झारखंड की आवाज

Victim complains to SP about illegal extortion racket carried out under the guise of vehicle checks.

वाहन चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली का धंधा पीड़ित ने एसपी से की शिकायत

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कौन है प्रियंका और कौशल किशोर जिसके खाते में भेजे गए 1000 रूपए

देवघर। Bkd News Jharkhand।

झारखंड के देवघर जिले में पुलिस और कथित पत्रकारों के बीच सांठ-गांठ से चल रहे अवैध वसूली के एक बड़े खेल का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। वाहन चेकिंग के नाम पर आम जनता को प्रताड़ित करने और जबरन ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कराने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित ने सीधे देवघर के पुलिस अधीक्षक को लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है और अवैध वसूली में शामिल दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, दुमका जिले के जामा प्रखंड के महारो निवासी सामाजिक कार्यकर्ता राजू पुजहर ने देवघर एसपी को सौंपे पत्र में कुंडा थाना पुलिस और ट्रैफिक पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने शिकायत के साथ अवैध रूप से ट्रांसफर किए गए पैसों के डिजिटल स्क्रीनशॉट की छायाप्रति भी साक्ष्य के तौर पर एसपी को सौंपी है।

क्या है पूरा मामला ?

घटना सोमवार, 13 जुलाई 2026 की दोपहर लगभग 3:01 बजे की है। पीड़ित राजू पुजहर एम्स से कुंडा चौक होते हुए अपने मोटरसाइकिल से वापस घर लौट रहे थे। उनके साथ बाइक पर हैदर अली नामक एक व्यक्ति भी सवार था, जिसने हेलमेट नहीं पहना था। पीड़ित ने बताया कि हैदर अली एम्स में भर्ती अपने एक गंभीर रूप से बीमार दोस्त को एम्बुलेंस से पटना विदा करने आया था और वहां अकेला छूट गया था। इसी मजबूरी में राजू उसे लिफ्ट देकर घर छोड़ रहे थे।

कुंडा थाना के समीप ‘छोटा बाबू’ और ट्रैफिक पुलिस बल द्वारा सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। हेलमेट न होने के कारण पुलिस ने राजू को रोक लिया। राजू ने पुलिसकर्मियों को मरीज की बीमारी, दवाओं के पर्चे और मजबूरी का पूरा हवाला दिया, लेकिन पुलिसकर्मी कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुए।

जब रसीद काटने के बदले मांगी गई रिश्वत

शिकायत के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने पीड़ित राजू से सीधे पांच हजार रुपये की मांग की। जब सामाजिक कार्यकर्ता राजू पुजहर ने असमर्थता जताते हुए कानूनी रूप से चालान काटने की बात कही, तो पुलिसकर्मी बिफर गए। बाद में मामला 1,000 रुपये के लेन-देन पर आकर अटका।

पीड़ित ने जब खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताते हुए रियायत देने की बात कही, तो ड्यूटी पर तैनात एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने बेहद चौंकाने वाला बयान दिया। आरोपी पुलिसकर्मी ने कहा: “हम लोगों के ऊपर भी बड़े पदाधिकारी बैठे हैं। उनसे मोटी रकम देकर हमें इस थाने में पोस्टिंग मिली है, तो हम आपको ऐसे कैसे छोड़ दें? हमें भी ऊपर तक पैसा पहुंचाना पड़ता है।”

कौन हैं प्रियंका और कौशल कुमार ! डिजिटल ट्रांसफर का खुला खेल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब वहां मौजूद सिविल ड्रेस (सादे कपड़ों) में एक व्यक्ति सामने आया, जिसे कथित तौर पर पत्रकार और पुलिस का द लाल बताया जा रहा है। उसी व्यक्ति ने अपने मोबाइल से एक क्यूआर कोड/नंबर दिया और पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर करने का दबाव बनाया।

पीड़ित राजू ने बताया कि उनके पास नकद पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने विवश होकर उक्त सिविल ड्रेस वाले व्यक्ति के कहने पर ‘प्रियंका कुमारी’ और ‘कौशल कुमार’ नामक बैंक खातों में ₹1,000 का ऑनलाइन भुगतान कर दिया। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ये प्रियंका कुमारी और कौशल कुमार कौन हैं, जिनके खातों का इस्तेमाल पुलिस की अवैध वसूली की रकम को ठिकाने लगाने या उसे आपस में बांटने के लिए किया जा रहा है? क्या यह किसी बड़े संगठित रैकेट का हिस्सा है?

कथित पत्रकारों और पुलिस की सांठ-गांठ पर उठे सवाल

क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि वाहन चेकिंग स्थलों पर कुछ सफेदपोश और कथित पत्रकार दिन-भर मंडराते रहते हैं। पुलिस अधिकारियों के साथ इनकी नजदीकी जगजाहिर है। सूत्र बताते हैं कि ये कथित पत्रकार आम लोगों को डराने-धमकाने और मामला रफा-दफा करने के एवज में बिचौलिये की भूमिका निभाते हैं और कमीशन का एक बड़ा हिस्सा खुद डकार जाते हैं। देवघर की इस घटना ने इस गठजोड़ को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है।

जांच के घेरे में कुंडा पुलिस, एसपी से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद

अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के इस खुले खेल ने देवघर पुलिस की छवि पर गहरा बट्टा लगाया है। पीड़ित राजू पुजहर ने देवघर पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि पुलिस विभाग में बैठे काली भेड़ और उनके दलालों को बेनकाब किया जा सके। मामले में ऑनलाइन ट्रांजैक्शन आईडी और स्क्रीनशॉट जैसे पुख्ता सबूत होने के कारण अब कुंडा थाना के दोषी पुलिसकर्मियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

अब देखना होगा कि देवघर एसपी इस गंभीर शिकायत पर क्या कड़ा रुख अपनाते हैं और आम जनता को इस अवैध वसूली के आतंक से कब तक मुक्ति मिलती है।

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