झारखंड की आवाज

Court permission is mandatory for registration of birth or death after two years.

जन्म-मृत्यु के दो साल बाद पंजीकरण के लिए कोर्ट की अनुमति जरूरी

देवघर। जन्म और मृत्यु का समय पर पंजीकरण नहीं कराने वालों के लिए नियमों में बदलाव किया गया है। नए प्रावधान के तहत जन्म या मृत्यु की घटना के दो साल से अधिक समय बाद पंजीकरण कराने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना आवश्यक होगा।

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बताया गया है कि यह प्रावधान एक अक्टूबर 2026 से लागू होगा। वहीं जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए निर्धारित समय-सीमा के अनुसार अलग-अलग स्तर पर सत्यापन और अनुमति की व्यवस्था की गई है।

30 दिन के भीतर पंजीकरण पर सामान्य प्रक्रिया

जन्म या मृत्यु की घटना के 30 दिनों के भीतर पंजीकरण कराने पर अस्पताल अथवा संबंधित स्थानीय निकाय से सूचना और प्रमाण के आधार पर प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। 30 दिन से अधिक लेकिन एक वर्ष के भीतर पंजीकरण कराने के लिए संबंधित नगर निकाय अथवा प्रखंड स्तर पर आवेदन और निर्धारित अधिकारी की अनुमति की जरूरत होगी।

एक से दो साल के बीच पंजीकरण के लिए शपथ पत्र सहित आवेदन करना होगा और संबंधित एसडीएम से अनुमति लेनी होगी।

वहीं दो साल से अधिक पुराने मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

21 दिनों के भीतर पंजीकरण पर नियम में बदलाव नहीं

खबर के अनुसार, जन्म या मृत्यु की घटना के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। समय पर पंजीकरण होने से सरकारी रिकॉर्ड में जन्म और मृत्यु का प्रमाण सुरक्षित रहता है और भविष्य में प्रमाणपत्र से जुड़ी परेशानियों से बचा जा सकता है।

राज्य में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण के लिए झारखंड जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रेशन नियमावली, 2009 पहले से लागू है। नए प्रावधान का उद्देश्य लंबे समय से लंबित जन्म-मृत्यु पंजीकरण मामलों में सत्यापन को अधिक व्यवस्थित करना बताया गया है।

नए नियम लागू होने के बाद विलंब से पंजीकरण कराने वाले लोगों को निर्धारित प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों से अनुमति प्राप्त करनी होगी।

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