साहिबगंज // झारखंड आंदोलन के प्रणेता, पद्म भूषण से सम्मानित एवं जननायक दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर मंगलवार को साहिबगंज के सिद्धों-कान्हु स्टेडियम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा भावनाओं, सम्मान और संकल्प का प्रतीक बन गई। इस अवसर पर उनकी आदमकद प्रतिमा का अनावरण राज्य के राजस्व, निबंधन, भूमि सुधार एवं परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने किया।
कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, झामुमो नेताओं, कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में आम लोगों ने दिशोम गुरु की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा…
श्रद्धांजलि सभा में मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि दिशोम गुरु का जीवन संघर्ष, त्याग और जनसेवा का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने झारखंड की अस्मिता, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और वंचित समाज के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनके विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
दिशोम गुरु के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए कहा….
इस अवसर पर झामुमो केंद्रीय सचिव सह प्रवक्ता पंकज मिश्रा, पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम, राजमहल विधायक मोहम्मद ताजुद्दीन उर्फ एमटी राजा, झामुमो जिलाध्यक्ष अरुण कुमार सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने दिशोम गुरु के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए कहा कि उनका संघर्ष केवल एक व्यक्ति का संघर्ष नहीं था, बल्कि झारखंड की पहचान, स्वाभिमान और सामाजिक न्याय की लड़ाई का इतिहास है।

आदमकद प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक
वक्ताओं ने कहा कि सिद्धों-कान्हु स्टेडियम में स्थापित यह आदमकद प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक है। यह प्रतिमा हर उस व्यक्ति को यह संदेश देगी कि समाज और राज्य के हित में निस्वार्थ भाव से किया गया संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता। दिशोम गुरु के आदर्श, सादगी, संघर्ष और जनसेवा की भावना आने वाले वर्षों में भी समाज का मार्गदर्शन करती रहेगी।
श्रद्धांजलि सभा का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि दिशोम गुरु स्व. शिबू सोरेन के दिखाए मार्ग पर चलते हुए सामाजिक समरसता, न्याय, विकास और झारखंड की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि उनके विचार और उनके संघर्ष की विरासत आने वाली पीढ़ियों के हृदय में सदैव जीवित रहे।
