देवघर // संथाल परगना चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, देवघर ने 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के व्यापारिक UPI (P2M) लेन-देन पर 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) लागू किए जाने के निर्णय पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार एवं NPCI से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
चैंबर अध्यक्ष गोपाल कृष्ण शर्मा एवं महासचिव निरंजन कुमार सिंह ने कहा
UPI देश के व्यापार एवं डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। ऐसे में व्यापारियों पर किसी भी प्रकार की अतिरिक्त भार लेन-देन पर लागू करना विशेषकर छोटे एवं मध्यम व्यवसायों के लिए चिंता का विषय है।*चैंबर ने कहा कि भले ही MDR सीधे ग्राहक से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है, लेकिन इसका भार व्यापारियों की व्यावसायिक लागत, लाभ एवं डिजिटल भुगतान को अपनाने की प्रवृत्ति को प्रभावित कर सकता है।
सरकार के अनुसार ₹2,000 तक के भुगतान तथा पात्र छोटे व्यापारियों के लेन-देन पर MDR नहीं लगेगा, जबकि निर्धारित श्रेणी के ₹2,000 से अधिक के P2M लेन-देन पर 0.4% MDR लागू होगा।चैंबर ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि UPI को देश की डिजिटल भुगतान व्यवस्था का कम-लागत एवं व्यापार-अनुकूल माध्यम बनाए रखने के लिए MDR व्यवस्था की पुनः समीक्षा की जाए तथा व्यापारिक संगठनों से व्यापक परामर्श के बाद ही आगे की व्यवस्था लागू की जाए।
चैंबर ने स्पष्ट किया कि वह डिजिटल भुगतान एवं UPI के विस्तार का पूर्ण समर्थन करता है, लेकिन डिजिटल व्यापार को प्रोत्साहित करने वाली व्यवस्था व्यापारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ का कारण नहीं बननी चाहिए।
