देवघर में आयोजित राज्य स्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तिकरण शिविर में बोले भारत के मुख्य न्यायाधीश; 1,880 लाभुकों के बीच 14.46 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों एवं योजनाओं का लाभ वितरित
देवघर, 02 नवंबर। सिविल कोर्ट परिसर, देवघर में सोमवार को झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा), रांची के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, देवघर एवं जिला प्रशासन के संयुक्त सहयोग से राज्य स्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तिकरण शिविर का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने झारखंड में संचालित ‘प्रोजेक्ट शिशु’ की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की जनकल्याणकारी योजनाओं को पूरे भारतवर्ष में लागू करने की आवश्यकता है, ताकि अनाथ एवं जरूरतमंद बच्चों को संरक्षण, शिक्षा और बेहतर भविष्य मिल सके।

कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति चंद्रशेखर एवं न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह, झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित रहे। भारत के मुख्य न्यायाधीश की धर्मपत्नी श्रीमती सविता वशिष्ठ की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा- जरूरतमंदों तक खुद पहुंचे विधिक सेवा संस्थाएं
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय का वास्तविक अर्थ केवल न्यायालय तक पहुंचना नहीं, बल्कि आम नागरिक को उसके अधिकारों का वास्तविक लाभ मिलना है। किसी वृद्ध महिला को रुकी हुई पेंशन मिलना, श्रमिक को उसकी मेहनत की मजदूरी प्राप्त होना, किसी बच्चे को शिक्षा जारी रखने का अवसर मिलना तथा पीड़ित परिवार को समय पर सहायता उपलब्ध होना भी न्याय की सार्थक अभिव्यक्ति है।

उन्होंने विधिक सेवा संस्थाओं से आग्रह किया कि वे जरूरतमंद लोगों तक स्वयं पहुंचें और उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनें। उन्होंने सैनिकों एवं उनके परिवारों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘NALSA वीर परिवार सहायता योजना’ तथा लंबित विवादों के आपसी सहमति से समाधान के लिए संचालित ‘मीडिएशन फॉर द नेशन’ अभियान का भी उल्लेख किया।
मुख्य न्यायाधीश ने झारखंड की सामाजिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्थानीय भाषाओं के माध्यम से विधिक जागरूकता फैलाने पर जोर दिया। उन्होंने पारा विधिक स्वयंसेवकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। साथ ही प्रोजेक्ट शिशु के तहत बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा एवं संरक्षण सुनिश्चित करने और लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ लगातार उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि शिविर की सफलता का आकलन केवल लाभ वितरण के आंकड़ों से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि कितने जरूरतमंद लोगों की समस्याओं का वास्तविक समाधान हुआ। इसके लिए लंबित आवेदनों की नियमित समीक्षा, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही और लाभार्थियों को उनके आवेदन की स्थिति की जानकारी देना जरूरी है।
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा- अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे न्याय और सरकारी योजनाओं का लाभ
स्वागत एवं उद्घाटन संबोधन में झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, कार्यकारी अध्यक्ष, झालसा ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस राज्य स्तरीय शिविर का मुख्य उद्देश्य विधिक अधिकारों की जानकारी को वास्तविक सहायता एवं सरकारी योजनाओं के लाभ से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक न्याय और सहायता पहुंचाना आवश्यक है। कोई भी व्यक्ति केवल जानकारी, आवश्यक दस्तावेज या उचित मार्गदर्शन के अभाव में अपने अधिकारों से वंचित नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने पलामू एवं रांची में विधिक सहायता क्लिनिकों के उद्घाटन, पीड़ितों को सहायता, प्रोजेक्ट शिशु तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ वितरण को महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने जानकारी दी कि इस शिविर के माध्यम से 10 हजार से अधिक लाभार्थियों को NALSA, झालसा एवं विभिन्न सरकारी विभागों की योजनाओं से लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है।
न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ने ‘मीडिएशन फॉर द नेशन’ और वीर परिवार सहायता योजना की सराहना की
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ने अपने संबोधन में ‘मीडिएशन फॉर द नेशन’ अभियान एवं ‘NALSA वीर परिवार सहायता योजना’ सहित विभिन्न विधिक सहायता कार्यक्रमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं और अभियानों के माध्यम से हजारों जरूरतमंद लोगों को विधिक सहायता एवं राहत प्राप्त हुई है।

उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों को आम नागरिकों तक न्याय की पहुंच आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने प्रोजेक्ट शिशु को बताया महत्वपूर्ण पहल
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने झारखंड में बच्चों के संरक्षण एवं उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में संचालित ‘प्रोजेक्ट शिशु’ की विशेष रूप से सराहना की।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से झारखंड के अनाथ एवं जरूरतमंद बच्चों को विधिक सहायता तथा आवश्यक संरक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, बेहतर भविष्य और समुचित देखभाल सुनिश्चित करने में विधिक सेवा संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के देवघर आगमन एवं कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति के लिए आभार भी व्यक्त किया।
पलामू और रांची में विधिक सहायता क्लिनिक का वर्चुअल उद्घाटन
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने कर-कमलों से वर्चुअल माध्यम के जरिए पलामू स्थित भीष्म नारायण सिंह विधि महाविद्यालय तथा रांची स्थित सरला बिरला विश्वविद्यालय में स्थापित विधिक सहायता क्लिनिक (Legal Aid Clinic) का विधिवत उद्घाटन किया।
इन क्लिनिकों के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को विधिक जानकारी, मार्गदर्शन एवं सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।
1,880 लाभुकों के बीच 14 करोड़ 46 लाख 90 हजार रुपये की परिसंपत्तियों का वितरण
शिविर में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सूर्यकांत एवं मंचासीन अन्य न्यायमूर्तियों के कर-कमलों से विभिन्न सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत चयनित पात्र लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों एवं योजनाओं का लाभ वितरित किया गया।
इस दौरान कुल 1,880 लाभुकों के बीच 1,446.90 लाख रुपये अर्थात 14 करोड़ 46 लाख 90 हजार रुपये की राशि विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत वितरित की गई।
इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के लाभुकों एवं पीड़ितों को चेक के माध्यम से सहायता राशि और प्रतिकर राशि भी प्रदान की गई। इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंदों एवं वंचितों को आर्थिक संबल प्रदान करने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।

विशेष रूप से पीड़ितों को प्रतिकर राशि उपलब्ध कराना न्याय एवं पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।
न्यायपालिका, झालसा और जिला प्रशासन के समन्वय से आयोजित हुआ शिविर
इस राज्य स्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तिकरण शिविर का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना, जरूरतमंदों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाना था।

शिविर के माध्यम से आम नागरिकों को उनके विधिक अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम ने न्यायपालिका, विधिक सेवा प्राधिकार और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की मिसाल पेश की। कार्यक्रम के अंत में झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
