नई दिल्ली // उच्चतम न्यायालय ने लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी अंजलि की ओर से गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई 10 मार्च तक टाल दिया है। जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वो होली की छुट्टियों के दौरान वांगचुक के भाषणों से संबंधित वीडियो देखेंगे। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने उच्चतम न्यायालय के आईटी रजिस्ट्रार से कहा है कि वे होली की छुट्टियों के दौरान पेन ड्राईव के वीडियो देखने का इंतजाम करें। कोर्ट ने कहा कि वो वीडियो देखने के बाद 10 मार्च को इस मामले पर सुनवाई पूरी कर लेंगे। उच्चतम न्यायालय ने 16 फरवरी को जोधपुर जेल प्रशासन को निर्देश दिया था कि वो सोनम वांगचुक को हिरासत के दौरान दी गई पेन ड्राईव सीलबंद कर कोर्ट में दाखिल करें।
हिरासत में लेने के 28 दिन बाद उनको हिरासत में लेने के आधार नहीं बताए गए
उच्चतम न्यायालय ने इस बात का संदेह जताया था कि केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक के भाषणों से संबंधित जो ट्रांसक्रिप्ट दी है उसके अनुवाद में काफी फर्क है। सुनवाई के दौरान 8 जनवरी को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चौरी-चौरा कांड का जिक्र करते हुए कहा था कि हिंसा के बाद सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल तत्काल वापस ले लिया था। आपको याद होगा कि गांधीजी ने भी ऐसा ही किया था। जब चौरी-चौरा की घटना के बाद हिंसा हुई थी, तो उन्होंने भी बिल्कुल वैसा ही किया था। कपिल सिब्बल ने कहा कि हिरासत में लेने के 28 दिन बाद उनको हिरासत में लेने के आधार नहीं बताए गए, जो कानूनी समय-सीमा का साफ उल्लंघन है। सिब्बल ने कहा कि कानून यह है कि जिन दस्तावेज के आधार पर हिरासत में लिया गया है अगर आरोपित को उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो हिरासत का आदेश रद्द हो जाता है। उच्चतम न्यायालय ने अपने कई फैसलों में यह बात कही है।
