पटना। मोकामा के जदयू विधायक अनंत सिंह से जुड़े दुलारचंद यादव हत्याकांड में एक बार फिर नीरज कुमार चर्चा में हैं। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद यह सवाल उठने लगा है कि आखिर कौन हैं नीरज, जिनकी याचिका पर अनंत सिंह को सरेंडर करने का निर्देश दिया गया है?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर याचिका दाखिल करने वाले नीरज कुमार दिवंगत दुलारचंद यादव के पोते हैं। उनका नाम जदयू के नवनिर्वाचित एमएलसी नीरज कुमार से जोड़कर भी देखा जा रहा था, लेकिन दोनों अलग-अलग व्यक्ति हैं।
दादा की शवयात्रा के दौरान आए थे चर्चा में
दुलारचंद यादव की हत्या के बाद उनकी शवयात्रा के दौरान एक युवक ट्रैक्टर पर बैठा दिखाई दिया था। बताया जाता है कि वह युवक दुलारचंद यादव का पोता नीरज था। उस समय उसने अपने परिवार की ओर से यह संकल्प जताया था कि जब तक दादा की हत्या के आरोपितों को जेल नहीं भेजा जाएगा, तब तक तेरहवीं का कार्यक्रम नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में जमानत को दी चुनौती
दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनके पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने जमानत के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की थी। इसी मामले में सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह को एक दिसंबर तक सरेंडर करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की जांच निर्धारित समयसीमा में पूरी करने का भी निर्देश दिया है।
अनंत सिंह ने दी अपनी प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अनंत सिंह की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को मीडिया से बातचीत में उन्होंने नीरज कुमार पर उन्हें फंसाने का आरोप लगाया। अनंत सिंह ने कई बार इसका जिक्र कर चुका है एम एल सी चुनाव में भी जदयू में रहते हुए जेडीयू के उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध किया और विरोध का कारण भी यही बताया कि नीरज मेरे खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गया है इसलिए हम विरोध कर रहे हैं , अनंत सिंह ने यह भी कहा कि उन्हें न्यायालय पर भरोसा है।
एक नाम से पैदा हुआ भ्रम
इस मामले में नीरज कुमार नाम को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले नीरज दिवंगत दुलारचंद यादव के पोते हैं, न कि जदयू के नवनिर्वाचित एमएलसी नीरज कुमार। इस अंतर को समझना जरूरी है।
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