झारखंड की आवाज

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झारखंड विधानसभा का बजट सत्र 18 फरवरी से, सर्वदलीय बैठक आयोजन

रांची // झारखंड विधानसभा का बजट सत्र 18 फरवरी (बुधवार) से प्रारंभ होने जा रहा है। सत्र के शांतिपूर्ण और व्यवस्थित संचालन को लेकर मंगलवार को विधानसभा परिसर में अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई।

बैठक के बाद विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने बताया कि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चले, इसके लिए सभी दलों के नेताओं एवं संबंधित अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से सदन में प्रस्तुत किए जाने वाले विधेयकों, प्रतिवेदनों और अन्य कार्यों से संबंधित सामग्रियों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही लंबित प्रश्नों के उत्तर समय पर उपलब्ध कराए जाएं, इसके लिए अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

23 फरवरी को सदन की कार्यवाही स्थगित रहेगी

बैठक में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और विधि-व्यवस्था की स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया गया। अध्यक्ष ने सभी दलों से अपील की कि इन महत्वपूर्ण विषयों पर सदन में गंभीर और सार्थक चर्चा हो, ताकि जनहित से जुड़े मुद्दों का प्रभावी समाधान निकल सके। अध्यक्ष महतो ने बताया कि 23 फरवरी को झारखंड में नगर पंचायत चुनाव निर्धारित है। ऐसे में संसदीय कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में यह निर्णय लिया जाएगा कि 23 फरवरी को सदन की कार्यवाही स्थगित रखी जाए, ताकि सभी विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में चुनावी दायित्वों का निर्वहन कर सकें।

उन्होंने सभी दलों से सहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सदन का व्यवस्थित संचालन अत्यंत आवश्यक है और इसके लिए सत्ता पक्ष एवं विपक्ष दोनों की सकारात्मक भूमिका जरूरी है। सर्वदलीय बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, आजसू के प्रतिनिधि तथा कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव राजद से सुरेश पासवान सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्य उपस्थित रहे ।

हिरासत में मौत अवमानना मामले में एमआरएमसीएच का मूल रजिस्टर उच्च न्यायालय में पेश

रांची // झारखंड उच्च न्यायालय में हिरासत में कथित यातना और मौत के मामले में दायर शाईदा खातून और अन्य अवमानना याचिका की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मेदनी राय मेडिकल कॉलेज अस्पताल, पलामू (एमआरएमसीएच) के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ अजय कुमार ने अस्पताल का ओरिजिनल एडमिशन रजिस्टर कोर्ट में में प्रस्तुत किया।

उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने रजिस्टर का अवलोकन करने के बाद इसे मेडिकल सुपरिटेंडेंट को वापस सौंप दिया।

अदालत ने एडमिशन रजिस्टर के संबंधित अंश की स्कैन कॉ रिकॉर्ड रखने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से जिन दस्तावेजों पर भरोसा किया जा रहा था, वे रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं पाए गए हैं। इसपर कोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया कि वे दस्तावेज अगली सुनवाई से पहले शपथ पत्र के माध्यम से रिकॉर्ड पर लाए। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 मार्च 2026 की तिथि निर्धारित की है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि उच्चतम न्यायालय की ओर से डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (199 मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का जानबूझकर पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर अधिवक्ता शादाब इकबाल ने अदालत को बताया कि मृतक को एक मार्च 2025 को हिरासत में लिया गया था और उसी दिन कथित रूप से उसके साथ मारपीट की गई।

इसके बाद उसे 24 घंटे बाद सेंट्रल जेल, मेदिनीनगर भेजा गया और इलाज के लिए 4 मार्च 2025 को रिम्स, रांची रेफर किया गया। याचिकाकर्ताओं ने रिम्स की ओर से जारी बेड टिकट का हवाला देते हुए कहा कि मृतक को पहली बार रिम्स में डॉक्टर ने 7 मार्च 2025 को देखा था।

सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल पलामू (एमएमसीएच) के एडमिशन रजिस्टर का उल्लेख किया, जिसमें मृतक का नाम छह मार्च 2025 रात 11:10 बजे अस्पताल में दर्ज बताया गया। सरकार का कहना है कि 4 मार्च 2025 की रेफरल तारीख डॉक्टर की गलती हो सकती है।

याचिकाकर्ताओं ने एडमिशन रजिस्टर में रजिस्ट्रेशन नंबरों के क्रम में अंतर दिखाते हुए गंभीर विसंगतियां बताईं। राज्य के अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि रजिस्ट्रेशन नंबरों में अंतर का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।

उच्च न्यायालय ने पिछली सुनवाई में मामले की सच्चाई स्पष्ट करने के लिए मूल एडमिशन रजिस्टर मांगी थी। अदालत ने मेडिकल सुपरिटेंडेंट, मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज अस्पताल, पलामू व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया। साथ में अदालत ने मूल एडमिशन रजिस्टर भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

तमिलनाडु के राज्यपाल पहुंचे बासुकीनाथ धाम विधि विधान के साथ किए पूजा

दुमका // तमिलनाडु के राज्यपाल रविन्द्र नारायण रवि प्रसिद्ध तीर्थ स्थान फौजदारी दरबार बाबा बासुकीनाथ धाम पहुंचे और सपरिवार भोलेनाथ की पूजा अर्चना की। महामहिम राज्यपाल को बासुकीनाथ धाम मंदिर में उनके पुरोहितों द्वारा विधि विधान पूर्वक समस्त देवी देवताओं का पूजा अर्चना कराया गया। साथ ही जनकल्याण के लिए उन्होंने भोलेनाथ की मंगल आरती भी की। इस दौरान मंदिर की सुरक्षा चौक बंद कर दी गई थी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें मंदिर में दर्शन पूजन कराया गया। राज्यपाल के बासुकीनाथ आगमन पर वन विभाग के विश्रामागार परिसर में दुमका के उपायुक्त अभिजीत सिन्हा एवं पुलिस अधीक्षक पीतांबर सिंह खेरवार ने पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया एवं पूजा अर्चना के बाद राज्यपाल को भेंट स्वरूप बाबा का स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। पूजा अर्चना के बाद राज्यपाल वापस देवघर की ओर रवाना हो गए।

Cyber Crime। एटीएम बदलकर 77 हजार ठगी मामले में दो अभियुक्त गिरफ्तार

भागलपुर // जिले के जोगसर थाना अंतर्गत एटीएम कार्ड बदल कर 77,000 रुपया की ठगी करने वाले दो शातिर अपराधकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है। उक्त आशय की जानकारी मंगलवार को सिटी एसपी शैलेंद्र कुमार सिंह ने दी।सिटी एसपी ने बताया कि वरीय पुलिस अधीक्षक भागलपुर के निर्देशानुसार एटीएम कार्ड बदल कर पैसे की अवैध निकासी करने वाले अपराधकर्मियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार छापामारी किया किया जा रहा है।

इसी क्रम में वादी अरविन्द पासवान पिता मंचन पासवान सा०-महुआ थाना-पंजवारा जिला-बॉका के जोगसर थाना में दिये गये आवेदन के अनुसार जोगसर थानान्तर्गत मानीक सरकार चौक स्थित एसबीआई एटीएम में अज्ञात व्यक्तियों द्वारा एटीएम कार्ड बदल कर 77,000 रुपये की अवैध निकासी कर लिया गया था। इस संबंध में जोगसर थाना में सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर अनुसंधान आरंभ किया गया। कांड के त्वरित उद्भेदन एवं संलिप्त अपराधकर्मियों की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी के निर्देशन, पुलिस अधीक्षक, नगर भागलपुर के निगरानी तथा पुलिस उपाधीक्षक, नगर-01 भागलपुर के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया।

गठित टीम के द्वारा सीसीटीवी फुटेज एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कांड का सफल उद्भेदन करते हुए इस कांड में संलिप्त अपराधकर्मियों विनय कुमार सिंह एवं निवास कुमार सिंह को पूर्णिया से विधिवत् गिरफ्तार किया गया। उक्त गिरफ्तार दोनों अपराधर्मियों से इस संबंध में आवश्यक पूछ-ताछ कर विधि-सम्मत अग्रतर कार्रवाई की जा रही है। उक्त अपराधियों के पास से पुलिस ने एक मोटरसाईकिल, दो वाशिंग मशीन और दो मोबाईल फोन बरामद किया गया है।

पत्नी के हत्यारे पति को सश्रम आजीवन करावास के साथ 50 हजार रूपये अर्थ दंड

अररिया // अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम मनोज कुमार तिवारी की अदालत ने पत्नीहंता पति को सश्रम आजीवन कारावास के साथ पचास हजार रुपये के अर्थ दंड की सजा सुनाई।न्यायालय ने सत्र वाद संख्या 670/2025 में सजा सुनाई।साथ ही जुर्माने की रकम नहीं अदा करने पर दोषी की तीन महीने तक की अतिरिक्त सजा भुगतने का आदेश भी न्यायालय ने अपने निर्णय में दिया।सजा पाने वाला दोषी 26 वर्षीय मो. गालिब पिता मो. इदरीस अररिया के ककुड़वा,बसंतपुर, वार्ड संख्या 29 का रहने वाला है।

मामला अररिया (बैरगाछी) थाना कांड संख्या 1115/2023 से संबंधित है। इसके सूचक मृतका बीबी सुहाना उर्फ झुमकी के पिता मो. परवेज पिता स्व.नूर मोहम्मद हैं,जो बैरगाछी के मैनापुर, वार्ड संख्या 13 के निवासी हैं। कांड में दोषी सहित कुल सात लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था और पुलिस ने अनुसंधान पूर्ण कर केवल दोषी मोहम्मद गालिब के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया। शेष अन्य छह आरोपियों के विरुद्ध पूरक अनुसंधान लंबित रखा गया है । 16 दिसंबर 2022 को दर्ज कराई गई कांड में सूचक ने बताया था कि उसकी पुत्री का विवाह छह महीने पूर्व मो. गालिब से सम्पन्न हुई थी और उसके सुसराल वाले उसे दहेज में पांच लाख रुपये के लिए प्रताड़ित करता था।

पैसे नहीं मिलने पर मृतका बीबी सुहाना प्रवीण उर्फ झुमकी का गला घोंटकर हत्या कर शव को पनार नदी से पूर्व उत्तर में पेड़ से लटका दिया गया था। मौका ए वरदात मृतका की पेड़ से झूलते लाश मिली थी।सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक राजानंद पासवान और बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता कमलेश कुमार ठाकुर ने न्यायालय के समक्ष अपनी – अपनी दलीलें प्रस्तुत किया । दोनो ही पक्षों को सुनने के बाद पत्नी हत्त्या के आरोपी पति को न्यायालय ने दोषी मानते हुए सश्रम आजीवन कारावास के साथ पचास हजार रुपये के अर्थ दंड की सजा सुनाई ।

Ed अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर हाई कोर्ट की रोक बरकरार

रांची // झारखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अधिकारियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर), पुलिस जांच और किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर अगले आदेश तक रोक जारी रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार को जवाब का अध्ययन करने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 24 फरवरी निर्धारित की है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त समय की मांग की गई, जिसे न्यायमूर्ति एस.के. द्विवेदी की अदालत ने स्वीकार कर लिया। ईडी की ओर से अधिवक्ता सौरभ कुमार ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मामला निराधार है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यह मामला एयरपोर्ट थाना कांड संख्या 05/2026 से संबंधित है, जिसमें ईडी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। वर्तमान में अदालत इस याचिका की मेंटेनबिलिटी, यानी इसकी सुनवाई योग्य होने के मुद्दे पर विचार कर रही है।इससे पहले की सुनवाई में अदालत ने ईडी कार्यालय की सुरक्षा को लेकर भी अहम निर्देश दिए थे।

अदालत ने केंद्र सरकार को कार्यालय की सुरक्षा के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) या अन्य अर्धसैनिक बलों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। साथ ही रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अदालत ने हिनू स्थित ईडी कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया था।ईडी अधिकारियों ने अपनी याचिका में अदालत से अनुरोध किया है कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और आपराधिक कार्रवाई को रद्द किया जाए या मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, जैसे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), को सौंप दी जाए।

इसके अलावा ईडी ने शिकायतकर्ता संतोष कुमार के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की है।ईडी के अनुसार, संतोष कुमार पर लगभग 23 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन का आरोप है, जो कथित पेयजल घोटाले से जुड़ा है। एजेंसी ने उनके खिलाफ ईसीआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। ईडी का कहना है कि 12 जनवरी 2026 को संतोष कुमार स्वयं ईडी कार्यालय पहुंचे थे, जहां पूछताछ के दौरान वे अचानक उत्तेजित हो गए और खुद को चोट पहुंचा ली। इसके बाद उन्होंने ईडी अधिकारियों पर हमला करने का आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में मामला दर्ज कराया।

फिलहाल उच्च न्यायालय के इस आदेश से ईडी अधिकारियों को अंतरिम राहत मिली है। अब 24 फरवरी को होने वाली सुनवाई में राज्य सरकार अपना पक्ष रखेगी, जिसके बाद अदालत आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगी

ससुराल आए दामाद की पीट-पीटकर हत्या, प्रेम विवाह से ससुर था नाराज

लखनऊ // उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में काकोरी थाना क्षेत्र में ससुराल आए दामाद की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम भेजकर चार आराेपिताें को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है। सहायक पुलिस आयुक्त काकोरी शकील अहमद ने मंगलवार काे बताया कि काकोरी ग्राम लालताखेड़ा के बाहर एक बाग में दो भाइयाें को चाकू मार दिया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने फारेंसिक टीम के साथ घटना की जांच कर घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

इलाज के दौरान एक युवक की मौत हो गई, जबकि एक भाई की हालत गंभीर है।सहायक पुलिस आयुक्त ने बताया कि मृतक की पहचान पीलीभीत जिले के निवासी ग्राम रामसागर (24) के रूप में हुई। पूछताछ में घायल युवक राहुल ने अपनी तहरीर में बताया कि रामसागर का दिसंबर 2024 में काकोरी के ग्राम लालताखेड़ा निवासी कामिनी से प्रेम विवाह हुआ था। कुछ समय से कामिनी ससुराल में रह रही थी। बाद में उसके परिजन उसे अपने घर लालताखेड़ा ले गए। आरोप है कि उसके परिजन उसकी दूसरी जगह शादी कराने की तैयारी कर रहे थे।रविवार को राहुल अपने भाई राम सागर के साथ उसकी पत्नी को विदा कराने लालताखेड़ा आया था। वहां पर कामिनी के पिता भीमा गौतम, उसके पुत्र सुमित, अमित और मौसी का लड़का पंकज से लालताखेड़ा गांव के बाहर बातचीत के दौरान विवाद हो गया। इसके बाद सभी लोगों ने मिलकर राम सागर और उसके भाई राहुल के साथ गाली-गलौज व मारपीट शुरू कर दी।

इसी दौरान सुमित ने चाकू से प्रहार करके रामसागर को घायल कर दिया। राहुल के बीच-बचाव करने पर उसके साथ मारपीट की गई। शोर शराबा होने पर आरोपित मौके से फरार हो गये। इधर, घटना की जानकारी पर पहुंची पुलिस ने घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने राम सागर को मृत घोषित कर दिया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम भेजकर घायल को अस्पताल पहुंचाया।सहायक पुलिस आयुक्त ने बताया कि परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने चार नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई कर रही है।

Online Game। मौत का कारण बनते ऑनलाइन गेम

कोरियन लवर गेम के चलते गाजियाबाद की तीन बहनों की खुदकुशी ने आज के हालात और बच्चों की बदलती मानसिकता को लेकर झकझोर कर रख दिया है। अभी तीन बहनों की चिता की आग ठंडी भी नहीं हुई कि ऑनलाइन गेम के चलते मेरठ का 22 वर्षीय युवक मोहम्मद कैफ हेडफोन लगाकार गेम खेलते खेलते ही बेहोश होकर गिर गया और ब्रेन हेमरेज होने से मौत के आगोश में समा गया। इसे इंटरनेट गेमिंग डिसआर्डर के रुप में देखा व समझा जा सकता है।

फायर-फायर चिल्लाने की लत….

इस तरह की घटनाएं देश-दुनिया में आये दिन हो रही है और इनमें से कुछ ही घटनाएं हमारे सामने आ पाती है। ऐसा नहीं है कि ऑनलाइन गेम की गिरफ्त में हमारे देश के बच्चे या युवा आ रहे हों अपितु दुनिया के अधिकांश देश इस समस्या से दो-चार हो रहे हैं। इस तरह की घटनाओं को हत्या के रुप में ही देखा जाना चाहिए। आत्महत्या कहकर इसे हल्का किया जा रहा है। हालात यहां तक है कि बच्चे या ऑनलाइन गेम खेलने वाले रात को सोने की स्थिति में गेम में चल रहे टास्क से संबंधित बातें बोलते हुए देखे जा सकते हैं। पिछले दिनों ऑनलाइन गेम से ग्रसित बच्चे द्वारा नींद में फायर-फायर चिल्लाने का समाचार आम होता देखा गया। दरअसल, ऑनलाइन गेम मनोस्थिति को इस कदर प्रभावित कर देते हैं कि उठते-बैठते टास्क ही टास्क दिमाग में घूमता रहा है। इसी कारण से दुनिया के कई देशों में बच्चों के लिए इंटरनेट के उपयोग को लेकर सख्ती या रोक जैसे कदम उठाने शुरु किये हैं।

आस्ट्रेलिया, फ्रांस, ब्रिट्रेन, सिंगापुर दक्षिण कोरिया आदि देश इस दिषा में सक्रिय हुए हैं।दरअसल, देखा जाएं तो आनलाइन गेम की लत अन्य नशों से भी अधिक गंभीर होती जा रही है। माना जाता है कि दुनिया के देशों में 1982 में आनलाइन गेमिंग के चलते पहली मौत का मामला सामने आया था जबकि उस समय तो इंटरनेट की पहुंच एक प्रतिशत तक भी नहीं थी। 2022 के बाद ऑनलाइन गेमों की बाढ़ सी आ गई और भारत ही नहीं दुनिया के देशों में गेमिंग के चलते होने वाले दुष्प्रभावों से हिला कर रख दिया है।

कोविड के साइड इफेक्ट या ऑनलाइन गेमिंग के चस्के

देखा जाए तो जहां तक बच्चों में ऑनलाइन गेमिंग के चस्के का प्रमुख कारण माना जाए तो इसे कोविड के साइड इफेक्ट के रुप में देखा जा सकता है। कोविड के चलते बच्चों की जिस तरह से ऑनलाइन कक्षाएं शुरु हुई और जिस तरह से आज भी इसे देखा जा सकता है तो बच्चों के हाथों में एंड्रायड़ फोन आने और ऑनलाइन कक्षाओं के बाद स्क्रिन की अवधि बढ़ने और आकर्षक भ्रमित करने वाले गेमों से बच्चों के जुड़ने से हालात दिन-प्रतिदिन खराब ही हुए हैं। इस लत में बच्चे ही नहीं अपितु युवा भी आते जा रहे हैं। ब्लू व्हेल चैलेंज, पबजी, चोकिंग गेम, फार्टनाइट, फ्री फायर, पपी प्ले टाइम, द बेबी इन येलो, एविल नन, आइसक्रीम आदि गेम ने सर्वाधिक प्रभावित किया है।

ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया मुख्यतौर से दो दिशाओं में चलती है।

ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया मुख्यतौर से दो दिशाओं में चलती है। एक टास्कबेस्ड गेम है तो दूसरे इमर्सिंव गेम है। टास्कबेस्ड गेम में लगातार नए नए टास्क दिए जाते हैं। यहां तक कि ऐसा भी गया है कि इस तरह के गेम में कई बार तो खेलने वाले को स्वयं को नुकसान पहुंचाने वाले टास्क दे दिए जाते हैं। वाइल्ड हंट, विचर 3, होरिजोन जैसे इस तरह के अनेक गेम है। यह तो केवल उदाहरण मात्र है। इसी तरह से इमर्सिंग गेमों में तकनीक और ग्राफिक्स के माध्यम से यर्थाथ दुनिया जैसे हालात दिखाते हैं। जीरो डॉन, रेड डेड, फॉलआउट और इसी तरह के अनेक गेम उपलब्ध है। खतरनाक तथ्य यह है कि 10-12 से लेकर 40 वर्ष तक के लोग इनके ज्यादा शिकार हो रहे हैं।ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया की बात करें तो यह अपने आप में बड़ा व्यापार है। 2024 में 3.7 बिलियन के कारोबार को माना जा रहा है। साल 2029 तक इसके 9.1 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

यानी 2029 तक लगभग तीन गुणा बढ़ जाएगा। सबसे बड़ी चिंतनीय बात यह है कि ऑनलाइन गेम के कारण भले ही मौत के समाचार कभी कभार ही सामने आते हो पर इससे ज्यादा गंभीरता यह है कि मनोवैज्ञानिक असर अधिक दिखाई देने लगा है। ऑनलाइन गेम के लत वालों में डर, अकेलापन, अनिंद्रा, खुद को नुकसान पहुंचाने के साथ ही शारीरिक और मानसिक विकार आम होते जा रहे हैं। कुंठा, आक्रोश, संवेदनहीनता, तनाव आम होते जा रहे हैं।

परिजनों को निरंतर निगरानी रखने की जरूरत…

समय आ गया है जब ऑनलाइन गेमिंग की समस्या का हल खोजा ही जाना चाहिए। अन्यथा हालात दिन-प्रतिदिन बद से बदतर ही होंगे। ऑनलाइन गेमिंग बनाने वालों को तो एक मात्र उद्देश्य अधिक से अधिक पैसा कमाना है उन्हें इसके दुष्प्रभावों से कोई लेना-देना नहीं होता। हालांकि भारत सहित कुछ देशों की सरकारें सक्रिय हुई है। पर मनोवैज्ञानिकों को भी आगे आकर कोई समाधान खोजना होगा वहीं अभिभावकों, परिजनों व समाज का भी दायित्व हो जाता है। परिजनों को निरंतर निगरानी रखने, मोबाइल देखने की समय सीमा तय करने, किसी और रचनात्मक कार्य में लगाने, सामाजिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय करने और परंपरागत आउट डोर गेम्स के प्रति रुचि पैदा करने के ठोस प्रयास करने ही होंगे। सरकार को भी मौत की राह में ले जाने वाले गेम फॉरमेट पर रोक लगाने के सख्त कदम उठाने होंगे। (डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा , लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैंं।)

छात्रों को लेकर पटना जा रही बस दुर्घटनाग्रस्त, दो शिक्षकों की मौत, 11 छात्र जख्मी

रोहतास // जिले के परसथूआ थाना क्षेत्र के ग्राम सोहसा के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 319 पर छात्रों से भरी बस दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से दो शिक्षक की मौत हो गई,जबकि पांच शिक्षक और 11 छात्र गंभीर रूप से जख्मी हैं।

पुलिस के अनुसार सभी शिक्षक और छात्र कैमूर जिला के चैनपुर थाना क्षेत्र के मध्य विद्यालय बढौना के हैं। बस छात्रों और शिक्षकों काे लेकर शैक्षणिक परिभ्रमण पर पटना जा रही थी। घटना साेमवार रात डेढ़ बजे की बताई जाती है। मृतकों में शिक्षक पुनीत कुमार और सुमित कुमार शामिल हैं।एसपी रौशन कुमार ने बताया कि बस दुर्घटना में दो शिक्षक की माैत हो गई है तथा पांच शिक्षक और 11 छात्र जख्मी हुए हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल सासाराम ले जाया गया है। बताया कि बस कुल सात शिक्षक और 36 छात्र के अलावा एक अभिभावक भी सवार थे। एसपी ने बताया कि दोनों शव को पोस्टमार्टम कराने के लिए सदर अस्पताल सासाराम ले जाया गया है।

सोनम वांगचुक मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने की बहस

नई दिल्ली // उच्चतम न्यायालय ने जोधपुर जेल प्रशासन को निर्देश दिया है कि वो लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हिरासत के दौरान दी गई पेन ड्राइव सीलबंद कर कोर्ट में दाखिल करें। उच्चतम न्यायालय ने इस बात का संदेह जताया कि केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक के भाषणों से संबंधित जो ट्रांसक्रिप्ट दी है उसके अनुवाद में काफी फर्क है। जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को करने का आदेश दिया।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सोनम वांगचुक के भाषणों के ट्रांसक्रिप्ट में कई वैसे शब्द हैं जो उन्होंने कहा ही नहीं। तब कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि आपने जो सूची सौंपी है उसमें हिरासत के आदेश का जिक्र ही नहीं है। कम से कम वांगचुक के भाषणों का सही ट्रांसक्रिप्ट तो होना ही चाहिए। तब एएसजी केएम नटराज ने कहा कि एक विभाग ने किया है। हम इसके विशेषज्ञ नहीं हैं। तब कोर्ट ने कहा कि आज के आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के दौर में 98 फीसदी सही होने की गुंजाइश है। तब सिब्बल ने कहा कि हिरासत में लेने वाल ने उस पर भरोसा किया है जिसका अस्तित्व ही नहीं है।

सुनवाई के दौरान हल्के फुल्के अंदाज में कोर्ट ने कहा कि हमने वो भी सुना जो उन्होंने कहा ही नहीं। इस पर सिब्बल ने कहा कि और जो हम कह रहे हैं उन्होंने सुना ही नहीं। तब कोर्ट ने कहा कि हम सुन रहे हैं ना। इस पर सिब्बल ने कहा कि तभी तो हम यहां आये हुए हैं।बता दें कि केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि उन्हें गिरफ्तार करने के बाद लद्दाख में हिंसा थम गई। केएम नटराज ने कहा था कि सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद लद्दाख में हिंसा खत्म हो गई थी। हिंसा का खत्म होना ही बताता है कि उनकी गिरफ्तारी सही थी।

8 जनवरी को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चौरी चौरा कांड का जिक्र करते हुए कहा था कि हिंसा के बाद सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल तत्काल वापस ले लिया था। आपको याद होगा कि गांधीजी ने भी ऐसा ही किया था। जब चौरी चौरा की घटना के बाद हिंसा हुई थी, तो उन्होंने भी बिल्कुल वैसा ही किया था। सिब्बल ने कहा कि हिरासत में लेने के 28 दिन बाद उनको हिरासत में लेने के आधार बताए गए जो कानूनी समय-सीमा का साफ उल्लंघन है। सिब्बल ने कहा कि कानून यह है कि जिन दस्तावेजों के आधार पर हिरासत में लिया गया है अगर आरोपी को उपलब्ध नहीं किया जाता है, तो हिरासत का आदेश रद्द हो जाता है। उच्चतम न्यायालय ने अपने कई फैसलों में यह बात कही है।

मुख्यमंत्री 20 को जायेंगे गिरिडीह, बाहा बोंगा समारोह में होंगे शामिल

रांची // रांची के कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में सोमवार रात गिरिडीह जिले के उपायुक्त रामनिवास यादव ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर श्री यादव ने मुख्यमंत्री को 20 फरवरी 2026 को गिरिडीह में आयोजित होने वाले “मरांग बुरू जुग जाहेर बाहा बोंगा 2026” समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सादर आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने उक्त आमंत्रण को स्वीकार करते हुए अपनी पूर्ण सहमति प्रदान की तथा गिरिडीह वासियों के प्रति अपनी हार्दिक शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

कोर्ट ने यातायात व्यवस्थाओं पर अपनाया कड़ा रुख, अधिकारियों को जारी किया अवमानना नोटिस

रांची // झारखंड उच्च न्यायालय ने हजारीबाग शहर में बढ़ती यातायात समस्या और अव्यवस्थाओं के मामलों में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने आदेश का अनुपालन न करने पर हजारीबाग के उपायुक्त (डीसी), पुलिस अधीक्षक (एसपी) और नगर आयुक्त को अवमानना नोटिस जारी किया है। सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई।

मामले में न्यायालय के 9 जनवरी के आदेश के बावजूद डीसी, एसपी और नगर आयुक्त ने व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल नहीं किया। इनके द्वारा अपने कनिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से शपथ पत्र दायर किए जाने पर अदालत ने नाराजगी जताई। खंडपीठ ने उन्हें 10 मार्च तक व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।

अधिवक्ता अच्युत स्वरूप मिश्रा ने न्यायालय को बताया कि डीसी, एसपी और नगर आयुक्त ने अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं किया और समय सीमा के भीतर शपथ पत्र दाखिल नहीं किया। अधिकारियों को हजारीबाग में सड़क पर अतिक्रमण हटाने, पार्किंग स्थलों पर कब्जा हटाने और खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों को ठीक करने के लिए व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।

अदालत ने पहले भी कहा था कि आदेशों का पालन केवल कागजों पर किया जा रहा है और जमीन पर वास्तविक सुधार नहीं दिख रहा। अब जिम्मेदारी जूनियर अधिकारियों पर नहीं छोड़ी जाएगी, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं जवाबदेही लेनी होगी।

खंडपीठ ने नोट किया था कि 2017 में लगाए गए लगभग 160 सीसीटीवी कैमरे एएमसी न होने के कारण बंद पड़े हैं। अदालत ने अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर संयुक्त बैठक कर स्थिति की समीक्षा और विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। इसके अलावा, पार्किंग स्थलों से अतिक्रमण हटाने और ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराने पर भी जोर दिया गया

अजब गजब : ग्रह दोष निवारण के लिए दो बच्‍चों का कराया कुतिया से विवाह

पूर्वी सिंहभूम // शहर के उलीडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत शंकोसाई रोड नंबर 5 स्थित बस्ती में मागे पर्व के अंतिम दिन हरमंगेया के अवसर पर एक अनोखी और परंपरागत रस्म ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। हो समाज की सदियों पुरानी मान्यता के अनुसार दो छोटे बच्चों का प्रतीकात्मक विवाह कुतिया से कराया गया।मौके पर समाज के बुजुर्गों ने बताया कि यदि किसी बच्चे के ऊपर के दांत पहले निकल आते हैं तो इसे अशुभ संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में भविष्य में संभावित अनहोनी या दुर्घटना से बचाव के लिए यह विशेष अनुष्ठान किया जाता है। मान्यता है कि कुत्ते या कुतिया से प्रतीकात्मक विवाह कराने से अशुभ ग्रहों का प्रभाव समाप्त हो जाता है और बच्चे का जीवन सुरक्षित रहता है। यह परंपरा आज भी हो समाज के कुछ परिवारों में निभाई जाती है।

इस अवसर पर अजय हेंब्रम के चार वर्षीय पुत्र रुपेश हेंब्रम और लक्ष्मण सोय के दो वर्षीय पुत्र सूर्य सोय की अलग-अलग बारात निकाली गई। बस्ती में ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच दोनों बच्चों को पारंपरिक वेशभूषा में सजाया गया। परिजन और ग्रामीण नाचते-गाते हुए बारात में शामिल हुए, जिससे माहौल उत्सवमय बन गया। विवाह से पूर्व समधी मिलन, मंगनी, हल्दी, पांव पूजा जैसी सभी पारंपरिक रस्में पूरी की गईं। महिलाओं ने मंगलगीत गाए और बुजुर्गों ने विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न कराई। इसके बाद साड़ पेड़ के नीचे विवाह की मुख्य रस्म अदा की गई। समाज की मान्यता है कि साड़ पेड़ में विशेष आध्यात्मिक शक्ति होती है और उसके नीचे संपन्न विवाह से बच्चों का ग्रह दोष पेड़ अपने ऊपर ले लेता है, जिससे दोष समाप्त हो जाता है।

Jammu & Kashmir। पहलगाम आतंकी हमले के बाद बंद किये गए 14 पर्यटन स्थल फिर से खोले जायेंगे

श्रीनगर // पहलगाम हमले के बाद बंद किये गए 14 पर्यटन स्थल सोमवार को व्यापक सुरक्षा समीक्षा के बाद फिर से खोलने का फैसला लिया गया है। उपराज्यपाल ने कहा कि गहन सुरक्षा समीक्षा और चर्चा के बाद मैंने कश्मीर और जम्मू डिवीजनों में और अधिक पर्यटन स्थलों को फिर से खोलने का आदेश दिया है जिन्हें एहतियाती उपाय के तौर पर अस्थायी रूप से बंद किया गया था।

जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के अनुसार एहतियाती उपाय के तौर पर अस्थायी रूप से बंद किए गए पर्यटन स्थलों को तत्काल प्रभाव से फिर से खोला जाएगा। उनके अनुसार कश्मीर डिवीजन के 11 पर्यटन स्थलों बडगाम में यूसमर्ग, दूधपथरी, कोकरनाग में दांडीपोरा पार्क, शोपियां में पीर की गली, दुबजान और पदपावन, श्रीनगर में अस्तनपोरा, ट्यूलिप गार्डन, थजवास ग्लेशियर, गांदरबल में हंग पार्क और बारामूला में वुलर/वाटलैब को तत्काल फिर से खोला जाएगा।इसके अलावा जम्मू डिवीजन के 3 पर्यटन स्थल रियासी में देवी पिंडी, रामबन में महू मंगत और किश्तवाड में मुगल मैदान तुरंत खोले जाएंगे। कश्मीर डिवीजन के 3 स्थल गुरेज, अथवाटू और बंगस और जम्मू डिवीजन का 1 स्थल रामबन में रामकुंड बर्फ पिघलने के बाद फिर से खोले जाएंगे। इन स्थलों के फिर से खुलने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और उम्मीद है कि ये स्थल बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करेंगे।

भिवाड़ी फैक्टरी विस्फोट : अवैध पटाखा निर्माण में सात मजदूर जिंदा जले

खैरथल-तिजारा // राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के खुशखेड़ा-भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार सुबह एक केमिकल फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट और आगजनी की घटना में सात मजदूरों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली (एम्स) रेफर किया गया है। हादसे के बाद फैक्टरी को सील कर दिया गया है और अवैध गतिविधियों के संबंध में जांच तेज कर दी गई है।

विपक्ष ने उठाए सवाल, मंत्री बोले– दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

यह हादसा सोमवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे खुशखेड़ा के कारोली औद्योगिक क्षेत्र में हुआ। उस समय फैक्टरी में लगभग 25 मजदूर कार्यरत थे। अचानक हुए तेज धमाके के बाद आग ने पूरी यूनिट को अपनी चपेट में ले लिया। विस्फोट इतना भीषण था कि सात मजदूर जिंदा जल गए। कई शव बुरी तरह जल चुके थे और घटनास्थल पर शरीर के अंगों के टुकड़े बिखरे मिले, जिन्हें रेस्क्यू टीम ने पॉलीथीन में एकत्र किया। मृतकों की शिनाख्त डीएनए जांच से कराई जा रही है।प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संबंधित फैक्टरी में अवैध रूप से पटाखों का निर्माण किया जा रहा था। मौके से बारूद, तैयार पटाखे और पैकिंग सामग्री बरामद हुई है।

वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने घटनास्थल का निरीक्षण कर कहा कि यह गारमेंट जोन है, यहां दूसरा व्यवसाय नहीं हो सकता। प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि गेट पर ताले लगाकर गैरकानूनी तरीके से पटाखे बनाने का कार्य किया जा रहा था। राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि मृतकों की पहचान डीएनए से कराई जा रही है। इस दुखद घटना की गहन जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता दी जाएगी। मंत्री अस्पताल भी पहुंचे और घायलों की स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने पुलिस थाने में मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया।

खैरथल-तिजारा जिला कलेक्टर डॉ. अर्तिका शुक्ला ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह छोटा एक्सप्लोसिव मटेरियल प्रतीत हो रहा है और गैस रिसाव की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने आगामी सात दिनों में पूरे औद्योगिक क्षेत्र की सभी इकाइयों की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान संचालित गतिविधियों, अग्नि सुरक्षा उपायों, वैधानिक अनुमतियों और श्रमिक सुरक्षा मानकों की गहन समीक्षा की जाएगी। नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार पूरे घटनाक्रम की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की है और रीको सहित संबंधित विभागों को सघन निरीक्षण के निर्देश दिए हैं।

इस बीच राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने घटना को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद और चिंताजनक घटना है, जिसने सरकार के सुशासन और बेहतर कानून व्यवस्था के दावों की पोल खोल दी है। जूली ने आरोप लगाया कि समय पर सूचना और राहत नहीं पहुंचने से हताहतों की संख्या बढ़ी। उन्होंने कहा कि भिवाड़ी प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में से एक है, जहां से सरकार को भारी राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में सुरक्षा मानकों, निगरानी और अनुमति प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि वहां विस्फोटक सामग्री संग्रहीत की जा रही थी। ऐसे में किन विभागों ने अनुमति दी? कौन-कौन से विभाग नियमित जांच के लिए जाते हैं और मॉनिटरिंग की क्या व्यवस्था थी? सरकार को इन सभी बिंदुओं पर जवाब देना चाहिए। हि.स.