़ का जुर्माना लगाया था। कड़कड़डूमा कोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव की पत्नी राधा पर भी 10 लाख रुपये प्रति केस जुर्माना लगाया था। दोनों को चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में यह सजा सुनाई गई थी।
शिकायतकर्ता मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड ने कोर्ट को बताया था कि राजपाल ने अप्रैल, 2010 में फिल्म अता पता लापता पूरी करने के लिए कंपनी से मदद मांगी थी। 30 मई, 2010 में दोनों के बीच करार हुआ और उन्होंने राजपाल यादव की कंपनी को 5 करोड़ का लोन दे दिया। करार के मुताबिक राजपाल को ब्याज सहित 8 करोड़ लौटाने थे। लेकिन वह पहली बार ये रकम नहीं लौटा सके। उसके बाद दोनों के बीच तीन बार करार का रिनिवल हुआ। 9 अगस्त, 2012 को वह अंतिम करार में आरोपित राजपाल यादव ने शिकायतकर्ता को 11 करोड़ 10 लाख 60 हजार 350 रुपए लौट आने की सहमति भी थी। राजपाल यादव की कंपनी यह भी पैसा देने में नाकाम रही।
अपने बचाव में राजपाल यादव ने कोर्ट को बताया था कि उन्होंने मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड से कोई उधार नहीं लिया था। राजपाल यादव के मुताबिक मुरली प्रोजेक्ट की कंपनी में पैसा निवेश किया था, लेकिन कड़कड़डूमा कोर्ट ने उनकी दलील को अस्वीकार करते हुए उन्हें चेक बाउंस का दोषी पाया था।
मीरजापुर // गलती से अनजान खाते में भेजी गई रकम को वापस दिलाकर अहरौरा थाना की साइबर टीम ने सराहनीय पहल की है। पीड़ित के खाते से ट्रांसफर हुए एक लाख चार हजार रुपये में से 70 हजार 729 रुपये वापस कराए हैं।सोनपुर निवासी अनिल कुमार पांडेय ने 24 जनवरी को थाना अहरौरा की साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनसे ऑनलाइन लेनदेन के दौरान गलती से बड़ी रकम अज्ञात व्यक्ति के खाते में चली गई। शिकायत एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज कर जांच शुरू की गई। साइबर टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंकिंग चैनलों से समन्वय कर 70,729 रुपये पीड़ित के खाते में वापस कराए। रकम वापस मिलने पर सोमवार को अनिल कुमार पांडेय ने थाने पहुंचकर पुलिस टीम का आभार जताया। इस दौरान उन्हें साइबर जागरूकता के तहत ऑनलाइन ठगी से बचाव के उपाय भी बताए गए। कार्रवाई में थानाध्यक्ष अजय मिश्र, हेड कांस्टेबल नरेंद्र सिंह, कांस्टेबल पवन गुप्ता व महिला कांस्टेबल महिमा उपाध्याय की अहम भूमिका रही। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी साइबर ठगी की सूचना तत्काल 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में दें।
सुदीप्तो सेन एक बार फिर चर्चा में हैं। ‘द केरल स्टोरी’ के बाद अब उनकी आगामी फिल्म ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ का टीज़र जारी कर दिया गया है। टीज़र के साथ फिल्म का नया पोस्टर और रिलीज डेट भी सामने आई है। यह फिल्म भारत के ग्रामीण इलाकों में फैले अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और रूढ़िवादी मान्यताओं की पृष्ठभूमि पर आधारित है। करीब 52 सेकंड के इस टीज़र में पुरानी धार्मिक प्रथाओं और नैतिक दुविधाओं की तीखी झलक दिखाई गई है। एक ओर आस्था और भक्ति का भाव है, तो दूसरी ओर मनोकामनाएं पूरी करने के लिए छल, कपट और गलत विश्वासों का सहारा लेते लोगों का चित्रण भी नजर आता है। कम समय में ही टीज़र कई सवाल खड़े करता है और दर्शकों में जिज्ञासा पैदा करने में सफल रहा है।फिल्म का निर्देशन शीलादित्य मौलिक ने किया है। निर्माताओं के अनुसार, ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ‘ 6 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। सामाजिक मुद्दों को उठाने वाली इस फिल्म से एक बार फिर गंभीर बहस छिड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
नई दिल्ली // कांग्रेस ने भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते से देश के किसानों और जैविक विविधता पर सीधा खतरा बताया। पार्टी ने कहा कि खेती, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार की शर्तें, ये तीन सबसे अहम मुद्दे हैं, जिन पर सरकार ने देशहित को दांव पर लगा दिया है। कांग्रेस महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में कहा कि छह फरवरी को जारी हुई रूपरेखा अंतरिम समझौते के पहले ही बिंदु में यह तय किया गया है कि भारत अमेरिका से खाद्य और कृषि उत्पादों का आयात बिना किसी शुल्क के करेगा।
भारत से निर्यात पर 18 प्रतिशत शुल्क लगेगा
यह भारतीय किसानों की आजीविका पर सीधा हमला है। अमेरिका से बिना आयात कर के मक्का, ज्वार और सोयाबीन ऑयल आयात होने पर भारत के किसानों को भारी नुकसान होगा। भारत में मक्का, ज्वार और सोयाबीन का बड़ा उत्पादन होता है, लेकिन अमेरिका इन फसलों का कहीं अधिक उत्पादन करता है और भारत जैसे बड़े बाजार की तलाश में है। अगर अमेरिकी उत्पाद बिना शुल्क भारत में बिकेंगे तो भारतीय किसानों का क्या होगा? उन्होंने कहा कि अमेरिका ने बांग्लादेश के साथ कपास को लेकर समझौता किया है, जिसके तहत अमेरिकी कपास और धागे से बने कपड़े पर अमेरिका में शून्य शुल्क लगेगा, जबकि भारत से निर्यात पर 18 प्रतिशत शुल्क लगेगा। सरकार ने भी अमेरिका से कपास आयात का दरवाजा खोल दिया है।
भारतीय किसानों और उद्योगों पर दोहरी मार पड़ेगी….
भारत ने 2024-25 में ही अमेरिका से 3,428 करोड़ रुपये का कपास आयात कर लिया, जबकि भारत खुद कपास उत्पादन में सक्षम है। अगर यह आंकड़ा बढ़कर 20 हजार करोड़ रुपये हो गया तो भारतीय कपास किसानों का क्या होगा। इस समझौते से तिरुपुर, सूरत, पानीपत और लुधियाना जैसे वस्त्र उद्योग केंद्रों पर सीधा असर पड़ेगा। भारत से बांग्लादेश को सालाना 24,550 करोड़ रुपये का कपास और धागा निर्यात होता है, लेकिन अब बांग्लादेश अमेरिका से आयात करेगा, जिससे भारतीय किसानों और उद्योगों पर दोहरी मार पड़ेगी।उन्होंने कहा कि समझौते में अतिरिक्त समानों का उल्लेख है, जिसका मतलब है कि खाद्य और कृषि उत्पादों के अलावा भी अमेरिका से अन्य सामान आयात होंगे। इसमें सेब, संतरा, चेरी, नाशपाती और स्ट्रॉबेरी जैसे फल हैं, जिससे भारतीय फल उत्पादक किसानों को नुकसान होगा।
सुरजेवाला ने कहा कि भारत अब तक जीएम फसलों के आयात की अनुमति नहीं देता था क्योंकि इससे बीज शुद्धता और जैविक विविधता पर असर पड़ता है, लेकिन इस समझौते के बाद प्रसंस्कृत मक्का, ज्वार, सोयाबीन और अन्य उत्पादों के आयात से भारत की जैविक विविधता पर गंभीर खतरा होगा। उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते में गैर-व्यापार अवरोध हटाने का मतलब किसानों की सब्सिडी कम करना और जीएम फसलों को मंजूरी देना है। अमेरिका अपने किसानों को सालाना 1.45 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी देता है, जबकि भारत में प्रति किसान परिवार को केवल 6 हजार रुपये मिलते हैं। इसके बावजूद मोदी सरकार ने अमेरिका की शर्तें मान लीं।
पलामू // पलामू जिले के पांकी प्रखंड अंतर्गत द्वारिका पंचायत के रघुआखाड़ गांव में महाशिवरात्रि मेले के दौरान गोलगप्पा खाने के बाद 20 बच्चे बीमार पड़ गए। सभी बीमार बच्चों में उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन के लक्षण पाए गए हैं। फिलहाल सभी प्रभावित बच्चों का इलाज पांकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है और उनकी स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
महाशिवरात्रि के अवसर पर रघुआखाड़ गांव में मेले का आयोजन किया गया था, जिसमें द्वारिका गांव के यादव टोला, जमुआटांड़ सहित आसपास के कई टोलों के लोग शामिल हुए थे। मेले में पहुंचे बच्चों ने गोलगप्पा खाया था। इसके बाद रविवार रात से ही बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी और सोमवार सुबह तक कई बच्चों में गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने तुरंत पांकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को जानकारी दी। स्वास्थ्य विभाग की टीम एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंची और बीमार बच्चों को तुरंत स्वास्थ्य केंद्र लाकर इलाज शुरू किया गया।
प्रभावित गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है।द्वारिका निवासी ध्रुव कुमार गुप्ता ने बताया कि उनके बेटे ने भी मेले में गोलगप्पा खाया था, जिसके बाद उसकी तबीयत खराब हो गई। उनका बेटा फिलहाल स्थानीय स्तर पर इलाज करा रहा है।पांकी के चिकित्सा प्रभारी डॉ. महेंद्र प्रसाद ने बताया कि सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम और एंबुलेंस गांव भेजी गई थी। वहीं जिले के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गांव में करीब 100 बच्चों की जांच की गई, जिनमें से 20 बच्चे बीमार पाए गए। सभी बच्चों का इलाज किया जा रहा है और स्थिति नियंत्रण में है।
स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात के तौर पर गांव में निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से साफ-सफाई बनाए रखने तथा मेले या सार्वजनिक स्थानों पर खाने-पीने में सावधानी बरतने की अपील की है।इधर, बच्चों के बीमार पड़ने की सूचना मिलने के बाद पांकी विधायक डॉ. शशि भूषण मेहता के जिला प्रतिनिधि सह नीलाम्बर पितांबरपुर भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रकाश मेहता ने पांकी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर बच्चों को स्थिति की जानकारी ली। मौके पर समाजसेवी सुनील गुप्ता, मंडल अध्यक्ष रौशन सिंह भी मौजूद थे।