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देवघर में ‘खेत बचाओ अभियान 2.0’ की शुरुआत, किसानों को मृदा संरक्षण के प्रति किया जागरूक -

देवघर में ‘खेत बचाओ अभियान 2.0’ की शुरुआत, किसानों को मृदा संरक्षण के प्रति किया जागरूक

देवघर/मधुपुर। “खेत बचेगा, किसान बचेगा—देश का भविष्य सुरक्षित बनेगा” के संदेश के साथ देवघर जिले के मधुपुर प्रखंड अंतर्गत बड़ानारायणपुर पंचायत में ‘खेत बचाओ अभियान 2.0’ की शुरुआत की गई। अभियान के तहत किसानों को कृषि भूमि का संरक्षण करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में दर्जनों महिला कृषकों ने भाग लिया और इस पहल की सराहना की।

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कार्यक्रम में कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा), कृषि प्रभाग देवघर की ओर से प्रखंड तकनीकी प्रबंधक (BTM) शशांक शेखर ने किसानों को खेत एवं मृदा संरक्षण के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कृषि भूमि किसानों की अमूल्य संपत्ति है। मिट्टी की उर्वरता में कमी, मृदा कटाव, जल संकट तथा उर्वरकों और कीटनाशकों के असंतुलित इस्तेमाल से कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए मिट्टी को स्वस्थ रखना और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना बेहद जरूरी है।

मिट्टी की जांच के आधार पर करें उर्वरकों का प्रयोग

शशांक शेखर ने किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित मात्रा में उर्वरकों का इस्तेमाल करने, गोबर की खाद एवं कम्पोस्ट का उपयोग बढ़ाने और फसल चक्र अपनाने की सलाह दी। उन्होंने खेती में दलहनी फसलों को शामिल करने तथा जल संरक्षण की विधियों को अपनाने पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (INM) और समेकित कीट प्रबंधन (IPM) जैसी तकनीकों को अपनाकर खेती की लागत कम करने के साथ कृषि को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। खेतों का संरक्षण केवल आज की जरूरत नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी है।

जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर

कार्यक्रम के दौरान ताहिर अंसारी और अमन कुमार ने भी जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि अब किसानों को जागरूक होकर खेती के तरीकों में सकारात्मक बदलाव लाने की जरूरत है। धरती माता को सुरक्षित रखने के लिए रासायनिक खादों के असंतुलित प्रयोग को कम करना और जैविक खाद तथा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना जरूरी है।

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मौके पर उपस्थित महिला कृषकों ने अभियान की सराहना करते हुए कहा कि किसानों को कृषि भूमि के संरक्षण और खेती की बेहतर तकनीकों के बारे में जागरूक करने की दिशा में यह एक सराहनीय पहल है।

टिकाऊ खेती और किसान खुशहाली है अभियान का उद्देश्य

खेत बचाओ अभियान 2.0 का मुख्य उद्देश्य किसानों को जागरूक करना, कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखना तथा पर्यावरण के अनुकूल टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है, ताकि खेती लंबे समय तक लाभकारी बनी रहे और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।

अभियान का संदेश है— “खेत बचाओ, मिट्टी बचाओ, पानी बचाओ—किसान की खुशहाली और देश की समृद्धि बढ़ाओ।”

कार्यक्रम के माध्यम से किसानों से अपील की गई कि वे मिट्टी और जल संसाधनों की रक्षा को अपनी कृषि गतिविधियों का अभिन्न हिस्सा बनाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी उपजाऊ भूमि और बेहतर पर्यावरण मिल सके।

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