देवघर। जिले में मत्स्य पालन, पशुपालन और गव्य विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर गुरुवार को समाहरणालय में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति, वार्षिक लक्ष्य, प्राप्त आवेदनों और लाभुकों के चयन की प्रक्रिया की समीक्षा की गई।

बैठक में उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सरकारी योजनाओं के लिए लाभुकों के चयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। योजनाओं का संचालन पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से सुनिश्चित करने और पात्र लाभुकों तक इसका लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
उपायुक्त ने कहा कि मत्स्य पालन, पशुधन और गव्य विकास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा किसानों की आय बढ़ाने के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। इसलिए इनसे जुड़ी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
बैठक में जिले के जल निकायों का बेहतर उपयोग कर मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, पशुओं के टीकाकरण एवं नस्ल सुधार और दुग्ध समितियों को अधिक सक्रिय बनाने पर चर्चा हुई। संबंधित अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जमीनी स्तर पर कार्य करने का निर्देश दिया गया।
मत्स्य पालन योजनाओं की हुई समीक्षा
मत्स्य विभाग की समीक्षा के दौरान वेद व्यास आवास योजना, विपणन योजना के तहत पिकअप वैन एवं विपणन किट का वितरण, मत्स्य बीज उत्पादन एवं वितरण, सरकारी तालाबों की बंदोबस्ती और तालाबों के जीर्णोद्धार कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई।
उपायुक्त ने लाभुकों के चयन में शत-प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मत्स्य पालन से संबंधित योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया, ताकि अधिक से अधिक पात्र लोग इन योजनाओं का लाभ उठा सकें।
पशुपालन और गव्य विकास योजनाओं पर भी चर्चा
पशुपालन विभाग की समीक्षा के दौरान सुकर विकास, बकरा विकास, कुक्कुट पालन और ब्रायलर कुक्कुट पालन सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली गई।
वहीं, गव्य विकास विभाग के अंतर्गत दुधारू गाय योजना, डीप बोरिंग, वर्मी कंपोस्ट, पशु बीमा, चाफ कटर तथा पनीर एवं खोवा यूनिट की स्थापना जैसी योजनाओं की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने इन योजनाओं के लिए लाभुकों के चयन में विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन करने और पात्रता के आधार पर निष्पक्ष चयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
पंचायत स्तर पर समान रूप से वितरित हों लक्ष्य
बैठक में पशुधन की मृत्यु दर और बीमा दावों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। संबंधित अधिकारियों ने जानकारी दी कि जिले में पशुधन की मृत्यु दर काफी कम है तथा पशुओं की मृत्यु होने पर पशुपालकों को बीमा योजना का लाभ उपलब्ध कराया जाता है।
उपायुक्त ने अधिकारियों को नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण करने और योजनाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लेने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विभागवार निर्धारित लक्ष्यों को प्रखंड स्तर पर पंचायतों एवं जनसंख्या के आधार पर समान रूप से वितरित किया जाए, जिससे अधिकतम पात्र लाभुकों को योजनाओं से जोड़ा जा सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। लाभुकों का चयन पूरी पारदर्शिता और निर्धारित विभागीय नियमों के अनुरूप होना चाहिए।
बैठक में उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा, जिला मत्स्य पदाधिकारी, जिला पशुपालन पदाधिकारी, गव्य विकास पदाधिकारी, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।
