झारखंड की आवाज

60 लाख संदिग्ध मतदाता मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल में

60 लाख संदिग्धों मतदाता सूची में से सबसे अधिक मुर्शिदाबाद जिले में

कोलकाता // पश्चिम बंगाल में शनिवार शाम चुनाव आयोग ने राज्य की अंतिम मतदाता सूची जारी की। विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद सामने आए आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि राज्य में मतदाताओं की शुचिता को लेकर एक अभूतपूर्व अभियान चलाया गया। इस नई सूची के सबसे चौंकाने वाले आंकड़े ‘अंडर एडजुडिकेशन’ यानी विचाराधीन श्रेणी से निकलकर आए हैं, जिसमें राज्य के लगभग 60 लाख छह हजार 675 मतदाताओं को संदिग्ध मानते हुए उनके मतदान अधिकार को फिलहाल रोक दिया गया है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

संदिग्ध मतदाताओं का सबसे बड़ा जमावड़ा उन जिलों में है जो बांग्लादेश से सटी हुई हैं।

इन मतदाताओं की नागरिकता और दस्तावेजों की वैधता अब न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। इनका नाम मतदाता सूची में रहेगा या नहीं, इसका निर्णय उच्चतम न्यायालय के आदेश अनुसार उच्च न्यायालय की न्यायिक बेंच करेगी। इसकी सुनवाई लगातार चल रही है और दावा किया जा रहा है कि राज्य में चुनाव के ऐलान से पहले यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इस पूरी रिपोर्ट का विश्लेषण करने पर जो सबसे प्रमुख तथ्य उभरकर सामने आता है, वह है संदिग्ध मतदाताओं का भौगोलिक केंद्र। चुनाव आयोग के आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि संदिग्ध मतदाताओं का सबसे बड़ा जमावड़ा उन जिलों में है जिनकी सीमाएं सीधे तौर पर बांग्लादेश से सटी हुई हैं।

मुर्शिदाबाद जिला में 11 लाख एक हजार 145 मतदाताओं के नाम संदिग्ध पाए गए हैं।

इन इलाकों में लंबे समय से अवैध घुसपैठ और मतदाता सूचियों में हेरफेर के आरोप लगते रहे हैं। आंकड़ों के प्रवाह में देखें तो मुर्शिदाबाद जिला इस फेहरिस्त में सबसे ऊपर है, जहां अकेले 11 लाख एक हजार 145 मतदाताओं के नाम संदिग्ध पाए गए हैं। यह संख्या पूरे राज्य के संदिग्ध मामलों का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा है, जो जिला स्तर पर एक बहुत बड़ी विसंगति को दर्शाता है। यह वही जिला है जहां हिंदुओं के साथ पिछले दो सालों से लगातार हिंसा होती रही है और इस जिले में करीब 70 फ़ीसदी मुस्लिम आबादी है तथा मूल निवासी बंगाली समुदाय घटकर 30 फीसदी के करीब पहुंच गया है।

उत्तर 24 परगना में पांच लाख 91 हजार 252 मतदाता जांच के घेरे में हैं

मुर्शिदाबाद के ठीक बाद मालदा जिले की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक और संवेदनशील बनी हुई है। मालदा में आठ लाख 28 हजार 127 मतदाताओं को संदिग्ध की श्रेणी में रखा गया है। जिले की कुल आबादी और क्षेत्रफल के अनुपात में मालदा में संदिग्धों की यह संख्या राज्य में सबसे प्रभावी मानी जा रही है। इसी तरह दक्षिण बंगाल के सामरिक और सीमावर्ती महत्व वाले जिले उत्तर 24 परगना में पांच लाख 91 हजार 252 मतदाता जांच के घेरे में हैं, जबकि दक्षिण 24 परगना में भी पांच लाख 22 हजार से अधिक नामों को ‘होल्ड’ पर रखा गया है।

झाड़ग्राम में संदिग्ध मतदाताओं की संख्या मात्र छह हजार 682 है

इन चार प्रमुख सीमावर्ती जिलों मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना को मिलाकर ही कुल संदिग्धों का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा बन जाता है, जो यह संकेत देता है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी की जड़ें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब ही गहरी हैं।इसके विपरीत, जब हम राज्य के उन जिलों की ओर देखते हैं जो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से दूर या अंदरूनी इलाकों में स्थित हैं, तो वहां की तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है। उदाहरण के तौर पर झाड़ग्राम में संदिग्ध मतदाताओं की संख्या मात्र छह हजार 682 है और कलिम्पोंग जैसे पहाड़ी जिले में यह आंकड़ा महज छह हजार 790 तक ही सीमित है।

60 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच के लिए सैकड़ों न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया है।

सीमावर्ती और अंदरूनी जिलों के बीच का यह भारी अंतर उस प्रशासनिक चुनौती को उजागर करता है जिसका सामना चुनाव आयोग को सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों के कारण करना पड़ रहा है। वर्तमान में इन सभी 60 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर सैकड़ों न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया है। जब तक ये अधिकारी अपनी जांच पूरी कर हरी झंडी नहीं दे देते, तब तक इन मतदाताओं के नाम मुख्य सूची से बाहर रहेंगे और वे मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।

Leave a Reply