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पटना सिविल कोर्ट ने आईजी एम. सुनील नायक की ट्रांजिट रिमांड अर्जी की खारिज -

पटना सिविल कोर्ट ने आईजी एम. सुनील नायक की ट्रांजिट रिमांड अर्जी की खारिज

पटना // राजधानी पटना की सिविल अदालत में सोमवार को हुई सुनवाई में बिहार होमगार्ड एवं अग्निशमन सेवा के महानिरीक्षक (आईजी) एम. सुनील कुमार नायक को राहत मिली है। अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-9 (एसीजेएम-9) की अदालत ने आंध्र प्रदेश पुलिस की ओर से दायर ट्रांजिट रिमांड की अर्जी को खारिज कर दिया।

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अधिकारी को राज्य से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती

अदालत ने स्पष्ट कहा कि विधिसम्मत प्रक्रिया और पर्याप्त दस्तावेजों के अभाव में किसी भी अधिकारी को राज्य से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सुनवाई के दौरान अदालत ने आंध्र प्रदेश पुलिस की तैयारी पर कड़ी नाराजगी जताई और सीधे ट्रांजिट रिमांड देने से इनकार कर दिया।

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सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ पुलिसकर्मी बिना वर्दी अदालत में उपस्थित हुए थे। इस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों को बैठा लिया। इनमें आंध्र प्रदेश पुलिस के तीन कर्मियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

2021 के कथित हिरासत प्रकरण से जुड़ा मामला

दरअसल, आईजी सुनील कुमार नायक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या के प्रयास), जो वर्तमान में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 के समकक्ष प्रावधान से संबंधित है, के तहत मामला दर्ज है। यह प्रकरण वर्ष 2021 में आंध्र प्रदेश के नरसापुरम में पूर्व सांसद रघुराम कृष्ण राजू से जुड़े कथित हिरासत मामले से संबंधित है। इसी मामले में आंध्र प्रदेश पुलिस ने पटना में कार्रवाई की थी।

सुबह आवास पर पहुंची थी आंध्र प्रदेश पुलिस की टीम

इससे पहले सोमवार सुबह आंध्र प्रदेश पुलिस की एक टीम शास्त्री नगर थाना क्षेत्र स्थित आईजी नायक के सरकारी आवास पर पहुंची। स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में आवास के भीतर जांच और पूछताछ की गई। बाद में उन्हें गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। इस दौरान आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में होमगार्ड के जवान भी मौके पर पहुंच गए और कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि नियमों की अनदेखी कर कार्रवाई की जा रही है।

फिलहाल अदालत के फैसले से आईजी नायक को राहत मिली है। हालांकि मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और आगे की कार्रवाई उच्च न्यायालय अथवा संबंधित न्यायिक मंच के निर्णय पर निर्भर करेगी।

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